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पानीपत

पानीपत की हाउस बैठक में दलालों के रेट खुले, मेयर से भिड़ गईं पार्षद

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पानीपत की हाउस बैठक में दलालों के रेट खुले, मेयर से भिड़ गईं पार्षद

 

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नगर निगम के सदन की बैठक हंगामेदार रही। बैठक में पार्षद अंजलि शर्मा और मेयर अवनीत कौर में जुबानी भिड़ंत हो गई। मेयर ने पार्षद को शटअप तक बोल दिया। वहीं, निगम में दलाली का मुद्दा जमकर गरमाया। दलाली यानी कमीशन के रेट तक खुल गए।

कार्यालय के बाहर दलालों के सक्रिय होने की पोल खुली। इस पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। सफाई देते हुए कहा कि उनके संज्ञान में नहीं है। ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच कराएंगे। लगभग 30-35 मिनट तक पार्षदों ने इस पर खूब बवाल काटा। दलाली करने वालों पर एफआइआर दर्ज कराने की मांग उठाई। साढ़े पांच घंटे तक बैठक चली। चार पार्षद सदन की बैठक से अनुपस्थित रहे।

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पानीपत की हाउस बैठक में दलालों के रेट खुले, मेयर से भिड़ गईं पार्षद

निगम कमिश्नर सुशील कुमार ने 38 दिन बाद दूसरी बैठक बुलाई। करीब 3.35 बजे विधायक प्रमोद विज सहित आठ-नौ पार्षदों के आने के बाद कोरम पूरा हो गया। सबसे पहले कोरोना संक्रमण से मरने वाले 100 लोगों को दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रॉपर्टी आइडी व हाउस टैक्स के मुद्दे पर सदन में बवाल मचा। वार्ड नंबर 21 के पार्षद के संजीव दहिया ने पालिका बाजार, हाउस टैक्स ब्रांच का मामला उठाया। लोग प्रॉपर्टी आइडी चेक कराने जाते हैं तो परेशानी होती है। 20 स्टाफ में से दोपहर में कोई नहीं होता है। वार्ड नंबर 25 के पार्षद दुष्यंत भट्ट ने समर्थन करते हुए कहा कि प्रॉपर्टी आइडी के बिना प्रमाणपत्र जारी नहीं हो रहा है। दलाल इस काम को करवा कर पैसे लूट रहे हैं। अफसरों की जेब भी भर रहे हैं। वार्ड नंबर पांच के पार्षद अनिल बजाज ने भाई की प्रापर्टी आइडी एक माह से न बनने के बारे में शिकायत की।

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पार्षदों ने ये बताए रेट

पार्षदों ने बताया कि 1500 रुपये की फाइल तैयार होती है। 2000 रुपये कमेटी की फीस और 2500 रुपये अलग-अलग रिश्वत के होते हैं। ज्वाइंट कमिश्नर के पास 3000 रुपये जाते हैं। एक हजार रुपये दलाल की कमाई होती है। पार्षद के हस्ताक्षर के नाम पर भी 500 रुपये लेने की बात सामने आ रही है। निगम की कार्यप्रणाली पर यह सवालिया निशान है। सदन में मौजूद पार्षदों ने इस पर शेम..शेम कहा।

कहना आसान, साबित करना कठिन

दलाली की पोल खोल होने के बाद संयुक्त आयुक्त अनुपमा मलिक ने सफाई देते हुए कहा कि आरोप किसी पर लगाए जा सकते हैं। कहना आसान होता है, साबित करना मुश्किल है। 20 अक्टूबर तक कोई फाइल पेंङ्क्षडग नहीं है। कार्यालय के आसपास दलाल ऑपरेट हो रहे हैं तो इसकी जांच करवाई जाएगी। यह बात सुनने के बाद वार्ड नंबर 20 के पार्षद लोकेश नांगरु और वार्ड 25 के दुष्यंत भट्ट ने कहा कि 10-12 दलाल यहीं नजर आ रहे हैं।

परेशानी क्यों हो रही है

नगरपालिका में पहले 31 वार्ड थे। वो बाद में 24 हो गए। नगर निगम की नई वार्डबंदी में 26 वार्ड बनाए गए। नगर निगम के रिकार्ड में 24 वार्ड ही काम कर रहा। दो वार्ड के एरिया को लेकर लोगों को परेशानी हो रही है। अपनी प्रापर्टी आइडी कहां बनाएं। निगम में अफसरों ने दो साल में इसका समाधान नहीं ढूंढ़ा।

 

 

सदन की मैं चेयरपर्सन

वार्ड नंबर तीन की पार्षद अंजलि शर्मा जब बोलने के लिए खड़ी हुईं तो उन्होंने मेयर अवनीत सहित निगम आयुक्त सुशील कुमार व मुख्य अभियंता महीपाल को एक-एक गुलाब का फूल भेंट किया। निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि तालियां के बदले यहां हाय-हाय होनी चाहिए। बस इस बात पर मेयर ने गुस्से में कह दिया शटअप।  सदन की मैं चेयरपर्सन हूं। आपको इस तरह से बोलने का हक नहीं है। वार्ड की समस्या सदन में चर्चा करें। पार्षद बीचबचाव करने आ गए। अंजलि को किसी तरह मनाया। अंजलि ने सदन में सॉरी फील किया। बाद में फोन पर दैनिक जागरण को बताया कि शटअप शब्द कह कर मेयर ने कुर्सी का गलत फायदा उठाया।

 

सीएम के बारे में गलत नहीं बोल सकते

वार्ड नंबर-5 के पार्षद अनिल बजाज ने सफाई व्यवस्था की पोल खोलते हुए कहा कि उनके पास पांच कर्मचारी हैं। इससे वार्ड का काम नहीं होता है। गंदगी हटाने के लिए लोग उन्हें तंग करते हैं। उनके वार्ड में 20 कर्मचारी दिए जाएं। निगम आयुक्त ने उनके इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए सैनेटरी आफिसर सुधीर को मंच के पास बुलाया। सुधीर ने पार्षदों से कहा कि 2500 कर्मचारी शहर के लिए चाहिए। सीएम से जाकर करवा लाओ। बस इस बात पर पार्षद गुस्सा गए। सैनेटरी इंस्पेक्टर को चेतावनी देते हुए कहा कि बोलने का लहजा सुधारें। ऐसा हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम अभी हड़ताल पर बैठ जाएंगे। बमुश्किल मामला शांत कराया गया। मालूम हो कि निगम आयुक्त ने सुधीर को एक साल का सेवा विस्तार दिलवाया है। पार्षद उनकी कार्यप्रणाली से नाखुश हैं।

इन विभागों के अधिकारी नहीं आए

बैठक में वन विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और एलएंडटी से कोई नहीं आए। मेयर अवनीत कौर ने आयुक्त से कहा कि इन अधिकारियों से जवाब तलबी की जाए। सात सितंबर को हुई बैठक में भी कुछ अधिकारी नहीं आए थे। बिजली बोर्ड से एक्सईएन के बदले एसडीओ को भेजा गया था। उन्हें समस्याओं के बारे में उतनी जानकारी नहीं थी।

 

 

Source : Jagran

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