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कोरोना से हो गई मौत और कोई वसीयत भी नहीं, ऐसी सूरत में कैसे करें बैंक खातों से लेकर प्रॉपर्टी तक पर क्लेम!

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हाइलाइट्स:

  • कोरोना काल में बहुत सारे ऐसे लोगों की मौत हो गई है जो अपने परिवार में कमाने वाले अकेले शख्स थे।
  • ऐसे में उनकी मौत के बाद परिवार को उनकी सेविंग्स और इंश्योरेंस के पैसों की बहुत जरूरत है।
  • अधिकतर मामलों में लोगों ने अपनी वसीयत तैयार नहीं की है तो ऐसे में कैसे हासिल करें बैंक खातों से लेकर घर तक का मालिकाना हक?

 

How To Claim Nomination Without Will: कोरोना वायरस की वजह से भारत में 4 लाख से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें कई ऐसे भी लोग थे जो परिवार के भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार थे। उनकी अचानक मौत के बाद पूरे परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। उस परिवार को और भी ज्यादा दिक्कत हो रही है, जिसमें कमाने वाले शख्स की मौत हो गई है, लेकिन ना ही कोई नॉमिनी बनाया गया है ना ही कोई वसीयत है। सवाल ये है कि ऐसे में बैंक खाते में जमा पैसे, बीमा की रकम, जमीन-जायदाद, मकान आदि पर हक कैसे हासिल करें?

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बैंक खाते में जमा पैसों पर कैसे करें दावा?

किसी बैंक खाते में जमा पैसों पर दावा करने के लिए हम भारत के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का उदाहरण ले लेते हैं। अगर किसी शख्स की अचानक मौत हो जाती है और मरने से पहले उस शख्स ने ना तो कोई वसीयत बनाई है ना ही किसी को अकाउंट का नॉमिनी बनाया है तो क्लेम के दो केस होंगे। पहला 5 लाख रुपये से कम की रकम होने पर और दूसरा 5 लाख रुपये से अधिक की रकम होने पर।

अगर रकम 5 लाख रुपये से कम है तो आपको डेथ सर्टिफिकेट, कानूनी उत्तराधिकारी की केवाईसी डिटेल्स, क्लेम करने वाले की अकाउंट डिटेल्स, क्लेम करने वाले शख्स का हस्ताक्षर किया हुआ क्लेम फॉर्म, इस क्लेम फॉर्म में कानूनी उत्ताधिकारियों का डिक्लेरेशन, क्षतिपूर्ति का स्टांप लगा हुआ लेटर, अगर जरूरत हो तो डिस्क्लेमर का लेटर आदि की जरूरत होगी। कानूनी उत्तराधिकारियों के डिक्लेरेशन में किसी ऐसे शख्स के हस्ताक्षर होने जरूरी हैं

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Why is nomination of bank account important

जो परिवार को बहुत अच्छे से जानता हो, लेकिन जुड़ा हुआ ना हो और बैंक भी उस पर विश्वास करे। इसमें आप किसी सरकारी अधिकारी से भी हस्ताक्षर करवा सकते हैं, जिसे बैंक की तरफ से वेरिफाई किया जा सके।वहीं अगर रकम 5 लाख रुपये से अधिक है तो सारे दस्तावेज तो पहले जैसे ही चाहिए होंगे,

लेकिन कानूनी उत्तराधिकारियों के डिक्लेरेशन के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट या नोटरी पब्लिक से बने एफिडेविट की जरूरत होगी। साथ ही परिवार को जानने वाले शख्स या किसी सरकारी अधिकारी से हस्ताक्षर करवाना होगा। साथ ही क्षतिपूर्ति के लेटर के साथ जमानत भी देनी होगी कि सभी उत्तराधिकारियों की तरफ से वही अकाउंट का क्लेम करने के लिए सबसे सही शख्स है।

पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग्स स्कीम जैसे पीपीएफ, एनएससी आदि के पैसों का कैसे करें क्लेम?

अगर डिपॉजिटर ने कोई नॉमिनेशन नहीं किया है ना ही क्लेम करने वाले शख्स के पास उत्तराधिकारी होने का कोई कानूनी दस्तावेज है तो सबसे पहले रकम को देखा जाएगा। अगर रकम 5 लाख रुपये से अधिक की है तो कोर्ट से उत्तराधिकारी का सर्टिफिकेट लाने के बाद ही क्लेम हो सकता है।

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वहीं अगर रकम 5 लाख रुपये या उससे कम है तो व्यक्ति की मौत के 6 महीने बाद कुछ जरूरी दस्तावेजों के साथ पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग्स स्कीम पर क्लेम किया जा सकता है। क्लेम के लिए मरने वाले का डेथ सर्टिफिकेट जरूरी होगा। साथ ही डिपॉजिट की रिसीप्ट या पासबुक या कोई सर्टिफिकेट या अकाउंट स्टेटमेंट चाहिए होगा।

इसके अलावा फॉर्म-13 में एफिडेविट, फॉर्म-14 में लेटर ऑफ डिस्क्लेमर और फॉर्म-15 में क्षतिपूर्ति का बॉन्ड चाहिए होगा। इसके अलावा क्लेम करने वाले को अपने केवाईसी दस्तावेज और कुछ गवाहों की जरूरत होगी।

जीवन बीमा की रकम कैसे हासिल करें?

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अगर मरने वाले शख्स ने कोई जीवन बीमा कराया था तो आप कुछ जरूरी दस्तावेजों के साथ उन पैसों का दावा कर सकते हैं। इसके लिए आपको मरने वाले शख्स के डेथ सर्टिफिकेट, पॉलिसी के दस्तावेज, क्लेम फॉर्म आदि की जरूरत पड़ेगी। अगर मरने वाले शख्स ने आपको नॉमिनी नहीं बनाया था तो आपको एक लीगल दस्तावेज की जरूरत होगी, जिससे ये साबित किया जा सके कि आप कानूनी उत्तराधिकारी हैं।

मकान या जमीन-जायदाद पर अपना हक कैसे पाएं?

अगर किसी शख्स की मौत के बाद उस पर निर्भर लोग मरने वाले शख्स के मकान या प्रॉपर्टी पर अपना हक पाना चाहते हैं और कोई नॉमिनी नहीं है तो इसके लिए कानून का सहारा लेना होगा। कानूनी रूप से किसी शख्स के मकान या उसकी प्रॉपर्टीज पर उसके सभी कानूनी उत्तराधिकारियों का बराबर का हक होता है।

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जैसे अगर किसी शख्स के दो बेटे हैं तो उसकी प्रॉपर्टी पर दोनों बेटों और शख्स की पत्नी का बराबर का हक होगा। इसके लिए आपको मरने वाले के डेथ सर्टिफिकेट की तो जरूरत होगी ही साथ ही आपको अपना उत्तराधिकार भी साबित करना होगा। वसीयत नहीं होने की सूरत में एक हलफनामा तैयार कराना होगा, जिसमें सभी कानूनी वारिसों या उत्तराधिकारियों की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र होना जरूरी है।

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