पानीपत जिले में आज शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूर्णिमा का पर्व पूर्ण धार्मिक आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर स्थानीय निवासियों द्वारा अपने घरों और प्रमुख मंदिरों में मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु तथा चंद्रदेव की आराधना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात्रि को जगत जननी मां लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और इस दौरान रात्रि जागरण कर भक्ति भाव से पूजा करने वाले श्रद्धालुओं पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं।
शहर के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। सनातन परंपरा के अनुसार, इस रात दूध और चावल से निर्मित श्वेत खीर को चंद्रमा की चांदनी में रखने का विधान सदियों से चला आ रहा है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है और उसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इसी धार्मिक विश्वास के तहत पानीपत के तमाम परिवारों द्वारा रात के समय खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाएगा, जिसे अगले दिन प्रातकाल प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाएगा।
दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग और पूजा के शुभ मुहूर्त
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के जानकारों के अनुसार, इस वर्ष की शरद पूर्णिमा बेहद खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन कई अत्यंत शुभ योगों का एक साथ निर्माण हो रहा है। पंचांग के अनुसार, इस बार पर्व पर वृद्धि और हर्षण योग के साथ-साथ अत्यंत प्रभावशाली गजकेसरी योग भी बन रहा है। कुंडली में चंद्रमा और गुरु की केंद्र भाव में स्थिति इस योग को पुख्ता कर रही है। इसके अतिरिक्त, तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति को लक्ष्मी-नारायण योग के रूप में देखा जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इन सभी योगों का एक साथ बनना सुख-सौभाग्य, भौतिक समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा में अप्रत्याशित वृद्धि का संकेत माना गया है।
पर्व की तिथियों और समय को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए जानकारों ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11:55 बजे आरंभ होकर 26 अक्तूबर की प्रातः 9:41 बजे तक प्रभावी रहेगी। चूंकि रात्रि का समय पूजन के लिए मुख्य माना जाता है, इसलिए 25 अक्तूबर की रात को ही कोजागरी व्रत और चंद्रदेव की उपासना की जाएगी। वहीं, अगले दिन यानी 26 अक्तूबर को पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान-दान का कार्य संपन्न होगा। इसके अलावा, सर्वार्थ सिद्धि योग 25 अक्तूबर की संध्या 7:22 बजे से शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय तक रहेगा। खीर को चंद्रमा की रोशनी में स्थापित करने के लिए रात्रि 8:30 बजे से मध्यरात्रि तक का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
| पर्व विवरण | तिथिवार एवं समय सारिणी | महत्वपूर्ण धार्मिक महत्व |
|---|---|---|
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 25 अक्तूबर, सुबह 11:55 बजे | कोजागरी व्रत और रात्रि पूजन का आरंभ |
| पूर्णिमा तिथि समापन | 26 अक्तूबर, सुबह 9:41 बजे | स्नान, दान और अनुष्ठान की पूर्णाहुति |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 25 अक्टूबर शाम 7:22 से 26 अक्तूबर सुबह तक | शुभ कार्यों और साधना के लिए उत्तम समय |
| खीर रखने का समय | रात 8:30 बजे से मध्यरात्रि तक | चंद्रमा की किरणों से अमृत प्राप्ति की मान्यता |
पौराणिक मान्यताएं और महारास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथाओं का गहरा संबंध समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, क्षीर सागर के मंथन के दौरान इसी पावन तिथि पर धन की देवी मां महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं। यही कारण है कि इस रात्रि को दीपावली के समान ही मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का मुख्य द्वार माना जाता है। पानीपत के मंदिरों में इस दिन विशेष दीपमालाएं सजाई जाती हैं और भक्तजन रात्रि में भजन-कीर्तन के माध्यम से मां लक्ष्मी का आह्वान करते हैं। इसके साथ ही, इस तिथि का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की अनंत लीलाओं से भी जोड़ा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में शरद पूर्णिमा की इसी मुग्धकारी रात को भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन के वंशीवट पर गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस अद्भुत रासलीला को देखने के लिए स्वयं देवी-देवता आकाश से पुष्प वर्षा करने उतरे थे। संगीत, प्रेम और अध्यात्म के इस समन्वय को याद करते हुए पानीपत के कई सांस्कृतिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा आज भजन संध्या और सत्संग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
"शरद पूर्णिमा का यह पर्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। इस दिन ग्रहों के शुभ संयोग और चंद्रमा की अमृतमयी किरणों से मानसिक शांति व शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। पानीपत वासियों से आग्रह है कि वे इस रात्रि का सदुपयोग सकारात्मक ऊर्जा के संवर्धन के लिए करें।" - स्थानीय आध्यात्मिक चिंतक
स्थानीय जनजीवन और बाजारों पर पर्व का प्रभाव
शरद पूर्णिमा के आगमन से पानीपत के स्थानीय बाजारों में भी खासी रौनक देखने को मिल रही है। दूध, मावा, सूखे मेवे और पूजन सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की अच्छी खासी भीड़ नजर आ रही है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही इस तरह के पारंपरिक पर्व बाजार को गति प्रदान करते हैं। लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने के बाद संध्याकाल में लक्ष्मी पूजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
प्रशासन और स्थानीय समितियों की ओर से भी मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। पानीपत के मुख्य बाजारों और कॉलोनियों में आज शाम से ही उत्सव जैसा माहौल दिखाई दे रहा है, जहां लोग आपसी सौहार्द के साथ इस पावन रात्रि का स्वागत कर रहे हैं।
आगामी व्यवस्थाएं और प्रशासनिक सतर्कता
बढ़ती भीड़ और धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे देवी मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यातायात पुलिस ने भी प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति से निपटने के लिए डायवर्जन प्लान तैयार किया है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से पर्व मनाएं और प्रशासनिक नियमों का पालन करें।




