समालखा के ऐतिहासिक काठ मंडी क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल उस समय और अधिक गहरा गया, जब स्थानीय श्री आदर्श मित्र ड्रामाटिक क्लब के तत्वावधान में आयोजित रामलीला का समापन अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस अंतिम संध्या पर मंचित किए गए भरत मिलाप और भगवान श्रीराम के राजतिलक के सजीव दृश्यों ने उपस्थित समस्त जनसमूह को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और जैसे ही मंच पर संवाद अदायगी शुरू हुई, पूरा वातावरण जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। आयोजकों और स्थानीय निवासियों के सहयोग से यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र में भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है।
पानीपत लाइव ब्यूरो की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, रामलीला के अंतिम चरण में कलाकारों ने अपनी कला का ऐसा उत्कृष्ठ प्रदर्शन किया कि दर्शक दीर्घा में बैठे हर व्यक्ति की आंखें नम और चेहरे पर गर्व का भाव दिखाई दिया। वनवास की कठिन अवधि पूर्ण करने के पश्चात जब प्रभु श्रीराम अपने अनुजों और माता सीता के साथ अयोध्या लौटे, तो भाई भरत के साथ उनका मिलन प्रसंग अत्यंत मार्मिक रहा। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर श्रद्धालु का हृदय भावुक हो गया। इसके तुरंत पश्चात आयोजित राजतिलक समारोह के दौरान उत्साह का एक अलग ही ज्वार देखने को मिला, जहां शहर के गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
मंचन का सिलसिलेवार घटनाक्रम और मुख्य प्रसंग
समालखा की इस प्रतिष्ठित रामलीला के समापन समारोह की शुरुआत संध्या वेला में विधिवत पूजन के साथ हुई। मंच पर सबसे पहले कलाकारों ने अयोध्या वापसी के उस बहुप्रतीक्षित प्रसंग को जीवंत किया, जिसके लिए श्रद्धालु चौदह वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। भरत और श्रीराम के मिलन के संवाद इतने सजीव थे कि दर्शक अपनी कुर्सियों पर मंत्रमुग्ध होकर बैठे रहे। इसके बाद मुकुट और राजसी वस्त्रों से सुसज्जित भगवान श्रीराम के राजतिलक की रस्म पूरी की गई, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को त्रेतायुग की यादों से भर दिया।
| प्रमुख विवरण | विवरण और आंकड़े |
|---|---|
| आयोजक संस्था | श्री आदर्श मित्र ड्रामाटिक क्लब, समालखा |
| स्थान | काठ मंडी प्राचीन मंदिर परिसर, समालखा |
| मुख्य प्रसंग | भरत मिलाप और भगवान श्रीराम का राजतिलक |
| नेतृत्वकर्ता | अनिल बंसल (प्रधान, रामलीला कमेटी) |
इस वृहद सांस्कृतिक आयोजन की सफलता के पीछे स्थानीय कमेटियों और कलाकारों की महीनों की मेहनत जुड़ी हुई थी। कलाकारों ने अपनी बेहतरीन वेशभूषा, संवाद अदायगी और अभिनय के बल पर पौराणिक कथाओं के गहरे संदेशों को आधुनिक समाज के सामने रखा। रावण वध के बाद अयोध्या में उत्सव का माहौल और भाइयों के बीच का प्रेम आज के दौर में पारिवारिक विघटन को रोकने का एक अचूक संदेश देता नजर आया।
गणमान्य अतिथियों और प्रबंधकों की सहभागिता
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे राजतिलक समारोह को संपन्न कराने में समालखा के प्रमुख सामाजिक और व्यापारिक चेहरों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामलीला कमेटी के प्रधान अनिल बंसल ने अपने करकमलों से भगवान श्रीराम का राजतिलक किया। उनके साथ शहर के प्रतिष्ठित उद्यमी और समाजसेवी राधेश्याम जिंदल, रमेश अग्रवाल, पूर्व पार्षद श्याम सुंदर और प्रेम सिंह सैनी ने भी बारी-बारी से भगवान को तिलक लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान व्यवस्था बनाए रखने और आयोजन को सफल बनाने में संजय घावरी, रविंदर धीमान, प्रदीप शर्मा, सर्व जीत बंसल, कुलदीप सरदार और सतीश धीमान जैसे सक्रिय सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
"भगवान श्रीराम का जीवन मानव जाति के लिए सत्य, धर्म, कर्तव्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने का सबसे बड़ा प्रकाशपुंज है। भरत मिलाप का यह प्रसंग भाईचारे, त्याग और समर्पण का सर्वोच्च प्रतीक है, जबकि राजतिलक धर्म की हमेशा होने वाली विजय का चिरस्थायी संदेश देता है। ऐसे आयोजनों से हमारी युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध संस्कृति से जुड़ी रहती है।" - अनिल बंसल, प्रधान, रामलीला कमेटी समालखा
स्थानीय जनजीवन और सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव
पानीपत जिले के समालखा उपमंडल में इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का होना यहां के सामाजिक ताने-बाने को और अधिक मजबूत करता है। आधुनिकता की दौड़ में जहां लोग अपनी परंपराओं से दूर हो रहे हैं, वहीं काठ मंडी जैसी ऐतिहासिक जगहों पर होने वाली रामलीलाएं समुदायों को एकजुट करने का बड़ा जरिया बनती हैं। इस आयोजन ने न केवल व्यापारिक नगरी समालखा के बाजारों में रौनक बढ़ाई, बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने इस धार्मिक उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया और पानीपत जिले की सांस्कृतिक विरासत को गौरवान्वित किया।


