शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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इंस्पायर मानक योजना: पानीपत में लक्ष्य से पिछड़े विचार, निजी संस्थानों की उदासीनता आई सामने

पानीपत जिले में इंस्पायर मानक विज्ञान प्रतियोगिता के तहत तय लक्ष्य से 573 मौलिक विचार कम मिले हैं।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
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30 अक्टूबर 2026 को 12:42 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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इंस्पायर मानक योजना: पानीपत में लक्ष्य से पिछड़े विचार, निजी संस्थानों की उदासीनता आई सामने
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •पानीपत जिले को इस शैक्षणिक सत्र में कुल 1550 मौलिक विचार भेजने का आधिकारिक लक्ष्य दिया गया था।
  • •निर्धारित अंतिम तिथि तक जिलेभर से केवल 977 विद्यार्थियों के ही प्रोजेक्ट आइडिया पोर्टल पर दर्ज हो सके।
  • •जिले के सभी 176 राजकीय विद्यालयों ने अपने हिस्से का पांच-पांच आइडिया भेजने का कोटा पूरी तरह से निभाया।
  • •अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने के बावजूद चुनिंदा 22 निजी स्कूलों की कम भागीदारी से जिले का प्रदर्शन प्रभावित हुआ।

विद्यार्थियों के भीतर वैज्ञानिक जिज्ञासा और सृजनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली प्रतिष्ठित इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना के अंतर्गत पानीपत जिला इस बार तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने में सफल नहीं हो पाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बच्चों को नई दिशा देने वाली इस पहल के तहत जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा एक निश्चित संख्या में मौलिक विचारों का संकलन किया जाना था, ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं पर युवा वैज्ञानिक अपने मॉडल तैयार कर सकें। हालांकि, अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिले की कुल भागीदारी अपेक्षित स्तर से पीछे रह गई है और इस स्थिति के पीछे मुख्य रूप से गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों का सुस्त रवैया प्रमुख कारण बनकर उभरा है।

शैक्षणिक सत्र के दौरान पानीपत जिले के लिए कुल 1550 मौलिक और रचनात्मक विचार भेजने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया था। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से आवेदन की समयसीमा को भी 15 सितंबर से बढ़ाकर 10 अक्टूबर तक बढ़ाया गया था, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसका लाभ उठा सकें। इसके बावजूद जब पोर्टल पर प्राप्त प्रविष्टियों की अंतिम समीक्षा की गई, तो कुल संख्या महज 977 तक ही सीमित रह गई। इस प्रकार, पूरा जिला अपने निर्धारित लक्ष्य से 573 आइडिया पीछे छूट गया, जिससे शिक्षा विभाग के भीतर भी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर क्यों निजी संस्थानों ने इस राष्ट्रीय महत्व की महत्वकांक्षी योजना को लेकर पर्याप्त उत्साह नहीं दिखाया।

राजकीय विद्यालयों ने निभाई जिम्मेदारी, निजी प्रबंधन पर उठे सवाल

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि जिले के तमाम सरकारी स्कूलों ने अपनी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए शत-प्रतिशत परिणाम दिए। पानीपत जिले के सभी 176 राजकीय विद्यालयों ने अपने यहां से अनिवार्य रूप से पांच-पांच बेहतरीन मौलिक विचार अपलोड किए और कुल 880 का निर्धारित कोटा सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया। इसके विपरीत, जिले में संचालित सैकड़ों निजी विद्यालयों की तरफ से बेहद निराशाजनक और उदासीन रवैया देखने को मिला। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, केवल 22 निजी स्कूलों ने ही इस योजना में रुचि दिखाई और वहां से लगभग 97 विद्यार्थियों के आइडिया ही आगे बढ़ सके। निजी क्षेत्र के इस ढुलमुल रवैये ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति उनकी गंभीरता पर कई बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

योजना के नियमों के अनुसार, इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा छठी से लेकर 12वीं तक के मेधावी छात्र अपने मौलिक विचारों का प्रस्ताव रखते हैं। चयनित होने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में उनके मॉडल्स और प्रोटोटाइप तैयार करने के वास्ते 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे ट्रांसफर की जाती है। इसके उपरांत इन बच्चों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक प्रदर्शनियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का शानदार मंच मिलता है। राष्ट्रीय स्तर पर चुने जाने वाले शीर्ष 60 मेधावी विद्यार्थियों को देश के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित करने की परंपरा है, जो युवा वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ा प्रेरणास्त्रोत होता है।

जिला का नामप्राप्त आइडियाजनिर्धारित लक्ष्य
अंबाला13821650
भिवानी8501500
चरखीदादरी9541000
फरीदाबाद10811350
फतेहाबाद13161350
गुरुग्राम13211800
हिसार14201950
झज्जर11311650
जींद11051650
करनाल14992050
कैथल12201600
कुरुक्षेत्र14801800
महेंद्रगढ़14641600
नूंह15421700
पानीपत9771550
पंचकूला751900
पलवल13591950
रेवाड़ी10901500
रोहतक8741500
सोनीपत13242250
सिरसा21121900
यमुनानगर8991950
कुल योग2715136150

राज्य स्तर पर भी नहीं पहुंच पाया शत-प्रतिशत आंकड़ा

केवल पानीपत ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश में इंस्पायर मानक योजना के तहत तय किए गए मानकों को पूरी तरह से हासिल नहीं किया जा सका। पूरे प्रदेश के लिए इस बार कुल 36150 आइडियाज का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले अंततः केवल 27151 प्रोजेक्ट ही पोर्टल पर दर्ज हो सके। यदि आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया जाए तो पूरे राज्य में लगभग 8999 आइडिया कम पहुंचे, जिससे कुल लक्ष्य का लगभग 24.9 प्रतिशत हिस्सा अधूरा रह गया। इस प्रकार हरियाणा ने अपने कुल निर्धारित कोटे का करीब 75.1 प्रतिशत हिस्सा ही सफलतापूर्वक प्राप्त किया, जो यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता अभियानों के बावजूद मैदानी स्तर पर कई जगह समन्वय की कमी खटकती रही।

प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना करें तो सिरसा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने 1900 के लक्ष्य के मुकाबले 2112 आइडिया दर्ज कराए और अव्वल रहा, जबकि कई अन्य जिलों में भी भागीदारी का ग्राफ नीचे ही रहा। पानीपत जिले के संदर्भ में शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि यदि निजी विद्यालय अपने सामाजिक और शैक्षणिक उत्तरदायित्व को समझते हुए आगे आते, तो पानीपत भी इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल कर सकता था। चूंकि अब ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन की अंतिम प्रक्रिया पूरी तरह से बंद हो चुकी है, इसलिए जिला प्रशासन के पास इस सत्र में लक्ष्य प्राप्ति का अवसर भी अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।

विद्यार्थियों के भीतर विज्ञान और आधुनिक तकनीक के प्रति रुझान पैदा करने के उद्देश्य से ही इंस्पायर मानक अवॉर्ड योजना का संचालन किया जाता है। इसके तहत बच्चों के मौलिक विचारों को आमंत्रित किया गया था। हर शैक्षणिक सत्र में हमारे जिले से सबसे ज्यादा आवेदन आते रहे हैं, लेकिन इस बार कुछ निजी स्कूलों की साफ उदासीनता और सुस्ती के चलते हम तय किया गया लक्ष्य हासिल नहीं कर सके। - संदीप संभ्रवाल, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, पानीपत

शैक्षणिक सत्र की इस कमी से आगामी सुधारों की उठी मांग

इस पूरी घटना ने स्थानीय स्तर पर अभिभावकों और शिक्षाविदों के बीच यह बहस छेड़ दी है कि निजी शिक्षण संस्थानों को केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों के बौद्धिक विकास से जुड़ी ऐसी राष्ट्रीय योजनाओं में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। पानीपत के बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि समय रहते निजी स्कूलों के प्रबंधकों की कार्यशैली में सुधार नहीं लाया गया, तो आने वाले समय में जिले के युवा छात्र ऐसी मूल्यवान सरकारी योजनाओं के फायदों से वंचित रह जाएंगे।

आगामी सत्रों में इस तरह की कमियों से बचने के लिए अब शिक्षा विभाग एक नई रणनीति पर विचार कर रहा है, जिसके तहत सत्र की शुरुआत से ही निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी और उन्हें समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट अपलोड करने के निर्देश दिए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन भी इस बात पर जोर दे रहा है कि विज्ञान के प्रति बच्चों की रचनात्मकता को निखारने के लिए स्कूलों को अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना होगा ताकि पानीपत का नाम भविष्य में ऐसे आयोजनों में हमेशा शीर्ष पर बना रहे।

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