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पेटियाें में बंद स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए पार्षद एकजुट, बाेले- अब धरना ही एकमात्र विकल्प

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पेटियाें में बंद स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए पार्षद एकजुट, बाेले- अब धरना ही एकमात्र विकल्प

 

कार्यालयाें में पेटियों में सील बंद पड़ी नई स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए नगर निगम अधिकारी व ठेकेदार गंभीर नहीं है। पार्षदों का कहना है कि अब धरने के सिवाय काेई विकल्प उनके पास नहीं बचा है। शहर की गलियाें, सड़काेें व चाैक चौराहे पर जाे लाइट पहले से लगी हैंं, वे खराब हैं। ऐसे में अंधेरे में व बरसात के दाैरान सुनसान राहाें से राहगीराें का सफर बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। पार्षद लाेगाें की मागाें काे लेकर परेशान हैं, क्योंकि अधिकारी उनकी मांगों काे लेकर काेई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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भेदभाव का जड़ा आराेप

पार्षद जिला प्रशासनिक व नगर निगम अधिकारियों और विधायकों पर भेदभाव का आराेप लगा रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि विधायकों व नेताओं की नजर मेें केवल माॅडल टाउन व सेक्टराें के आदमी ही शहरवासी हैं। काॅलाेनियाें के लाेगाें काे ये शहरवासी नहीं मानते। इसलिए काॅलाेनियाें में मूलभूत सुविधाओं का बहुत ज्यादा अभाव है। खासकर स्ट्रीट लाइटें ताे काॅलाेनियाें में जलती ही नहीं हैं। पार्षदाें के कार्यालयों में नई स्ट्रीट लाइटें पेटियों में बंद पड़ी हैं। पार्षद अंजलि शर्मा, पार्षद सुमन छाबड़ा व पार्षद शकुंतला गर्ग का कहना है कि जब ये लाइट शहर में लगानी नहीं थी ताे पार्षदों काे क्याें दी। स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए पार्षद एकजुट हाे रहे हैं, क्योंकि इन लाइटों काे लगवाने के लिए अधिकारी व ठेकेदार पार्षदों से काेई बातचीत तक नहीं कर रहे हैं।

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शहर में लगानी हैं 9800 नई स्ट्रीट लाइट

शहर की गलियाें, सड़काें व चाैक-चाैराहाें काे राेशन करने के लिए नगर निगम ने करीब सवा कराेड़ रुपए खर्च करके करीब एक साल पहले 9800 स्ट्रीट लाइट खरीदी थी। इन्हें लगाने के लिए अलग से करीब सवा 2 कराेड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था। ठेकेदार ने फरवरी से लेकर अब तक करीब 2 बार में करीब 2700 स्ट्रीट लाइट ही लगाई हैं। बाकि आज तक ही नगर निगम व पार्षदों के कार्यालयों में पेटियों में बंद पड़ी हैं। इन्हें लगवाया नहीं जा रहा है।

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