पानीपत के प्रतिष्ठित राजकीय महिला कॉलेज में शुक्रवार का दिन रचनात्मकता और हुनर के नाम रहा। संस्थान के महिला प्रकोष्ठ की ओर से यहां विभिन्न प्रकार की रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलेज की छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा युवतियों के भीतर छिपी हुई कलात्मक क्षमताओं को बाहर लाना और उन्हें अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से भी दक्ष बनाना था। कार्यक्रम के दौरान कॉलेज परिसर का माहौल पूरी तरह से सृजनात्मक ऊर्जा से सराबोर नजर आया, जहां हर तरफ छात्राओं के हुनर की झलक देखने को मिली।
प्रतियोगिताओं की इस श्रृंखला की शुरुआत प्रात:काल निर्धारित समयानुसार हुई, जिसकी कमान कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जरनैल सिंह सहरावत ने संभाली। उनकी अध्यक्षता में आयोजित इन मुकाबलों में छात्राओं ने अपनी कल्पनाशक्ति का खुलकर इस्तेमाल किया। प्रतियोगिता के मुख्य आकर्षणों में पारंपरिक तोरण निर्माण, आकर्षक दीप सज्जा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वेस्ट मटेरियल यानी अनुपयोगी वस्तुओं से बेहतरीन सजावटी सामान तैयार करना शामिल रहा। छात्राओं द्वारा कबाड़ से जुगाड़ और कला के माध्यम से बनाई गई वस्तुओं ने वहां मौजूद हर देखने वाले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अनुपयोगी बोतलों, गत्तों, पुराने कपड़ों और कागजों से जिस प्रकार की सुंदर वस्तुएं गढ़ी गईं, उन्होंने सभी को चकित कर दिया।
रचनात्मकता के साथ आत्मनिर्भरता का संदेश
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में महिला प्रकोष्ठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. प्रियंका गुप्ता ने इस अवसर पर उपस्थित सभी छात्राओं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन या औपचारिकता निभाना नहीं होता है। उनका मूल ध्येय छात्राओं की आंतरिक प्रतिभा को निखारना और उन्हें भविष्य के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। आज के दौर में हस्तकला और रचनात्मक कौशल के बल पर युवा वर्ग अपने स्टार्टअप या लघु उद्योग की शुरुआत कर सकता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं छात्राओं में आत्मविश्वास का संचार करती हैं और उन्हें अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना सिखाती हैं।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की अन्य सम्मानित शिक्षिकाएं भी पूरी सक्रियता के साथ मौजूद रहीं। इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. सीमा देवी, पूनम कौशिक और पूनम राठी ने विशेष सहयोग प्रदान किया। उन्होंने न केवल प्रतियोगिताओं के दौरान व्यवस्थाओं को संभाला, बल्कि प्रत्येक छात्रा की कलाकृति का बारीकी से निरीक्षण कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। प्राध्यापिकाओं की इस सक्रिय भागीदारी से छात्राओं का मनोबल और अधिक ऊंचा हुआ तथा उन्होंने पूरी तल्लीनता के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया।
| प्रतियोगिता का नाम | मुख्य आकर्षण / सामग्री | उद्देश्य |
|---|---|---|
| तोरण निर्माण | पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन | सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ाव |
| दीप सज्जा | रंग-बिरंगे दीये और मोती | सौंदर्यबोध और रचनात्मकता |
| वेस्ट से बेस्ट | अनुपयोगी वस्तुएं और कबाड़ | पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता |
निर्णायक मंडल की भूमिका और पुरस्कार वितरण समारोह
विभिन्न चरणों में आयोजित इन प्रतियोगिताओं के बाद, सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों का चयन करना निर्णायक मंडल के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हुआ क्योंकि लगभग सभी छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। कड़े मुकाबले के बाद जिन छात्राओं ने अपनी कला का सर्वश्रेष्ठ लोहा मनवाया, उन्हें कार्यक्रम के समापन सत्र में सम्मानित किया गया। कॉलेज प्रशासन की ओर से विजेता छात्राओं को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे उनके चेहरे खिल उठे। नकद पुरस्कार मिलने से न केवल उन छात्राओं का उत्साह बढ़ा, बल्कि अन्य विद्यार्थियों में भी आगामी प्रतियोगिताओं में भाग लेने की ललक पैदा हुई।
समापन समारोह के अंत में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जरनैल सिंह सहरावत ने सभी विजेताओं को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि राजकीय महिला कॉलेज हमेशा से छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है और भविष्य में भी ऐसे सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर जारी रहेगा ताकि बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा सकें।
"हमारा प्रयास केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि हमारी छात्राओं को हर उस हुनर में पारंगत करना है जो उन्हें समाज में आत्मनिर्भर और सशक्त बना सके। ऐसी प्रतियोगिताएं उनके आत्मविश्वास को मजबूत करती हैं।" - डॉ. जरनैल सिंह सहरावत, प्राचार्य, राजकीय महिला कॉलेज
स्थानीय स्तर पर अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रभाव
पानीपत जिले के शैक्षणिक परिदृश्य में इस प्रकार के आयोजन छात्राओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। शहर के बीच स्थित राजकीय महिला कॉलेज में इस तरह की गतिविधियां न केवल छात्राओं को अपनी पढ़ाई से इतर कुछ नया सीखने का अवसर देती हैं, बल्कि उनके मानसिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं। अभिभावकों ने भी कॉलेज प्रशासन के इस कदम की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी ऐसे व्यावहारिक कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे।
स्थानीय नागरिकों और शिक्षाविदों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन छात्राओं को व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। जब छात्राएं कॉलेज स्तर पर ही अपनी कला को मंच और प्रोत्साहन प्राप्त देखती हैं, तो वे उच्च स्तर पर अपने सपनों को पंख देने का साहस जुटा पाती हैं। पानीपत लाइव की ग्राउंड टीम मानती है कि यह पहल क्षेत्र की युवतियों को एक नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगी।




