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Coronavirus in UP: ‘एक मिनट में 24 बार से कम सांस खींच और निकाल रहे हैं तो न घबराएं…’, जानिए होम आइसोलेशन से जुड़े सवालों के जवाब

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Coronavirus in UP: ‘एक मिनट में 24 बार से कम सांस खींच और निकाल रहे हैं तो न घबराएं…’, जानिए होम आइसोलेशन से जुड़े सवालों के जवाब

 

बुखार ठीक होने के बाद भी कोई बुजुर्ग पैरासीटामॉल खाए चला जा रहा था तो कोई सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के बाद भी जांच करवाने को तैयार नहीं। किसी को इस बात की चिंता थी कि संक्रमित होने के बाद टीका लगवा सकेंगे या नहीं? किसी ने जांच और इलाज में देरी को लेकर चिंता जताते हुए जल्द स्वस्थ होने के टिप्स पूछे।

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होम आइसोलेशन और कोविड संक्रमण जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए सोमवार को एनबीटी अखबार और लखनऊ सपोर्ट ग्रुप की पहल पर शुरू हुए ‘हम साथ हैं’ अभियान में ऐसे तमाम सवाल आए। होम आइसोलेशन में रहते हुए तमाम मरीजों में लक्षणों को लेकर तमाम शंकाएं थीं जिन्हें अभियान से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दूर किया। पाठकों के कुछ सवाल और डॉक्टरों के जवाब हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं। हो सकता है, आपका सवाल भी इनमें से कोई हो तो उसका समाधान यहीं देखें-

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सवाल- कई बार लगता है कि सांस कम ले पा रहे हैं?
जवाब- कई बार यह मन का भ्रम होता है। इसकी जांच के लिए घड़ी में देखकर अपनी सांसें गिनिए। एक मिनट में अगर 24 बार से कम सांस खींच और निकाल रहे हैं तो मान लीजिए कि आपकी सांसें सामान्य हैं, घबराने की जरूरत नहीं है।

सवाल- ऑक्सिजन लेवल 90 के करीब आ जाता है क्या करें?
जवाब- ऐसा होने पर पेट के बल लेट जाएं। इस स्थिति में पेट नहीं दबना चाहिए। कमर, घुटने के नीचे और छाती पर तकिया रखकर सोएं। ऐसा करने से ऑक्सिजन का स्तर पांच अंक तक बढ़ जाता है।

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सवाल- दिन में कई बार ऑक्सिमीटर पर ऑक्सिजन का स्तर घटता बढ़ता रहता है?
जवाब- ऑक्सिमीटर या जांच के दूसरे उपकरणों का बार-बार इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जब दिक्कत महसूस हो तब नापना चाहिए। बार-बार नापने पर घबराहट बढ़ती है।

सवाल- मेरे पिता की उम्र 80 साल है। उन्हें बुखार उतर गया है, लेकिन वो अब भी पैरासिटामॉल खा रहे हैं?
जवाब- महज दोबारा बुखार चढ़ने के डर से बुखार की दवा देना ठीक नहीं है। महज सोशल मीडिया के सुझावों पर इलाज करना और एलोपैथी दवाएं देना नुकसानदायक भी हो सकता है। दवा मरीज की उम्र, वजन और सक्रियता के मुताबिक तय होती है। बुखार नहीं है तो दवा मत दीजिए।

सवाल- मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, कोई लक्षण नहीं हैं, क्या मुझे भर्ती हो जाना चाहिए?
जवाब-अगर कोई लक्षण नहीं है तो घर से बेहतर अस्पताल कोई नहीं है। घर के हवादार कमरे में अपने आप को आइसोलेट कर लीजिए और डॉक्टरों की बताई दवाओं के साथ हेल्दी डाइट लीजिए, ताकि ठीक होने के बाद कमजोरी न हो।

सवाल- कोविड से ठीक हो चुका हूं, लेकिन कमजोरी बहुत है?
जवाब-कोविड के बाद मरीजों में कमजोरी सामान्य है। यह स्थिति दो से तीन सप्ताह तक रहेगी। मल्टीविटमिन लें, पर्याप्त पानी पिएं और प्रोटीन युक्त हेल्दी डाइट लें, जल्द रिकवरी होगी।

सवाल- कोविड निगेटिव हो चुका हूं, टीकाकरण करवा सकता हूं?
जवाब- निगेटिव होने के एक महीने बाद टीकाकरण करवा सकते हैं।

सवाल- कोविड संक्रमित हुए 12 दिन बीत चुके हैं, क्या दोबारा जांच करवा लें?
जवाब- संक्रमित होने के 12 दिन बाद कोई दिक्कत नहीं है तो आप खुद को निगेटिव मान सकते हैं, लेकिन बेहतर होगा कि 20 दिन बाद ही दोबारा जांच करवाएं, तब तक आइसोलेट रहें।

सवाल- आठ-आठ घंटे पर पैरासिटामॉल लेते हैं, लेकिन बीच में फिर बुखार आ जाता है?
जवाब- बुखार 100 फारेनहाइट से ज्यादा नहीं होने देना है। चाहे तो इसके लिए चार-चार घंटे में पैरासिटामॉल देना पड़े। इसके साथ गीले कपड़े से माथा समेत पूरे शरीर को पोंछ भी सकते हैं, ताकि तापमान नियंत्रित रखा जा सके।

सवाल- मुझे जुकाम और गले में खराश है, लेकिन यह मुझे अक्सर हो जाता है। क्या करें?
जवाब-बिना देर किए आप आरटीपीसीआर करवाएं। यह लक्षण कोविड के हैं। समय से रिपोर्ट आ जाएगी तो इलाज आसान होगा।

सवाल- मुझे दस दिन से सर्दी, जुकाम, बुखार और कमजोरी है, क्या यह कोविड हो सकता है?
जवाब-दस दिन से बुखार है तो आपको आरटीपीसीआर जांच करवा लेनी चाहिए। आप ऑक्सिमीटर से अपना ऑक्सिजन स्तर नापते रहें। देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।

सवाल- पिताजी को बुखार है और ऑक्सिजन का स्तर 90 से नीचे हैं, क्या करें?
जवाब-इन्हें तुरंत किसी एल1 श्रेणी के अस्पताल में भर्ती करवाएं। बेड नहीं मिलता तो घर में ही ऑक्सिजन सिलिंडर का इंतजाम कर लें। बेड खाली होने का इंतजार करते हुए प्रयास जारी रखें। अब तक कई अस्पतालों में बिना सीएमओ की अनुमति के सीधे भर्ती हो रही है, लिहाजा ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।

सवाल- संक्रमण के पांच दिन हो गए हैं, ऐसे में दिक्कत बढ़ने के लक्षण क्या हैं?
जवाब- आप हार्टबीट के साथ ही ऑक्सिजन का स्तर भी चेक करिए। अगर ऑक्सिजन का स्तर 90 से 95 के बीच स्थिर है, लेकिन उसके बाद भी खांसी, सीने में कफ जमा होने जैसा महसूस होना, बेचैनी और हार्टबीट लगातार बढ़ी हुई है तो एहतियात जरूरी है। डॉक्टर के परामर्श से सीटी चेस्ट समेत कुछ जांचें करवा लें, ताकि समय रहते कुछ नई दवाएं शुरू कर स्थितियों को नियंत्रित किया जा सके।

सवाल- मैंने लक्षण दिखने के चार दिन बाद जांच करवाई थी, छठे दिन रिपोर्ट आई, कहीं इस देरी की वजह से तो दिक्कत नहीं बढ़ गई?
जवाब-हमें वायरस से दो कदम आगे रहना है। खांसी, बुखार, बदन दर्द जैसे शुरुआती लक्षण दिखते ही अगर इलाज शुरू हो जाए तो बीमारी को पांच से सात दिन के भीतर नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि कई लोग लक्षण दिखने के बाद भी इसे छिपाए रहते हैं और संक्रमण बढ़ने पर जांच करवाते हैं, लेकिन कई बार यह देरी उन पर भारी पड़ जाती है।

सवाल- वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के बाद संक्रमित हुए थे अब दूसरी डोज कब लगवा सकते हैं?
जवाब- ऐसी स्थिति में दूसरी डोज निगेटिव होने के छह सप्ताह बाद लगवा सकते हैं।
सवाल- हल्का बुखार, गले में खराश और थकान जैसी महसूस हो रही है, क्या करें?
जवाब-इस समय ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से पूछकर कोविड प्रॉटोकॉल की दवा शुरू कर दें। साथ ही तुरंत ही आरटीपीसीआर की जांच करवाएं, ताकि रिपोर्ट आने में देरी के चलते इलाज में देरी न हो।

सवाल- संक्रमित होने के बाद हमेशा डर बना रहता है कि ऑक्सिजन कम न हो जाए‌?
जवाब-घबराहट और चिंता से इम्युनिटी कम होती है। सुबह-शाम घर की खिड़की खोलकर प्राणायाम करिए। लंबी-लंबी सांसें लीजिए। वॉट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक बंद कर दीजिए। कमरे में अखबार और अच्छी किताबें रखिए ताकि जब मन करे उन्हें पढ़ सकें। दोस्तों, परिचितों और परिवारीजनों से बात करते रहिए।

तीन पालियों में चल रही हेल्पलाइन
एनबीटी और लखनऊ सपोर्ट ग्रुप की हेल्पलाइन तीन पालियों में चल रही है। लखनऊ सपोर्ट ग्रुप की मनीषा भाटिया, ममता, तमोषा मुखर्जी और शुभकरन सिंह ने सुबह सात से नौ बजे, सुबह 11 से दोपहर एक बजे और दोपहर तीन से पांच बजे तक मरीज और डॉक्टरों के बीच समन्वय बनाने का काम किया।
मंगलवार को भी कोई भी जरूरतमंद मोबाइल नंबर 7307351811, 7307334898 और लैंडलाइन नंबर 05224113494 पर फोन कर परामर्श ले सकता है।

इन विशेषज्ञों ने दिए परामर्श

डॉ रमा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आईएमए

प्रो. आरबी सिंह, प्रोफेसर ऑफ जनरल सर्जरी एंड मेडिकल सुपरिटेंडेंट, हिंद मेडिकल कॉलेज
डॉ. दर्शन बजाज, असिस्टेंट प्रफेसर, सांस रोग विभाग,केजीएमयू

डॉ. अनूप अग्रवाल, डायरेक्टर, सुश्रुत हॉस्पिटल

डॉ. प्रांजल अग्रवाल, निदेशक, निर्वाण हॉस्पिटल

डॉ. पीके गुप्ता,डायरेक्टर, पीके पैथोलॉजी

डॉ. राजेश प्रजापति, एरा मेडिकल सेंटर

डॉ. शाश्वत विद्याधर, डायरेक्टर, सेंट मेरी हॉस्पिटल

 

 

 

Source : NBT

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