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हॉट स्पाॅट एरिया में कोरोना टेस्टिंग की रफ्तार ढीली; फोन तक अटेंड नहीं करते डॉक्टर तो कहीं जवाब मिला- खुद आकर ले जाओ दवाई

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हॉट स्पाॅट एरिया में कोरोना टेस्टिंग की रफ्तार ढीली; फोन तक अटेंड नहीं करते डॉक्टर तो कहीं जवाब मिला- खुद आकर ले जाओ दवाई

सिरसा जिले में लगातार कोरोना केस बढ़ रहे हैं। इसमें भी डबवाली शहरी व चौटाला ग्रामीण इलाके हॉटस्पॉट बने हुए हैं। इसके बावजूद टेस्टिंग और रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ रहा है। डॉक्टर व स्टाफ फोन तक अटेंड नहीं करते। इसके चलते हरियाणा की बजाय इलाज के लिए निकटवर्ती राजस्थान के अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं। सिरसा में कुल 19647 पॉजिटिव केस है, जिनमें 3855 होम आइसोलेट हैं व डबवाली अर्बन में 1886, जबकि चौटाला ग्रामीण में 1178 पॉजिटिव अब तक हो चुके हैं। करनाल में भी होम आइसोलेट मरीजों को दवा या टेस्ट के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

सिरसा में कुल 19647 पॉजिटिव केस है, जिनमें 3855 होम आइसोलेट हैं व डबवाली अर्बन में 1886, जबकि चौटाला ग्रामीण में 1178 - Dainik Bhaskar

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चौटाला गांव के लोग राजस्थान में करा रहे इलाज

गांव चौटाला निवासी स्वतंत्रता सेनानी परिवार के सदस्य ने बताया कि वह खुद राजस्थान में कार्यरत हैं। अब उनके समेत परिवार कोरोना पॉजिटिव होने के बाद डॉक्टरों ने तो फोन तक अटेंड नहीं किया। गांव गंगा व कालूवाना के बीच ढाणी में रहने वाले युवा पंकज कुमार ने बताया कि 25 अप्रैल को पिता को खांसी-बुखार हुआ। 2 दिन में ठीक हो गया, लेकिन 30 अप्रैल को फिर उल्टियां होने से दिक्कत हुई।

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पता किया तो गांव गंगा, चौटाला व डबवाली अस्पतालों में जांच की सुविधा नहीं होने से संगरिया से उपचार लेकर हनुमानगढ़ में सीटी स्कैन करवाया, जिसमें कोविड का पता चला। 1 मई को बुखार हुआ तो 2 मई को गंगा पीएचसी में पहुंचे, जहां स्टाफ बोले- 2 बजे तक सैंपल होते हैं।

फिर 3 मई को बुखार तेज हो जाने पर करीब 12:30 बजे पीएचसी में पहुंचे तो बोले- आज कोविड-19 चेक करने की स्लाइड खत्म हो चुकी है। फिर 4 मई को चचेरे भाई को बुखार हो गया। दोनों ने गंगा पीएचसी में पहुंच सैंपल दिया और 5 मई को माता को भी बुखार आया। इसके बाद 7 मई को मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन चचेरे भाई की रिपोर्ट का अभी इंतजार है, जबकि उसके पिता को भी बुखार है। सभी लोग ढाणी में होम आइसोलेट हैं।

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खुद स्टोर से ला रहे दवाइयां

करनाल में होम आइसोलेशन में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को स्वास्थ्य विभाग कोई दवाई भी नहीं दे रहा है। मरीजों के परिजनों को खुद मेडिकल स्टोर से दवाई लानी पड़ती है। सेक्टर-4 हाउसिंग बोर्ड में एक 12 साल का किशोर पॉजिटिव आया है। 3 मई को पॉजिटिव आया। 4 मई की शाम को स्वास्थ्य विभाग की नर्स का फोन आया, जब उससे दवाइयों के बारे में पूछा तो नर्स बोली- 15 साल उम्र से नीचे के बच्चे के लिए कोई दवाई नहीं है।

अपने लेवल पर डाॅक्टरों से दवाई लिखवाई। सेक्टर-7 में सबसे ज्यादा पॉजिटिव मरीज हैं। पहले दवाइयों की किट भी दे गए। इसके बाद अब कोई नहीं आ रहा है। पॉजिटिव मरीज ने बताया कि मैंने खुद नागरिक अस्पताल में जाकर अपना टेस्ट करवाया है।

मरीजों के प्रति विभाग गंभीर नहीं

सिरसा के नोहरिया बाजार निवासी हिमांशु ने बताया कि 29 अप्रैल को वह कोरोना पॉजिटिव आया था। तब उसको दवाई दी थी और होम आइसलोट कर दिया गया। इसके बाद न किसी ने कोई फोन किया और न दवाई देने आया। जब उसने दवाई के लिए फोन किए तो जवाब मिला कि खुद आकर ले जाओ। यहां देने कोई नहीं आएगा। होम आइसलोट मरीजों को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है कि सिरसा में करीब 3494 मरीज होम आइसलोट हैं।

इधर, कुरुक्षेत्र की मरीज ओजस्वी चौहान ने कहा कि जांच करने के लिए उनके पास अभी तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई भी कर्मचारी व अधिकारी नहीं आया। फोन पर उनसे कर्मचारियों द्वारा संपर्क जरुर किया जा रहा है। दवा की उन्हें कोई कमी नहीं है। जसप्रीत कौर ने कहा कि घर में उन्हें कोई परेशानी नहीं आ रही। जसप्रीत कौर ने कहा कि हेल्पलाइन नंबर 1095 भी जारी किया है। जिसपर मदद मांग सकते हैं।

SOURCE  : BHASKAR

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