पानीपत जिले के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले ने बच्चों और किशोरवय युवाओं को कृमि जनित संक्रमणों से महफूज रखने के लिए अपनी कमर कस ली है। आगामी छह नवंबर को पूरे जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। इस वृहद स्वास्थ्य अभियान के तहत निर्धारित आयु वर्ग के प्रत्येक पात्र बालक और बालिका को कृमिनाशक दवा के रूप में एल्बेंडाजोल की एक निश्चित खुराक का सेवन करवाया जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में सभी संबंधित महकमों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर किसी भी बच्चे को इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहना पड़े।
स्थानीय लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस अभियान की रूपरेखा तैयार की गई। उपायुक्त ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर संपूर्ण जिले में इस स्वास्थ्य कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय पर विशेष जोर दिया। शिक्षा विभाग को यह ताकीद किया गया है कि वे जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों के तमाम सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर संचालित करें। अध्यापकों की देखरेख में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल आने वाले हर एक छात्र को नियमानुसार एल्बेंडाजोल की गोली का सेवन करवाया जाए।
मॉप-अप राउंड और विभिन्न विभागों की समन्वित भूमिका
अभियान के दिन यदि कोई बच्चा किसी चिकित्सीय कारण, स्वास्थ्य समस्या या अनुपस्थिति के चलते दवा खाने से छूट जाता है, तो ऐसे विद्यार्थियों के लिए विशेष मॉप-अप गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीमें घर-घर और विद्यालयों में दोबारा जाकर छूटे हुए बच्चों को चिन्हित करेंगी और उन्हें यह दवा उपलब्ध कराएंगी। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को नोडल जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में चिकित्सा दलों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेंगे।
जन-जन तक इस स्वास्थ्य संदेश को पहुँचाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रचार-प्रसार के अनूठे तरीके अपनाए हैं। परिवहन विभाग और रोडवेज के महाप्रबंधक को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे पानीपत के मुख्य बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक परिवहन माध्यमों पर लगातार जागरूकता संदेश प्रसारित करवाएं। इसके अलावा, विभिन्न सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों की डिजिटल स्क्रीनों पर भी अभियान से जुड़े बैनर और स्लोगन प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो सकें और इस अभियान में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
| अभियान का विवरण | प्रमुख बिंदु एवं प्रशासनिक निर्देश |
|---|---|
| अभियान की तिथि | 6 नवंबर (राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस) |
| मुख्य दवा | एल्बेंडाजोल की एक निर्धारित गोली |
| लक्षित वर्ग | जिले के सभी पात्र बच्चे और किशोर |
| विशेष प्रावधान | छूटे बच्चों के लिए मॉप-अप गतिविधियां |
| प्रमुख सहयोगी विभाग | स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और नगर निगम |
प्रशासनिक समन्वय और शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार
शहरी क्षेत्रों में इस अभियान की सफलता के लिए नगर निगम आयुक्त को विशेष रूप से सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। निगम के माध्यम से विभिन्न वार्डों, कॉलोनियों और बस्तियों में मुनादी करवाने के साथ-साथ होर्डिंग्स और पंपलेट्स के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। समालखा और अन्य उपमंडलों के अंतर्गत आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के एसएमओ को भी अपने स्थानीय क्षेत्राधिकार में इस मुहिम को युद्ध स्तर पर चलाने को कहा गया है, ताकि ग्रामीण अंचल का कोई भी बच्चा इस स्वास्थ्य लाभ से अछूता न रहे।
चिकित्सकों का मानना है कि पेट के कीड़े बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में सबसे बड़े अवरोधक होते हैं, जिससे बच्चों में कुपोषण और खून की कमी (अनीमिया) जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। एल्बेंडाजोल की यह एक छोटी सी गोली बच्चों के स्वास्थ्य स्तर को सुधारने में अचूक हथियार साबित होती है। जिला प्रशासन की इस समयबद्ध और सुनियोजित पहल से पानीपत के लाखों बच्चों को एक स्वस्थ और उज्जवल भविष्य की नींव मिलने की पूरी उम्मीद है, बशर्ते अभिभावक भी इसमें पूर्ण सहयोग दें।
"बच्चों का स्वास्थ्य हमारे जिले का भविष्य तय करता है। छह नवंबर को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर यह सुनिश्चित किया जाए कि पानीपत का हर पात्र बच्चा एल्बेंडाजोल की गोली का सेवन करे। सभी विभाग आपसी समन्वय से इस जनहित अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाएं।" - जिला प्रशासन, पानीपत
अभिभावकों की सहभागिता और आगामी स्वास्थ्य रणनीतियाँ
इस प्रकार के वृहद जन स्वास्थ्य अभियानों की सफलता में समाज और विशेषकर अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जिला प्रशासन ने सभी माता-पिता से अपील की है कि वे छह नवंबर को अपने बच्चों को स्कूल अवश्य भेजें और स्वास्थ्य कर्मियों तथा शिक्षकों द्वारा दी जा रही इस महत्वपूर्ण जानकारी का स्वागत करें। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस बात की भी मॉनिटरिंग करेंगी कि दवा सेवन के तुरंत बाद किसी बच्चे को कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए सभी सीएचसी और पीएचसी में आवश्यक दवाइयों का स्टॉक पहले ही सुरक्षित रखवा लिया गया है।
भविष्य में भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर इस तरह के रोग-थाम अभियान निरंतर जारी रखने की योजना है। पानीपत जिला स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्ति दिलाएगी, बल्कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करेगी। प्रशासन की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि धरातल पर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन अब और अधिक मुस्तैदी के साथ किया जा रहा है, जिसका सीधा फायदा आम जनता और उनके नौनिहालों को मिल रहा है।




