पानीपत जिले में बदलते मौसम के बीच मच्छरों से होने वाली बीमारियों ने एक बार फिर पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिले में डेंगू के तीन नए मरीज और मलेरिया का एक नया रोगी सामने आया है। इन ताजा मामलों के जुड़ने के साथ ही इस वर्तमान सीजन में जिलेभर में डेंगू से पीड़ित कुल मरीजों की संख्या 47 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों के सामने आने के बाद से ही लगातार निगरानी रख रहा है और संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए मैदानी स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
केवल डेंगू और मलेरिया ही नहीं, बल्कि इसके साथ ही पानीपत के शहरी इलाकों और ग्रामीण बस्तियों में चिकनपॉक्स के भी कुल सात मामले दर्ज किए जा चुके हैं। मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव और तापमान में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इन दिनों जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है, विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों के मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरते जाने की सख्त आवश्यकता है ताकि किसी भी तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का मैदानी एक्शन और एंटी-लार्वा गतिविधियां
बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने उन तमाम इलाकों में विशेष अभियान छेड़ दिया है जहां से संक्रमण के नए मामले रिपोर्ट हुए हैं। स्वास्थ्य टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वहां एंटी-लार्वा गतिविधियों को तेज कर दिया है। नालियों, जलभराव वाले स्थानों और खुले में रखे बर्तनों में लार्वा रोधी रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ ही घर-घर जाकर पानी के स्रोतों की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं भी मच्छरों का प्रजनन न हो पा रहा हो।
प्रशासन की ओर से शहरवासियों को लगातार यह समझाया जा रहा है कि मच्छरों की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्वच्छता सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा बस्तियों में पर्चे बांटकर और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को साफ पानी को एक जगह इकट्ठा न होने देने और पानी की टंकियों को ढककर रखने की हिदायत दी जा रही है ताकि इस गंभीर स्वास्थ्य संकट को शुरुआती स्तर पर ही कुचला जा सके।
| बीमारी का नाम | नए मामले | इस सीजन के कुल मरीज | प्रशासनिक कार्रवाई |
|---|---|---|---|
| डेंग्यू | 3 | 47 | एंटी-लार्वा स्प्रे व लार्वा नष्ट करना |
| मलेरिया | 1 | डेटा अपडेटेड | रोगी के संपर्क में आए लोगों की जांच |
| चिकनपॉक्स | 7 (कुल) | 7 | चिकित्सकीय निगरानी व परामर्श |
जिला मलेरिया अधिकारी की अपील और चिकित्सीय सलाह
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. बिजेंद्र हुड्डा ने स्थिति पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है और हर एक मामले पर पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों के आसपास पानी बिल्कुल जमा न होने दें। घरों में इस्तेमाल होने वाले कूलर, पानी की टंकियों, गमलों, पक्षियों के पानी के परिंदों और फ्रिज की ट्रे की नियमित रूप से सफाई करें। एक सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर के पानी को पूरी तरह सूखाकर उसे साफ करके ही दोबारा भरें, क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही पनपता है।
डॉ. हुड्डा ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द या ठंड लगने जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो वे किसी भी तरह की देरी न करें। तुरंत अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर या अस्पताल पहुंचकर अपनी खून की जांच करवाएं। झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने के बजाय हमेशा योग्य और पंजीकृत डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें, ताकि बीमारी की समय रहते सही पहचान हो सके और उचित उपचार मिल सके।
"जिले में डेंगू के तीन और मलेरिया का एक नया मरीज मिलने के बाद हमारी टीमें पूरी तरह सतर्क हैं। प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-लार्वा गतिविधियों को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। नागरिकों से हमारी अपील है कि वे अपने कूलर और टंकियों को नियमित साफ रखें तथा बुखार होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।" - डॉ. बिजेंद्र हुड्डा, जिला मलेरिया अधिकारी, पानीपत
नागरिकों की सहभागिता और सामुदायिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
पानीपत के स्थानीय निवासियों के लिए यह समय बेहद सावधानी बरतने का है। घरों के आसपास जलभराव न होने देना और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना इस समय की सबसे बड़ी मांग है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और स्थानीय कमेटियों को भी आगे आकर अपने मोहल्लों में फॉगिंग और साफ-सफाई के कार्यों में सहयोग देना चाहिए। जब तक प्रशासन और जनता मिलकर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाएंगे, तब तक मौसमी बीमारियों के इस चक्र को पूरी तरह तोड़ पाना मुश्किल होगा।
पानीपत लाइव की ग्राउंड टीम की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कई रिहायशी इलाकों में अभी भी लोग जल निकासी की समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसके कारण मच्छरों के पनपने की आशंका बनी रहती है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को समन्वय बनाकर ऐसे क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने की जरूरत है। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने और सोते समय मच्छरदानी या ओडोमास जैसे रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि वे और उनका परिवार पूरी तरह सुरक्षित रह सके।




