Connect with us

Medical Update

हरियाणा PGI रोहतक बना हॉटस्पॉट, ईलाज़ करने वाले डॉक्टर व अन्य स्टाफ़ कोरोना की चपेट में

Published

on

हरियाणा PGI रोहतक बना हॉटस्पॉट, ईलाज़ करने वाले डॉक्टर व अन्य स्टाफ़ कोरोना की चपेट में

 

प्रदेश के नोडल सेंटर पीजीआई रोहतक में काेरोना के 420 मरीज ढाई महीने के दौरान दाखिल हो चुके हैं। इलाज के दौरान 23 डॉक्टर्स व अन्य स्टाफ कोरोना की चपेट में आ चुका है। 200 क्वारेंटाइन में हैं। आईसीयू और आइसोलेशन वार्ड में पूरा स्टाफ पीपीई किट में रहता है, फिर भी पीजीआई हाॅट स्पॉट बन गया है। यहां कहीं से भी कोरोना का हमला हो सकता है।

पीपीई किट पहन भास्कर रिपोर्टर ने जाने हालात

ऐसे में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर विवेक मिश्र ने पीपीई किट पहनकर पीजीआई की ग्राउंड रिएलिटी चेक की। सामने आया कि अब तक ओपीडी और इमरजेंसी में 18 मरीज संक्रमित मिल चुके हैं। इमरजेंसी में औसतन 600 व ओपीडी में 800 मरीज रोज आ रहे हैं। पता नहीं चल पाता कि कौन संक्रमित है। जब तक रिपोर्ट आती है तब तक ये कई हेल्थ वर्कर्स और सामान को टच कर चुके होते हैं। 6 डॉक्टर व 9 नर्सिंग स्टाफ के संक्रमित होने का यही कारण रहा है। वहीं, आशंका है कि एंबुलेंस चालक, सफाई कर्मी, लैब एसिस्टेंट आदि पीपीई किट उतारते वक्त चपेट में आ गए।

42 डिग्री तापमान में किट के अंदर पसीना पानी की तरह भर जाता है
डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की चुनौतियों को जानने के लिए भास्कर टीम पीजीआई पहुंची। यहां मरीजों के इलाज का जिम्मा संभाल रहीं स्टाफ नर्स शीतल, नर्सिंग सिस्टर सविता विज और मेडिकल अफसर डॉक्टर राहुल ने पहले वह एरिया दिखाया जहां पीपीई किट पहनी जाती है। यहां एक कर्मचारी गाइड करने के लिए रहता है। उसके गाइडेंस में हमने किट पहनी। इतने में सूचना आई कि दो कोरोना मरीजों को लेकर एंबुलेंस ट्राॅमा सेंटर के गेट पर आई है। डॉक्टरों के साथ हम भी गेट पर पहुंचे।

एंबुलेंस से 35 वर्षीय युवक व युवती निकले। पीपीई किट पहने स्टाॅफ ने उनकी गेट पर ही एंट्री की। वहीं, दूसरी टीम ने एंबुलेंस को सैनिटाइज किया। फिर दोनों को ग्राउंड फ्लोर पर बने कोविड वार्ड में ले जाया गया। भास्कर संवाददाता भी रेड लाइन तक उनके पीछे गया। वहां टीम ने बताया कि वार्ड के अंदर 25 मरीज हैं। वहां पहले से तय स्टाफ को ही पीपीई किट पहनकर एंट्री की इजाजत है। हेल्थ टीम ने हमें ऊपर बने आईसीयू के बारे में जानकारी दी। वहां पर 8 कोरोना मरीज दाखिल हैं, जिनकी हालत गंभीर है।

42 डिग्री तापमान में पीपीई किट पहनने के दौरान पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो गया। दम घुटने लगा। पैरों के तलवों में पसीना ऐसे जमा हो गया मानों पानी में चल रहे हों। तब महसूस हुआ कि डॉक्टर जब यह किट 6 से 8 घंटे तक पहने रहते हैं तो उन पर क्या बीतती होगी। जब किट उतारने लगे तो पसीने की वजह से वह शरीर से चिपक गई थी। कोविड कंट्रोलरूम इंचार्ज डॉ वरुण अरोड़ा ने बताया कि किट उतारते वक्त जरा सी चूक से संक्रमण फैल सकता है।

संक्रमण की वजह व बचाव के तरीके
ओपीडी-इमरजेंसी के मरीजों का सर्जरी से पहले टेस्ट होता है, रिपोर्ट बाद में आती है।
ऐसे बचाव: मरीजों को जागरूक किया जा रहा है कि पहले कोरोना टेस्ट करवाएं।
रिपोर्ट आने से पहले मरीज वर्कर्स व कुर्सी  टेबल आदि के संपर्क में आ चुका होता है।
ऐसे कर रहे बचाव: मरीजों-स्टाफ को जागरूक किया जा रहा है कि किसी चीज काे न छुएं।
पीपीई किट उतारते वक्त जरा सी भी चूक से संक्रमण का खतरा बना रहता है।
ऐसे कर रहे बचाव: हेल्थ केयर वर्कर्स को पीपीई किट उतारने व पहनने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
एंबुलेंस में मरीजों को लाने-ले जानेे में स्टाफ के संक्रमित होने का खतरा रहता है।
ऐसे कर रहे बचाव: चालक व स्टाफ को मास्क, ग्लब्ज व पीपीई किट दी जाती है।

Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *