पानीपत: हरियाणा पावर एम्प्लॉईज यूनियन के आह्वान पर राज्यभर में शुरू हुई बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। हड़ताल के महज कुछ ही घंटों के भीतर पानीपत समेत प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में बिजली गुल हो गई है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों पर भी गहरा असर पड़ा है। पानीपत लाइव की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कई इलाकों में बीती रात से ही फॉल्ट ठीक न होने के कारण ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है।
हरियाणा में 22 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक बुलाई गई इस हड़ताल को किसान यूनियनों और अन्य विभागों का भी समर्थन मिल रहा है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। हालांकि सरकार की ओर से स्थिति को संभालने के लिए कड़े प्रबंध किए गए हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर कर्मचारियों के काम पर न होने के कारण व्यवस्था चरमरा गई है। पानीपत के टेक्सटाइल हब और रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े इलाकों में भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका से उद्यमी चिंतित नजर आ रहे हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और धारा 163 लागू
कानून व्यवस्था और बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिजली संस्थानों के आसपास किसी भी तरह की अव्यवस्था या उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से सभी बिजली सब-स्टेशनों, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और थर्मल पावर स्टेशनों के 100 मीटर के दायरे में धारा 163 लागू कर दी गई है। कंट्रोल रूम में वरिष्ठ अधिकारियों को 24 घंटे की ड्यूटी पर तैनात किया गया है ताकि क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की लगातार मॉनिटरिंग की जा सके।
| हड़ताल विवरण | विशेष जानकारी |
|---|---|
| हड़ताल की अवधि | 22 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक |
| मुख्य मांग/मुद्दा | नूंह और गुरुग्राम में निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई देने का विरोध |
| प्रशासनिक कदम | बिजली संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में धारा 163 लागू |
| प्रभावित जिले | पानीपत, गुरुग्राम, नूंह, रोहतक, हिसार, फरीदाबाद, जींद, सिरसा आदि |
पानीपत के आम जनजीवन और उद्योगों पर प्रभाव
टेक्सटाइल नगरी के नाम से मशहूर पानीपत में बिजली संकट का सीधा असर यहां के उद्योगों और कामगारों पर पड़ रहा है। पावरलूम और डाइंग यूनिट्स में बिजली कटौती के कारण उत्पादन ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। वहीं, आम नागरिकों को भी पेयजल संकट और गर्मी के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि यह हड़ताल लंबी चली तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
दूसरी ओर, सरकार और यूनियन के बीच गतिरोध को खत्म करने के प्रयास भी जारी हैं। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने चंडीगढ़ में यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने खुद नूंह और गुरुग्राम में निजी कंपनी को बिजली सप्लाई दिए जाने का विरोध किया था और नियामक आयोग के फैसले के खिलाफ अपील भी की जाएगी। पानीपत लाइव ब्यूरो लगातार इस मामले की पल-पल की अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचा रहा है। किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए हैं।

