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पानीपत

ठेकेदार ने पेमेंट नहीं मिलने पर रोका स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत का सामान

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ठेकेदार ने पेमेंट नहीं मिलने पर रोका स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत का सामान

स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के नाम पर प्रति माह 22 लाख रुपए तक खर्च करने के बाद भी शहर अंधेरे में हैं। इसमें 5 लाख रुपए प्रति माह वेतन व करीब 17 लाख रुपए सामान खर्च बताया जा रहा है। इतना पैसा खर्च कराने के बाद भी खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्म्त में प्रयोग होने वाला सामान नगर निगम के पास नहीं है। सामान उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार ने पेमेंट नहीं मिलने के कारण स्टॉक रोक दिया है।

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शहर में 15,059 एलईडी व साेडियम स्ट्रीट लाइट लगी हैं। इनमें माॅडल टाउन समेत अन्य शहरी क्षेत्र में लगी 8,000 स्ट्रीट लाइटाें में 6000 से ज्यादा खराब पड़ी हैं। वहीं सेक्टर-6, 11/12, 13/17, 25 पार्ट वन व टू, 29 पार्ट वन व टू में लगी 7059 में 5000 से ज्यादा खराब पड़ी हैं। शहर की स्ट्रीट व टावर लाइटाें की मरम्मत के लिए नगर निगम ने खुद ही अपनी टीम बनाई। इसमें 2 जेई व 2 सुपरवाइजर के अलावा 42 कर्मचारी भर्ती किए गए हैं। यह टीम 6 माह काम करेगी। इसके लिए निगम 49.88 लाख रुपए वहन करेगा। टीम में जेई इलेक्ट्रिकल व जेई सिविल, 2 सुपरवाइजर इलेक्ट्रिकल, 21 इलेक्ट्रिशियन 21 हेल्पर भर्ती किए गए हैं।

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यह जरूरी सामान जो निगम के पास नहीं है

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लाइटों की मरम्मत में नगर निगम काे मुख्य रूप से केबल, चोक, बल्ब व नट-बोल्ट समेत समेत अन्य सामान चाहिए है। इनके अलावा टावर लाइटों की मरम्मत के लिए एल्युमिनियम वाली बड़ी सीढ़ी की भी जरूरत है। नगर निगम एक ही पुरानी सीढ़ी ठीक कराई है। जबकि मुख्य रूप से 5 एल्युमिनियम सीढ़ियों की जरूरत है।

 

वार्ड-3 में 400 खराब लाइटों के लिए मिली 2 चॉक

वार्ड-3 की पार्षद अंजलि शर्मा का कहना है कि मेरे वार्ड में लगी 500 स्ट्रीट लाइटों में से 400 से ज्यादा खराब पड़ी हैं। इनकी मरम्मत के लिए रोज फोन कर रहे रह हैं। साेमवार को मात्र 2 चॉक अधिकारियों ने भिजवाई। इस तरह ज्यादातर एलईडी खराब हैं। ठेकेदार जो थोड़ा बहुत सामान देते हैं, वह पुरानी सोडियम या सीएफएल लाइटों का ही देते हैं।

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रोज खाली बैठकर जा रहे कर्मचारी : छाबड़ा

वार्ड-15 की पार्षद सुमन छाबड़ा का कहना है कि मेरे वार्ड में लगी 32 वाॅट एलईडी, 32 वॉट वाली टावर लाइटों के सामान की जरूरत है। ठेकेदार ने यह सामान एक बार भी नहीं भेजा। पूरे शहर के लिए प्रतिदिन 20 चॉक ही दी जा रही है। कई दिन से ठेकेदार यह सामान भी नहीं दे रहा है। रोजाना कर्मचारी खाली बैठकर ही समय बिताकर जा रहे हैं।

 

सामान व कर्मचारी पर्याप्त, व्यवस्था सुधारने में लग रहा समय : कमिश्नर

शहर की व्यवस्था लंबे समय से बिगड़ी पड़ी थी। इसे सुधारने में समय लग रहा है। सामान की कोई कमी नहीं है। जहां जितनी जरूरत है, वहां उतना ही भेजा जा रहा है। पहले मुख्य सड़कों व चौक चौराहों में खराब लाइट ठीक की जा रही है। – सुशील कुमार, कमिश्नर, नगर निगम, पानीपत।

 

पेमेंट नहीं मिलने के कारण हो रही है परेशानी : अशोक बख्शी

नगर निगम से पेमेंट नहीं मिलने के कारण सामान खरीदने में परेशानी हो रही है। हम लोगों को भी कंपनी में पेमेंट करनी होती है। तभी सामान मिल पाता है। जैसे तैसे जितना सम्मान हो सकता है उतना उपलब्ध करवा रहे हैं।नगर निगम अधिकारियों से आग्रह है कि समय पर पेमेंट करवा दे, तो लाइटों की मरम्मत में प्रयोग होने से वाले सामान को खरीदने में हमें भी कोई समस्या नहीं होगी। समान होगा तो हम भी समय पर उपलब्ध करवा पाएंगे। – अशोक बख्शी, ठेकेदार।

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