पानीपत के प्रतिष्ठित महाराजा अग्रसेन स्कूल में शुक्रवार को एक विशेष विधिक साक्षरता और बाल अधिकार जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कानूनी प्रावधानों से अवगत कराना और उन्हें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील बनाना था। कार्यक्रम के दौरान न्यायपालिका, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (PLV) और कानूनी क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की, जिन्होंने स्कूली बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उनके कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब भी दिए। इस तरह के आयोजनों से शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा का वातावरण मजबूत होता है और बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
सत्र के दौरान जुडिशल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMIC) प्रतिभा मेहला, पीएलवी प्रतिनिधि मीनाक्षी और अधिवक्ता ललिता शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। वक्ताओं ने बहुत ही सरल और प्रभावी भाषा में बच्चों को पॉक्सो (POCSO) एक्ट के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण है और इसके क्या प्रावधान हैं। इसके अलावा, बाल अधिकारों के दायरे में आने वाले हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की गई ताकि बच्चे अपने साथ होने वाले किसी भी अन्याय को पहचान सकें और समय रहते आवाज उठा सकें।
कानूनी अधिकारों और सतर्कता पर जोर
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि किसी विद्यार्थी को कभी भी किसी प्रकार के गलत व्यवहार, अनुचित स्पर्श या शोषण का सामना करना पड़े, तो उसे डरने या घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में चुप्पी साधना समस्या को और बढ़ा सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि बच्चे तुरंत अपने माता-पिता, स्कूल के शिक्षकों या फिर संबंधित कानूनी अधिकारियों को इस बात की जानकारी दें। सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है और संवाद के जरिए ही ऐसी अवांछित घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए। समिति के प्रधान शिव कुमार गर्ग ने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ कानूनी समझ और सामाजिक चेतना का विकास होना भी हर विद्यार्थी के जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस तरह के जागरूकता अभियानों से बच्चों के भीतर नैतिक मूल्यों का संचार होता है और वे समाज में अधिक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उभरते हैं। उपप्रधान गौतम गर्ग, मैनेजर धीरज मित्तल और सचिव प्रदीप मित्तल ने भी इस सत्र की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
| कार्यक्रम विवरण | मुख्य बिंदु / जानकारी |
|---|---|
| स्थान | महाराजा अग्रसेन स्कूल, पानीपत |
| प्रमुख वक्ता | प्रतिभा मेहला (JMIC), मीनाक्षी (PLV), ललिता शर्मा (अधिवक्ता) |
| मुख्य विषय | पॉक्सो एक्ट, बाल अधिकार और कानूनी जागरूकता |
| विद्यालय प्रबंधन प्रतिनिधि | शिव कुमार गर्ग (प्रधान), अलका शर्मा (प्राचार्या) |
अधिकारियों और स्कूल प्रशासन की सहभागिता
कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के पूरे स्टाफ ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। प्राचार्या अलका शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और सामाजिक सुरक्षा के मामलों में भी सक्षम बनाएं। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे सत्र के दौरान सीखी गई बातों को अपने दैनिक जीवन में उतारें और अपने सहपाठियों को भी इसके प्रति जागरूक करें। इस दौरान विद्यालय के सभी शिक्षक और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने पूरी अनुशासनबद्धता के साथ कार्यक्रम को संपन्न कराया।
विशेषज्ञों ने यह भी समझाया किशोरावस्था और बाल्यावस्था के पड़ाव पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना शिक्षकों और अभिभावकों की संयुक्त जिम्मेदारी है। बच्चों के साथ दोस्ताना माहौल बनाकर ही उनकी समस्याओं को समझा जा सकता है। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया। अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी न्यायविदों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे सहयोगात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी।
"बच्चों में कानूनी समझ और सामाजिक चेतना विकसित करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। यदि हमारे विद्यार्थी अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों को भली-भांति जानेंगे, तो वे भविष्य की हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकेंगे।" - शिव कुमार गर्ग, प्रधान, स्कूल प्रबंधक समिति
स्थानीय स्तर पर बाल सुरक्षा और जागरूकता का प्रभाव
पानीपत क्षेत्र में हाल के दिनों में बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर इस प्रकार के जागरूकता अभियानों में तेजी आई है। स्थानीय स्कूलों में विधिक साक्षरता शिविरों के आयोजन से अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी यह संदेश स्पष्ट हो रहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जब न्यायपालिका सीधे तौर पर शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ती है, तो इसका बच्चों और समाज पर गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस सत्र ने न केवल विद्यार्थियों को कानूनी रूप से सशक्त बनाया, बल्कि उन्हें यह अहसास भी कराया कि समाज और कानून हर कदम पर उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर है।
इस प्रकार के आयोजनों से पानीपत जिले के अन्य स्कूलों में भी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिससे आने वाले समय में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी आने की उम्मीद है। स्कूल प्रशासन और कानूनी निकायों का यह साझा प्रयास आने वाली पीढ़ी को अधिक सुरक्षित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए ऐसे सत्रों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने की मांग की है।




