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पानीपत में औद्योगिक विकास पर ब्रेक, हर साल डाई हाउसों को लग रहा बड़ा झटका

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पानीपत में औद्योगिक विकास पर ब्रेक, हर साल डाई हाउसों को लग रहा बड़ा झटका

पानीपत में औद्योगिक विकास पर ब्रेक लगता जा रहा है। जमीनों के लगातार बढ़ते दाम और नए औद्योगिक सेक्टर विकसित नहीं होने के कारण नए उद्योग नहीं लग रहे हैं। सेक्टरों से बाहरी कालोनी में यदि कोई उद्योग लगाया जाता है तो नगर योजनाकार की टीम उसे तोड़ने पहुंच जाती है। निवेश नहीं आने से औद्योगिक प्रगति को जहां धक्का लग रहा है, वहीं एक ठहराव की स्थिति बन गई है।

Panipat Business: पानीपत में औद्योगिक विकास पर ब्रेक, हर साल डाई हाउसों को लग रहा बड़ा झटका

पानीपत के उद्यमियों को अधिक निर्यात करने के अवसर मिले हैं, लेकिन जमीन महंगी होने के कारण वे इस अवसर को भुना नहीं पा रहे हैं। टेक्सटाइल पार्क का मामला भी खटाई में पड़ गया है। पानीपत के लिए टेक्सटाइल पार्क की स्वीकृति भी नहीं मिल पाई है। केंद्रीय बजट में टेक्सटाइल को प्रोत्साहन देने के लिए सात इंटीग्रेटिड टेक्सटाइल पार्कों की घोषणा की गई थी। पानीपत के उद्यमियों को उम्मीद जगी थी कि यहां के लिए टेक्सटाइल पार्क मिलेगा, लेकिन उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए।

सात-आठ डाई हाउस बंद हो रहे हर वर्ष

शहर में पिछले चार पांच साल में एक भी नया डाई हाउस नहीं लग पाया। सात-आठ डाई हाउस हर वर्ष बंद हो रहे हैं। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा का कहना है कि सेक्टरों में जमीन का भाव 50 हजार से अधिक चल रहा है। इतनी महंगी जमीन में नया प्लांट नहीं लग रहा है। पुराने यूनिट भी बंद होते जा रहे हैं। पिछले 20 वर्षों से कोई भी औद्योगिक सेक्टर विकसित नहीं किया गया।

जिला योजनाकार की तलवार लटकी

औद्योगिक सेक्टरों से बाहर लगे उद्योगों को नियमित नहीं किया गया है। अवैध कालोनी के नाम पर इन उद्योगों पर टाउन प्लानिंग विभाग की तलवार लटकी रहती है। हर महीने किसी न किसी उद्योग को तोड़ दिया जाता है। अवैध वसूली का दबाव बना रहता है।

एनसीआर का दबाव

पानीपत एनसीआर में शामिल है। एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अधिक दबाव रहता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी अक्सर यहां के उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करता रहता है। जिस कारण उद्योगों को काम करने का वातावरण नहीं मिल रहा।

एचएसआइआइडीसी के रेट नहीं घटे

रिफाइनरी रोड पर एचएसआइआइडीसी ने 10 साल पहले औद्योगिक सेक्टर विकसित किया था, लेकिन वहां भी 9000 रुपये गज का भाव है। प्लाट का भाव अधिक होने के कारण उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। हालांकि बिरला कंपनी द्वारा वहां पेंट बनाने का नया उद्योगों लगाने का एमओयू साइन हुआ है। इस क्षेत्र में 8800 रुपये का भाव निर्धारित है।

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