पानीपत जिले के समालखा उपमंडल के अंतर्गत आने वाले विभिन्न रिहायशी इलाकों में आवारा श्वानों (डॉग्ज) का बढ़ता आतंक अब आम नागरिकों की सहनशक्ति की सीमा को लांघ चुका है। बुधवार को एक ही दिन में आवारा कुत्तों ने शहर की कई प्रमुख कॉलोनियों और सड़कों पर खूनी तांडव मचाते हुए दो मासूम बच्चों समेत चार अलग-अलग नागरिकों को बुरी तरह नोंच डाला। इस अचानक हुए हिंसक हमलों से स्थानीय परिवारों में गहरा आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है, विशेषकर उन अभिभावकों में जिनके छोटे बच्चे प्रतिदिन गलियों से होकर स्कूल या खेलने जाते हैं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में हड़कंप मच गया और घायलों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए परिजनों द्वारा प्रयास शुरू किए गए। जख्मों की गंभीरता इतनी अधिक थी कि सामान्य अस्पताल के चिकित्सकों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत अधिकांश घायलों को उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करना पड़ा। पानीपत लाइव ब्यूरो की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, समालखा की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आवारा जानवरों के झुंड अब राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं, जिन पर लगाम लगाने में स्थानीय नागरिक निकाय विफल साबित हो रहा है।
दिनदहाड़े कॉलोनियों में बच्चों और राहगीरों को बनाया निशाना
बुधवार को दिन के समय हुए इन क्रूर हमलों की शुरुआत लाइनपार शिव कॉलोनी से हुई, जहां ईश्वर सिंह की चार वर्षीय पोती निशु अपने घर के दरवाजे के बाहर अन्य हमउम्र बच्चों के साथ खेल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक खूंखार आवारा कुत्ते ने अचानक बिना किसी उकसावे के बच्ची पर धावा बोल दिया और उसके कोमल चेहरे को अपने नुकीले दांतों से बुरी तरह लहूलुहान कर दिया। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर जब तक आसपास के लोग मौके पर दौड़े, तब तक कुत्ता उसे काफी जख्मी कर चुका था। आनन-फानन में लहूलुहान अवस्था में निशु को समालखा के सामान्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चेहरे के गहरे घावों और नाजुक स्थिति को भांपते हुए चिकित्सकों ने उसे तुरंत खानपुर पीजीआई रेफर कर दिया।
इसी प्रकार, समाज सेवा समिति रोड के रहने वाले राकेश सिंह का आठ वर्षीय बेटा सुशांत जब अपनी दैनिक जरूरत का सामान खरीदकर पैदल घर की ओर लौट रहा था, तब रास्ते में उसी या दूसरे आवारा कुत्ते ने उसकी टांग को अपना निशाना बनाया। बच्चे के पैर पर गहरे दांत गड़ाने से वह सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे भी परिजनों द्वारा तुरंत अस्पताल लाया गया, जहां से प्राथमिक पट्टी के बाद खानपुर के लिए रवाना किया गया। इन दोनों वारदातों के अलावा, लाइनपार शिव कॉलोनी की रहने वाली बुजुर्ग महिला सावित्री तथा मॉडल टाउन क्षेत्र के एक अन्य युवक को भी इसी उग्र कुत्ते ने टांगों पर गंभीर रूप से काटकर घायल कर दिया। इन सभी पीड़ितों को भी सामान्य चिकित्सालय में उपचार मुहैया कराया गया।
| घायल का नाम | आयु/विवरण | प्रभावित क्षेत्र | वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति व अस्पताल |
|---|---|---|---|
| निशु | 4 वर्ष (बच्ची) | लाइनपार शिव कॉलोनी | चेहरे पर गंभीर घाव, खानपुर पीजीआई रेफर |
| सुशांत | 8 वर्ष (बालक) | समाज सेवा समिति रोड | टांग पर गहरे जख्म, खानपुर पीजीआई रेफर |
| सावित्री | बुजुर्ग महिला | लाइनपार शिव कॉलोनी | टांग पर काटा, खानपुर पीजीआई रेफर |
| अज्ञात युवक | युवक | मॉडल टाउन | सामान्य अस्पताल में उपचारधीन |
नगर परिषद के दावों की खुली पोल, आंकड़े कर रहे हैं भयावह स्थिति बयां
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद समालखा के स्थानीय निवासियों में नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखने को मिल रहा है। नागरिकों का आरोप है कि कागजों में भले ही आवारा पशुओं की नसबंदी और नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, परंतु धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। लगभग एक वर्ष पूर्व नगर निकाय द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान का ढिंढोरा पीटा गया था, जिसके तहत आपरेशन के बाद उन्हें वापस उन्हीं क्षेत्रों में छोड़ दिया गया था। जनता का सवाल है कि यदि वह अभियान सफल था, तो आज भी मासूमों के चेहरे और शरीर इन खूंखार जानवरों के दांतों से क्यों छलनी हो रहे हैं?
समालखा सामान्य अस्पताल के आधिकारिक आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं कि स्थिति कितनी भयावह रूप ले चुकी है। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, बीते माह अगस्त के दौरान शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से लगभग 210 लोग आवारा कुत्तों का शिकार होकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे थे। इसके अगले ही माह यानी सितंबर में यह संख्या बढ़कर सीधे 248 तक पहुंच गई। केवल एक महीने के भीतर 38 मामलों की यह बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रशासन की नीतियां और योजनाएं कागजी खानापूर्ति से अधिक कुछ नहीं हैं। पीड़ित परिवारों और शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना किसी और देरी के इन आक्रामक कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित बस्तियों से दूर शेल्टर होम में भेजा जाए।
"नगर परिषद और प्रशासन को जनता के टैक्स के पैसों से केवल विज्ञापनों पर खर्च करने के बजाय धरातल पर उतरकर इन आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान खोजना चाहिए। आज हमारी पोती पर हमला हुआ है, कल किसी और के घर का चिराग बुझ सकता है। प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी?" - ईश्वर सिंह, पीड़ित बच्ची के दादा एवं स्थानीय निवासी
प्रशासनिक निष्क्रियता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर नागरिकों की चेतावनी
लगातार बढ़ रही इन दुर्घटनाओं के बाद अब समालखा और आसपास के इलाकों के लोगों ने एकजुट होकर प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। स्थानीय आरडब्ल्यूए और मौजिज व्यक्तियों का कहना है कि यदि आगामी कुछ दिनों में नगर परिषद की ओर से कोई ठोस और दृश्यमान कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। गलियों में बुजुर्गों का टहलना और बच्चों का साइकिल चलाना दूभर हो गया है, जिससे सामाजिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
चिकित्सकीय विशेषज्ञों का मानना है कि रेबीज संक्रमण के खतरे को देखते हुए डॉग बाइट के मामलों में एक मिनट की भी देरी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और नगर निकाय के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है ताकि घायल व्यक्तियों को तुरंत सही इलाज मिलने के साथ-साथ आक्रामक कुत्तों को पकड़ा जा सके। पानीपत लाइव की टीम इस गंभीर जनसमस्या पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और प्रशासन की हर अगली कार्रवाई की पल-पल की अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाती रहेगी।


