पानीपत जिले के खेल जगत से एक बेहद गौरवशाली और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। ग्रामीण आंचल की खेल प्रतिभाओं ने एक बार फिर अपनी मेहनत और पक्के इरादों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र स्थित बुआना लाखू गांव के रहने वाले युवा मुक्केबाज आदि का चयन जूनियर स्कूली नेशनल मुक्केबाजी प्रतियोगिता के लिए हो गया है। इस उपलब्धि के बाद से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे इलाके में खुशी और जश्न का माहौल है। कम उम्र में ही अपनी खेल कला का लोहा मनवाने वाले इस युवा खिलाड़ी ने साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में कड़ी मेहनत की जाए, तो छोटे गांवों से भी देश का नाम रोशन करने वाले सितारे निकल सकते हैं। खेल प्रेमियों और स्थानीय खेल अकादमियों में इस खबर के बाद खासा उत्साह देखा जा रहा है।
यह मुकाम हासिल करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए आसान सफर नहीं होता, जिसके पीछे महीनों की कड़ी तपस्या और पसीना बहाना होता है। आदि के लिए भी यह सफर संघर्ष और अनुशासन से भरा रहा है। उन्होंने इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से पहले कई पड़ावों पर अपनी काबिलियत साबित की है। जिला स्तर की विभिन्न स्पर्धाओं में कई पदक अपने नाम करने के बाद, उन्होंने हाल ही में राज्य स्तर पर अपनी श्रेष्ठता का परचम लहराया था। जयपुर में आयोजित हुई स्कूली राज्य स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उन्होंने बेहतरीन पंच और डिफेंस का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। इसी स्वर्णिम सफलता के आधार पर उनका चयन अब आगामी नवंबर महीने में मणिपुर में होने जा रही प्रतिष्ठित जूनियर स्कूली नेशनल मुक्केबाजी प्रतियोगिता के लिए हुआ है।
जयपुर में स्वर्ण पदक जीतक तय किया नेशनल का सफर
आदि की इस सफलता के पीछे उनकी अटूट मेहनत और खेल के प्रति उनका समर्पण साफ झलकता है। जयपुर के खेल मैदानों में गत 1 अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक चली राज्य स्तरीय स्कूली मुक्केबाजी चैंपियनशिप में हरियाणा भर के धुरंधर खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आदि ने अपने भार वर्ग में तकनीकी कौशल का शानदार नमूना पेश किया और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को मात देते हुए स्वर्ण पदक अपने गले में डाला। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने का उनका यह सिलसिला उनकी निरंतरता और लगन को बयां करता है। स्थानीय खेल जानकारों का मानना है कि इस तरह के कड़े मुकाबलों का अनुभव नेशनल रिंग में उनके बहुत काम आएगा, जहां देश भर के चुनिंदा और बेहतरीन मुक्केबाज एक-दूसरे को टक्कर देने के लिए उतरेंगे।
बुनियादी स्तर से ही खेल की बारीकियों को सीखने और उन्हें रिंग में उतारने के लिए आदि पिछले लंबे समय से अपने गांव में ही स्थित पीएस स्पोर्ट्स एकेडमी में पसीना बहा रहे हैं। ग्रामीण परिवेश में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाते हुए इस एकेडमी ने क्षेत्र के कई युवाओं को नई दिशा दी है। आदि भी इसी एकेडमी का हिस्सा हैं जहां वे रोजाना घंटों अभ्यास करते हैं। उनके इस शानदार सफर में उनके परिवार का भी भरपूर सहयोग और प्रोत्साहन मिला है। उनके पिता चंद्रास और उनकी माता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया है। माता-पिता के त्याग और मार्गदर्शन के कारण ही यह युवा खिलाड़ी आज इस मुकाम तक पहुंचने में सफल हो पाया है, जिसका पूरा श्रेय वे अपने परिजनों को देते हैं।
| प्रतियोगिता का स्तर | स्थान | प्रदर्शन / उपलब्धि | तारीख / माह |
|---|---|---|---|
| जिला स्तरीय मुक्केबाजी | पानीपत | अनेक पदक जीते | विभिन्न चरण |
| राज्य स्तरीय स्कूली मुक्केबाजी | जयपुर | स्वर्ण पदक (Gold) | 1-4 अक्टूबर |
| जूनियर स्कूली नेशनल | मणिपुर | चयन एवं आगामी तैयारी | नवंबर माह |
कोच सुरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में रिंग में निखर रही प्रतिभा
किसी भी खिलाड़ी को तराशने में एक कुशल गुरु की भूमिका सबसे अहम होती है। बुआना लाखू गांव की पीएस स्पोर्ट्स एकेडमी में कोच सुरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में आदि पिछले कई वर्षों से मुक्केबाजी के गुर पूरी तन्मयता से सीख रहे हैं। कोच सुरेंद्र कुमार का कहना है कि आदि कम उम्र में ही बेहद अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी साबित हुए हैं। वे अभ्यास के दौरान कभी भी शॉर्टकट नहीं अपनाते और अपनी गलतियों पर काम करके उन्हें सुधारने में विश्वास रखते हैं। कोच का मानना है कि यदि आदि इसी लगन और फोकस के साथ रिंग में उतरते रहे, तो आने वाले समय में वे हरियाणा और देश के मुक्केबाजी मानचित्र पर अपनी एक मजबूत और स्थाई पहचान बनाने में पूरी तरह कामयाब होंगे। फिलहाल एकेडमी में उनकी स्ट्रेंथ, स्टैमिना और पंचिंग स्पीड को लेकर विशेष ट्रेनिंग सेशन चलाए जा रहे हैं।
खिलाड़ी आदि ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी इस सफलता पर बेहद प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने का अहसास उनके लिए बेहद खास था, लेकिन उनका असली सपना अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है। वे फिलहाल मणिपुर में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनका मुख्य लक्ष्य आने वाले समय में देश के बड़े और प्रतिष्ठित मुक्केबाजों की श्रेणी में शुमार होना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए खेलना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और अपने कोच के सटीक मार्गदर्शन को दिया है, जिनके बिना यह मुकाम हासिल करना उनके लिए संभव नहीं था।
"राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब मेरा पूरा ध्यान आगामी नेशनल चैंपियनशिप पर है। मैं मणिपुर में होने वाली इस प्रतियोगिता में अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना चाहता हूं। मेरा सपना देश के लिए खेलना और अपने माता-पिता व गांव का नाम रोशन करना है। इसके लिए मेरे कोच और परिवार मेरा सबसे बड़ा संबल हैं।" - आदि, युवा मुक्केबाज
स्थानीय खेल जगत और युवाओं पर सकारात्मक प्रभाव
आदि के राष्ट्रीय स्तर पर इस चयन ने पानीपत जिले के खेल परिदृश्य में एक नई ऊर्जा भर दी है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों के युवाओं के लिए यह एक मिसाल बन गया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि जज्बा पक्का हो, तो हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है। पानीपत के खेल प्रेमियों और युवाओं में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि कैसे स्थानीय अकादमियां छोटे शहरों से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर चमकने वाले हीरे तैयार कर रही हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि खेल युवाओं को नशे और गलत राह से दूर रखने का सबसे बेहतरीन जरिया हैं और प्रशासन को भी ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव बुनियादी ढांचा और आर्थिक सहायता मुहैया करानी चाहिए ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।
आदि की यह उपलब्धि न केवल बुआना लाखू गांव के लिए बल्कि पूरे पानीपत जिले के लिए गर्व का विषय है। आने वाले नवंबर माह में जब वे मणिपुर की रिंग में उतरेंगे, तो पानीपत के तमाम खेलप्रेमियों की निगाहें उनके प्रदर्शन पर टिकी होंगी। स्थानीय स्तर पर लोग उनके उज्ज्वल भविष्य और नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने की कामना कर रहे हैं। इस प्रकार की खबरें क्षेत्र की युवा पीढ़ी को खेलों की तरफ आकर्षित करने में उत्प्रेरक का काम करती हैं, जिससे आने वाले दिनों में पानीपत से और भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभरकर सामने आ सकेंगे।




