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Corona Medicines: घबराने की जरूरत नहीं, अब मार्केट में पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही हैं दवाएं

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Corona Medicines: घबराने की जरूरत नहीं, अब मार्केट में पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही हैं दवाएं

 

 

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हमारे संवाददाता सूरज सिंह का कहना है कि दिल्ली के बाजारों में अब दवा पहुंचनी शुरू हो गई है। इसलिए, अब मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। खासतौर से नॉन कोविड मरीजों के लिए मार्केट में पर्याप्त मात्रा में दवाएं हैं। बस पैनिक में आकर जरूरत से ज्यादा दवा नहीं खरीदेंगे, तो मरीजों को पूरी दवा आसानी से मिल जाएंगी। सरकार, फार्मेसी इंडस्ट्री और केमिस्ट मिलकर दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

आसानी से मिल रही हैं दवाएं

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ऑल इंडिया केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन के प्रेसिडेंट कैलाश गुप्ता ने बताया कि अब मार्केट में सारी दवाइयां आसानी से मिल रही हैं। जो दवा एक रिटेल केमिस्ट दे सकता है, उसके पास सभी मेडिसिन्स हैं। ऑक्सिमीटर, नेबुलाइजर, स्टीमर, सैनिटाइजर, पैरासिटामॉल, विटामिन सी, जिंकोवेट, एजिथ्रोमाइसिन, डॉक्सीसाइक्लिन, इवर्मेकटिन और कफ सीरप की कोई कमी नहीं है। दवाओं की बड़ी इंडस्ट्री बद्दी, ऋषिकेश और रुड़की में हैं। यहां से माल दिल्ली पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। राष्ट्रीय राजधानी नकद सेलिंग का बड़ा पॉइंट है। अब सरकार ने दिल्ली के लिए 20 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच 60 हजार रेमडेसिविर का अलॉटमेंट किया है। ये धीरे-धीरे आ रही हैं।

छोटे हॉस्पिटल की वजह से दिक्कत

कैलाश गुप्ता का कहना है कि एक साथ कोरोना के केस बढ़ने से बड़े अस्पतालों में बेड फुल हो गए हैं। सरकार ने छोटे हॉस्पिटल और नर्सिंग होम में भी कोविड मरीजों के इलाज की परमिशन दी है। दिल्ली के भी अधिकतर मरीजों को गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ जैसे शहरों के छोटे-बड़े अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा है। अब वहां के डॉक्टर्स भी रेमडेसिविर इंजेक्शन और कोविड संबंधी मेडिसिन लिख रहे हैं, जो वहां आसानी से उपलब्ध नहीं होंगे। तीमारदार और परिजनों को इंजेक्शन के लिए गुहार लगानी पड़ रही है। उन्हें भी नहीं मालूम कि दवा मिलेगी कहां? इस वजह से ज्यादा किल्लत महसूस हो रही है। बड़े अस्पताल सीधा कंपनियों से दवा मंगवाते हैं, वहां मेडिसिन की शॉर्टेज कम है।

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28 डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास रेमडेसिविर

28-

दिल्ली में 28 डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन मिल रहा है। यहां सरकार ने ड्रग इंस्पेक्टर बैठा दिए हैं। वहां यह दवा जरूरतमंदों को अलॉट किया जा रहा है। इसके लिए मरीजों की पहचान की जा रही है। कैलाश गुप्ता ने बताया कि अस्पतालों में भी इंजेक्शन जा रहे हैं। कुछ अस्पतालों की ओर से एडवांस पेमेंट नहीं हो रही तो उन्हें माल लेने में दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। रोजाना ड्रग कंट्रोलर तक सारा डाटा पहुंच रहा है।

डॉक्टर जितनी दवा कहे, उतनी ही खरीदें

दिल्ली ड्रग्स डीलर्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी आशीष ग्रोवर का कहना है कि अभी मौसम भी बदल रहा है। सीजनल फ्लू के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। लोग अपने पारिवारिक डॉक्टर से कंसल्ट कर रहे हैं। उन्हें जो दवाएं लिखी जा रही हैं, बहुत से लोग आवश्यकता से अधिक खरीद रहे हैं। जिंकोवेट, मल्टीविटामिन और खांसी का सीरप आदि का स्टॉक कर रहे हैं। अब पीछे से तो सप्लाई चल रही है, लेकिन डिमांड बढ़ने से थोड़ी मुश्किल हो जाती है। एसोसिएशन की ओर से सभी से अनुरोध है कि जितनी दवा डॉक्टर कहे, उतनी ही खरीदें। एक पत्ता दवा की जगह चार खरीद लेंगे, तो तीन जरूरतमंदों को दवा नहीं मिल सकेगी। इसी तरह थर्मामीटर की कमी भी देखने को मिल रही है। पहले किसी कॉलोनी में 10 में से 6-7 घरों में थर्मामीटर होते थे। अब एक घर में 4-5 थर्मामीटर हो गए हैं। हर सदस्य अपना टेंपरेचर अपने थर्मामीटर से चेक कर रहा है। परिवार में एक व्यक्ति बीमार है, तो परिजन पूरी फैमली के लिए दवाएं खरीदकर ले आते हैं। यह ठीक नहीं है।
Source: Navbharat

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