पानीपत जिले में आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं के त्वरित निवारण को लेकर प्रशासनिक मशीनरी अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। हाल ही में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने एक उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सीएम विंडो पर दर्ज मामलों की गहन समीक्षा की। इस बैठक में स्पष्ट किया गया कि जनशिकायतों के समाधान में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार की इस प्राथमिकता के बाद जिला प्रशासन ने भी अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लाते हुए मैदानी स्तर पर अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न काटने पड़ें।
राज्य स्तर से मिले इन दिशा-निर्देशों के तुरंत बाद पानीपत के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिला सचिवालय में तमाम विभागीय अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में समझाया कि सीएम विंडो महज कागजी कार्रवाई या खानापूर्ति का जरिया नहीं है, बल्कि यह सरकार और सीधे आम नागरिक के बीच संवाद स्थापित करने का सबसे सशक्त और मुख्य माध्यम है। जिला प्रमुख ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि प्रत्येक आवेदन को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और तय समयसीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ उसका निपटारा सुनिश्चित किया جائے۔
समीक्षा बैठक और प्रशासनिक अधिकारियों की दो टूक हिदायत
आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले के तमाम प्रमुख विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि कई बार शिकायतें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे आमजन का व्यवस्था से विश्वास डगमगाने लगता है। इस स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को यह विशेष हिदायत दी गई है कि वे प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रार्थी की समस्या का जड़ से समाधान हो रहा है या नहीं। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
बैठक में प्रशासनिक तंत्र की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए जमीनी स्तर पर पारदर्शिता लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों से कहा गया कि वे केवल कागजी रिपोर्ट तैयार करने पर ध्यान न दें, बल्कि धरातल पर जाकर देखें कि शिकायतकर्ता संतुष्ट है या नहीं। जनता की शिकायतों के प्रति उदासीनता दिखाने वाले विभागों की सूची तैयार कर उनकी मॉनिटरिंग सख्त कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी कोताही से बचा जा सके।
| अधिकारी का नाम | पदनाम | जारी किए गए प्रमुख निर्देश |
|---|---|---|
| डॉ. सुमिता मिश्रा | अतिरिक्त मुख्य सचिव | वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सीएम विंडो मामलों की त्वरित समीक्षा और पारदर्शी कार्रवाई के आदेश। |
| डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ | उपायुक्त, पानीपत | शिकायतों को औपचारिकता न समझकर पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ निस्तारित करने की हिदायत। |
| टीनू पोसवाल | नगराधीश | केवल पोर्टल पर जवाब अपलोड न कर शिकायतकर्ता को वास्तविक और स्थायी राहत सुनिश्चित करने पर जोर। |
| अंकित चौकसे | एडीसी | सभी विभागाध्यक्षों को लंबित मामलों की व्यक्तिगत निगरानी कर समयसीमा में तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के निर्देश। |
अधिकारियों की व्यक्तिगत निगरानी और जवाबदेही तय करने पर जोर
नगराधीश टीनू पोसवाल ने बैठक में अपने विचार रखते हुए स्पष्ट किया कि सीएम विंडो पर आने वाली प्रत्येक शिकायत के पीछे एक नागरिक का शासन प्रणाली पर अटूट विश्वास जुड़ा होता है। इसलिए अधिकारी इस जिम्मेदारी को हल्के में न लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि पोर्टल पर केवल जवाब अपलोड कर देना या फाइल बंद कर देना समाधान नहीं है। जब तक प्रार्थी को उसकी समस्या से वास्तविक और स्थायी राहत नहीं मिल जाती, तब तक उस मामले को बंद नहीं माना जाना चाहिए। प्रशासनिक टीम को यह सुनिश्चित करना होगा कि आमजन की हर छोटी-बड़ी समस्या का संतोषजनक अंत हो।
इसके साथ ही अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) अंकित चौकसे ने बैठक में सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़े लंबित मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विभाग में पेंडेंसी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपनी होगी। प्रशासनिक अमले की इस सक्रियता से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पानीपत जिले में जनशिकायतों के समाधान की गति में काफी तेजी आएगी और लोगों को राहत मिलेगी।
"सीएम विंडो सरकार और आम नागरिक के बीच संवाद का मुख्य माध्यम है। प्रत्येक शिकायत को औपचारिकता न समझकर पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ निस्तारित किया जाए, अनावश्यक देरी कतई बर्दाश्त नहीं होगी।" - जिला प्रशासन, पानीपत
स्थानीय जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव
पानीपत जिले में इस प्रकार की उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठकों और कड़े निर्देशों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव स्थानीय जनजीवन पर पड़ता है। अक्सर आम नागरिकों की यह शिकायत रहती है कि सरकारी कार्यालयों में उनके काम समय पर नहीं होते और छोटी-छोटी फाइलों के लिए उन्हें चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में जब शीर्ष स्तर से अधिकारियों को सीधे निर्देश मिलते हैं और उनकी जवाबदेही तय की जाती है, तो व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश बढ़ जाती है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इन प्रशासनिक कदमों के बाद उनके रुके हुए कार्य तेजी से निपटेंगे और अधिकारियों के रवैये में और अधिक पारदर्शिता आएगी।
दूसरी ओर, सरकारी महकमों में भी इन दिशा-निर्देशों के बाद सुस्ती छोड़कर तेजी दिखाने का माहौल बन रहा है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से न केवल शिकायतों का निस्तारण समय पर होगा, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर भी लगाम लगेगी। पानीपत के नागरिक अब इस बात की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन की यह सख्ती धरातल पर उतरेगी और उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अब दफ्तरों के और चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
आगामी प्रशासनिक कदम और निगरानी प्रणाली
भविष्य में इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष मॉनिटरिंग सेल सक्रिय किया जा रहा है, जो हर हफ्ते सीएम विंडो की प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगा। जो विभाग तय समयसीमा के भीतर शिकायतों का समाधान करने में असफल रहेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि पानीपत जिले का कोई भी नागरिक अपनी समस्या को लेकर परेशान न हो और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व शिकायतों के निवारण तंत्र का सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।




