पानीपत जिले में प्रतिबंधित और नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी के तहत शुक्रवार को जिला ड्रग कंट्रोल विभाग की विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर पानीपत के घनी आबादी वाले क्षेत्रों सुखदेव नगर और सलारगंज में एक बड़ा और औचक संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाया। इस त्वरित कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य मेडिकल स्टोरों द्वारा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना था।
अधिकारियों की इस संयुक्त टीम ने क्षेत्र के कुल सात प्रमुख मेडिकल स्टोरों का दस्तावेजों सहित भौतिक सत्यापन किया। इस औचक जांच के दौरान प्रशासनिक अमले में उस समय हड़कंप मच गया जब एक चुनिंदा मेडिकल स्टोर पर भारी मात्रा में प्रतिबंधित और संदिग्ध दवाइयां मिलीं। टीम की इस पारदर्शिता और सख्ती से यह स्पष्ट हो गया है कि स्वास्थ्य नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी जिला प्रशासन के इस ठोस कदम की सराहना की है, क्योंकि इससे युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाने में मदद मिलेगी.
संदिग्ध मेडिकल स्टोर पर मिले नशे के इंजेक्शन, मांगा गया खरीद-फरोख्त का पूरा रिकॉर्ड
निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान जब ड्रग विभाग की टीम ने सागर मेडिकल स्टोर की फाइलों और स्टॉक की गहनता से पड़ताल की, तो वहां गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इस दुकान से युवाओं द्वारा नशे के रूप में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाने वाले 'ए-विल' के 10 प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद किए गए। जब अधिकारियों ने इन इंजेक्शनों के वैध बिल और खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड मांगा, तो संचालक संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके तुरंत बाद ड्रग विभाग के अधिकारियों ने दुकानदार को सख्त हिदायत देते हुए स्टॉक और बिक्री का पूरा ब्योरा विभाग के समक्ष पेश करने का अंतिम निर्देश जारी किया है।
दूसरी ओर, इसी संयुक्त अभियान के दायरे में आए दो अन्य प्रतिष्ठान—लाइफ सेवर मेडिकोज और रनिश मेडिकोज—की जांच के दौरान एक और गंभीर कानूनी उल्लंघन उजागर हुआ। इन दोनों ही मेडिकल स्टोरों पर निरीक्षण के वक्त कोई भी अधिकृत फार्मासिस्ट मौजूद नहीं था, जो कि ड्रग अधिनियम का खुला उल्लंघन है। नियमों को ताक पर रखकर बिना फार्मासिस्ट के दवाइयां बेचे जाने के मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने दोनों ही संस्थानों को तत्काल प्रभाव से कड़े कारण बताओ नोटिस थमा दिए हैं। इसके साथ ही सिंगला मेडिकल स्टोर, ईश्वर मेडिकल स्टोर, प्रवीन मेडिकल स्टोर और जावा मेडिकल स्टोर के भी तमाम रिकॉर्ड्स को खंगाला गया।
| मेडिकल स्टोर का नाम | स्थान | की गई कार्रवाई / स्थिति |
|---|---|---|
| सागर मेडिकल स्टोर | सुखदेव नगर / सलारगंज | ए-विल के 10 प्रतिबंधित इंजेक्शन मिले, रिकॉर्ड तलब |
| लाइफ सेवर मेडिकोज | सुखदेव नगर क्षेत्र | फार्मासिस्ट अनुपस्थित, कारण बताओ नोटिस जारी |
| रनिश मेडिकोज | सलारगंज क्षेत्र | फार्मासिस्ट अनुपस्थित, कारण बताओ नोटिस जारी |
| सिंगला, ईश्वर, प्रवीन व जावा स्टोर | सुखदेव नगर व सलारगंज | दस्तावेजों व स्टॉक की व्यापक जांच की गई |
प्रशासन की दो टूक: जिले में आगे भी जारी रहेगा औचक निरीक्षण का यह कड़ा अभियान
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे जिला ड्रग कंट्रोलर अधिकारी विजय राजे ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि विभाग का यह अभियान आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक रूप लेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चालू माह के दौरान ही पानीपत जिले के भीतर 30 से अधिक अलग-अलग मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है, जिनमें से नियमों का उल्लंघन करने वाले 10 से ज्यादा दुकानदारों को शिकंजा कसते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि युवाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी तस्कर या लापरवाह मेडिकल संचालक को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर यह भी जानकारी दी गई है कि इस प्रकार के औचक निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से धरातल पर यह परखा जा रहा है कि क्या डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के बिना कोई प्रतिबंधित दवा या नशीला इंजेक्शन युवाओं को बेचा तो नहीं जा रहा है। स्थानीय पुलिस और ड्रग विभाग की यह साझा रणनीति आने वाले समय में नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि मेडिकल स्टोरों से होने वाली इस प्रकार की इनपुट्स पर अब खुफिया तंत्र भी पैनी नजर बनाए हुए है।
"ड्रग एक्ट के नियमों का उल्लंघन और युवाओं के बीच प्रतिबंधित दवाओं का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस महीने हमने 30 से अधिक स्टोरों की जांच कर 10 से ज्यादा को नोटिस दिए हैं, और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।" - विजय राजे, जिला ड्रग कंट्रोलर अधिकारी
स्थानीय जनजीवन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
पानीपत के सुखदेव नगर और सलारगंज जैसे घनी आबादी वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई का स्थानीय बाजार और आम नागरिकों के बीच गहरा सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। अभिभावक लंबे समय से इस बात से चिंतित थे कि कुछ असामाजिक तत्व मेडिकल स्टोरों के जरिए आसानी से युवाओं तक नशीले इंजेक्शन और दवाएं पहुंचा रहे हैं। ड्रग विभाग की इस त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई से न केवल अवैध कारोबारियों में खौफ पैदा हुआ है, बल्कि आम जनमानस में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन शहर की युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है।
दूसरी तरफ, शहर के ईमानदार और नियमों का पालन करने वाले मेडिकल दुकानदारों ने भी इस औचक निरीक्षण का स्वागत किया है। उनका मानना है कि कुछ काली भेड़ें पूरे मेडिकल पेशे को बदनाम कर रही हैं, इसलिए ऐसे तत्वों के खिलाफ विभाग द्वारा की जाने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई से बाजार में स्वच्छ प्रतिस्पर्धा लौटेगी। नागरिकों ने मांग की है कि इस तरह के औचक अभियान केवल विशेष दिनों तक सीमित न रहकर पानीपत के हर गली-मोहल्ले और आउटर कॉलोनियों में नियमित रूप से चलाए जाने चाहिए, ताकि नशे के इस नासूर को जड़ से खत्म किया जा सके।




