शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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राजकीय विद्यालय बड़ौली में सजा कला का संसार, छात्र-छात्राओं ने रंगों से उकेरे अनूठे पैटर्न

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली में विशेष छाप चित्रण गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
30 अक्टूबर 2026 को 12:17 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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राजकीय विद्यालय बड़ौली में सजा कला का संसार, छात्र-छात्राओं ने रंगों से उकेरे अनूठे पैटर्न
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली में छाप चित्रण गतिविधि का सफल आयोजन हुआ।
  • •कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने रंगों और आकृतियों से कैनवास पर अपनी कल्पनाएं उतारीं।
  • •ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने बच्चों को रंगों के संतुलित प्रयोग और पैटर्न बनाने की तकनीक सिखाई।
  • •ऐसी रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों में एकाग्रता, सूक्ष्म निरीक्षण और सौंदर्यबोध विकसित होता है।

पानीपत जिले के ग्रामीण आंचल में शिक्षा के साथ-साथ कलात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के सिलसिले में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली एक बार फिर चर्चा में है। संस्थान परिसर में हाल ही में एक विशेष छाप चित्रण गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं की अंतर्निहित कलात्मक प्रतिभा को बाहर लाना और उन्हें भारतीय लोक कला व आधुनिक सृजनात्मकता से परिचित कराना था। इस अनूठे आयोजन ने विद्यालय के वातावरण को पूरी तरह से कलामय बना दिया, जहां हर तरफ रंगों और कल्पनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कला के विभिन्न आयामों से रूबरू कराया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कैनवास पर रंगों और विभिन्न आकृतियों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को जीवंत किया। बच्चों ने अपनी कल्पना शक्ति का भरपूर इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग पैटर्न और डिजाइन तैयार किए, जिन्हें देखकर वहां मौजूद शिक्षक भी अचंभित रह गए। यह आयोजन केवल एक गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बच्चों को अपनी भावनाओं और विचारों को रंगों के जरिए व्यक्त करने का एक शानदार मंच प्रदान किया।

छाप चित्रण तकनीक और विद्यार्थियों का हुनर

गतिविधि के दौरान विद्यालय के ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने छात्र-छात्राओं को छाप चित्रण (Block Printing / Stamping) की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को समझाया कि किस प्रकार रंगों का संतुलित प्रयोग करके और विभिन्न प्रकार की आकृतियों को व्यवस्थित करके एक आकर्षक चित्र तैयार किया जा सकता है। बच्चों ने इस तकनीक को बहुत ही कम समय में सीख लिया और अपनी कलाकृतियों में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया। किसी ने ज्यामितीय आकृतियों के जरिए जटिल पैटर्न बनाए तो किसी ने प्राकृतिक रूपों को अपने कैनवास पर उकेरा।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों की एकाग्रता और सूक्ष्म निरीक्षण क्षमता देखते ही बनती थी। प्रत्येक छात्र ने अपने काम को पूरी तल्लीनता के साथ पूरा किया, जिससे यह साबित होता है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को सही मंच और मार्गदर्शन मिले, तो वे कला के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं। कैनवास पर बिखरे रंगों ने न केवल विद्यालय की दीवारों को सजाया, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास को भी एक नई ऊंचाई दी।

गतिविधि विवरणप्रमुख बिंदु
स्थानराजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली, पानीपत
प्रतिभागी वर्गकक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी
मुख्य विषयछाप चित्रण (Stamping & Block Printing Art)
प्रमुख मार्गदर्शकप्रदीप मलिक (ललित कला प्राध्यापक)
उद्देश्यसृजनात्मक सोच, एकाग्रता और कलात्मक कौशल का विकास

शिक्षकों और विशेषज्ञों की राय

कला शिक्षक प्रदीप मलिक ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कलात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में सौंदर्यबोध और रचनात्मक सोच विकसित होती है। जब विद्यार्थी अपने हाथों से किसी सुंदर आकृति को आकार देते हैं, तो उनका आत्मविश्वास स्वतः ही बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी विद्यालय स्तर पर ऐसी कला कार्यशालाओं का आयोजन लगातार किया जाता रहेगा ताकि छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने के और अधिक अवसर मिल सकें।

विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला एक ऐसा माध्यम है जो विद्यार्थियों को तनावमुक्त रखता है और उनकी अध्ययन क्षमता को भी बेहतर बनाता है। प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर इस प्रकार के प्रयासों से छात्रों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होता है, जो आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।

"छाप चित्रण जैसी गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशक्ति को विस्तार देती हैं। रंगों और आकृतियों के जरिए छात्र अपने भीतर छिपे कलाकार को पहचानते हैं, जिससे उनकी एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता में भी सकारात्मक सुधार होता है।" - प्रदीप मलिक, ललित कला प्राध्यापक

स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रभाव और भविष्य की योजनाएं

पानीपत जिले के बड़ौली जैसे ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय अभिभावकों और शिक्षाविदों का भी ध्यान आकर्षित किया है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को मोबाइल और अन्य डिजिटल विकर्षणों से दूर रखकर उनकी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ने का काम करती हैं। विद्यालय प्रशासन की इस पहल की आसपास के इलाकों में भी खूब चर्चा हो रही है, और अन्य स्कूलों के शिक्षक भी इस प्रकार के मॉडल को अपने यहां अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

आने वाले समय में विद्यालय प्रबंधन की ओर से जिला स्तर पर कला प्रदर्शनियां आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि इन छात्र-छात्राओं को और बड़ा मंच मिल सके। पानीपत लाइव ब्यूरो की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुसार, बच्चों की यह कलात्मक उड़ान निश्चित रूप से उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत कर रही है और समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही है।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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