हस्तकला और हथकरघा के वैश्विक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले पानीपत में औद्योगिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों पर लगातार बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला दमकल विभाग की ओर से सामने आए ताजा आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि शहर की अधिकांश उत्पादन इकाइयों में नियमों की किस हद तक धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि कुल औद्योगिक इकाइयों में से करीब अस्सी प्रतिशत फैक्टरियां बिना किसी वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। इन हालात के बीच जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जाने लगी हैं।
इन औद्योगिक इकाइयों के भीतर सुरक्षा तंत्र की असलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सत्तर प्रतिशत से अधिक फैक्टरियों में आग बुझाने वाले बुनियादी उपकरण या तो पूरी तरह नदारद हैं या फिर बदहाल स्थिति में पड़े हैं। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए जरूरी साधनों का अभाव किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कारखानों में आग लगने की कई डरावनी घटनाएं घटित हो चुकी हैं, जिनमें कई कामगारों को अपनी जान गंवानी पड़ी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। इसके बावजूद न तो उद्योग मालिक अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं और न ही जिम्मेदार महकमे कोई ठोस सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं।
विगत महीनों में शहर में आगजनी की प्रमुख घटनाएं
पानीपत के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले कुछ समय के दौरान आग लगने की कई भयावह दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिन्होंने यहां के सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी है। बीते 23 अक्तूबर को काबड़ी रोड स्थित कुलदीप नगर में पॉलिएस्टर से जुड़ी एक फैक्टरी में अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिसकी चपेट में आने से आसपास के रिहायशी मकानों की दीवारों में भी गहरी दरारें तक पड़ गईं। इसी तरह 23 अगस्त को सेक्टर-29 पार्ट-2 की एक रग्स निर्माण इकाई में भी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। इसके अलावा सितंबर माह के दौरान मॉडल टाउन की कश्यप कॉलोनी स्थित जूट एवं कारपेट निर्माण इकाई में घटी घटना में पांच महिला श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गई थीं, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी रोष फैल गया था।
शहर के अन्य हिस्सों की बात करें तो 14 फरवरी को गंगा राम कॉलोनी स्थित एक कॉटन फैक्टरी में लगी आग के कारण पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। इससे ठीक तीन दिन पहले 11 फरवरी को वेस्ट क्लॉथ के एक बड़े गोदाम में लगी आग इतनी भयंकर थी कि उस पर काबू पाने के लिए पानीपत के अलावा पड़ोसी जिलों करनाल और सोनीपत से भी लगभग 15 दमकल गाड़ियों को आपातकालीन रूप से बुलाना पड़ा था। इसके पूर्व 21 नवंबर 2025 को बलाना गांव स्थित सीआरजी कॉटेक्स धागा फैक्टरी शॉर्ट सर्किट की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गई थी। वहीं, उससे पहले पांच दिसंबर 2024 को भी इसी गांव की एक अन्य फैक्टरी में आग लगने से दो मजदूरों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई थी, जो इन हादसों की भयावहता को बयां करती है।
| घटना की तिथि | क्षेत्र / स्थान | दुर्घटना का विवरण |
|---|---|---|
| 23 अक्तूबर | काबड़ी रोड (कुलदीप नगर) | पॉलिएस्टर फैक्टरी में भीषण आग, आसपास के मकानों में पड़ी दरारें। |
| 23 अगस्त | सेक्टर-29 पार्ट-2 | रग्स निर्माण इकाई में आग लगने से भारी नुकसान। |
| सितंबर माह | मॉडल टाउन (कश्यप कॉलोनी) | जूट व कारपेट फैक्टरी में आग, पांच महिला मजदूर गंभीर रूप से झुलसीं। |
| 14 फरवरी | गंगा राम कॉलोनी | कॉटन फैक्टरी में आगजनी से मची अफरा-तफरी। |
| 11 फरवरी | वेस्ट क्लॉथ गोदाम | भीषण आग बुझाने के लिए करनाल और सोनीपत से बुलानी पड़ीं 15 दमकल गाड़ियां। |
| 21 नवंबर 2025 | बलाना गांव | शॉर्ट सर्किट के चलते सीआरजी कॉटेक्स धागा फैक्टरी जलकर खाक। |
| 05 दिसंबर 2024 | बलाना गांव | फैक्टरी में आग लगने से दो मजदूरों की जिंदा जलकर मौत। |
अधिकारियों की दलीलें और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका
लगातार हो रहे इन हादसों के बावजूद धरातल पर सुरक्षा मानकों के पालन के मामले में अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि, जिला दमकल विभाग के अधिकारियों का पक्ष है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले लापरवाह इकाई मालिकों को समय-समय पर कानूनी नोटिस जारी किए जाते हैं। दूसरी ओर, श्रमिक संगठनों और स्थानीय जानकारों का स्पष्ट तौर पर मानना है कि महज नोटिस देने भर से कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। जब तक प्रशासन द्वारा बिना एनओसी के संचालित हो रही सभी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त सीलिंग अभियान नहीं चलाया जाता और नियमित रूप से फायर सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक इस प्रकार के हादसों पर रोक लगाना और श्रमिकों की बहुमूल्य जिंदगियों को बचाना असंभव बना रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पानीपत जैसे घनी आबादी वाले और बड़े औद्योगिक केंद्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पूरे शहर के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। शहर की संकरी गलियों और आवासीय क्षेत्रों के करीब चल रही ये फैक्टरियां किसी भी बड़े संकट को न्योता दे रही हैं। यदि समय रहते प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह लापरवाही और अधिक गंभीर मानवीय त्रासदियों का कारण बन सकती है। इसके लिए आवश्यक है कि औद्योगिक संघों और सरकारी एजेंसियों को मिलकर एक साझा कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, जिससे प्रत्येक इकाई में सुरक्षा के सभी आवश्यक पैमानों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य रूप से हो सके।
"नियमित रूप से फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाना चाहिए और जो इकाइयां बिना एनओसी के चल रही हैं, उन्हें तुरंत सील किया जाए, तभी जाकर हमारे श्रमिकों की जान बचाई जा सकती है।" - सुनील दत्त, श्रमिक नेता
आगामी कानूनी कदम और सुधार की आवश्यकता
औद्योगिक सुरक्षा के इस नाज़ुक पहलू को सुधारने के लिए अब स्थानीय स्तर पर कड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग जोर पकड़ रही है। नागरिक समाज और श्रमिक यूनियनों का दबाव बढ़ने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग जल्द ही शहरभर की औद्योगिक इकाइयों का व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू करेंगे। नियमों की अनदेखी करने वाले प्रबंधकों के खिलाफ भारी जुर्माने और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।




