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रेलवे हादसे में इतिहास बना डिरेल हुआ इंजन, एक माह से गड्ढे पड़ा, आरपीएफ कर रही रखवाली

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रेलवे हादसे में इतिहास बना डिरेल हुआ इंजन, एक माह से गड्ढे पड़ा, आरपीएफ कर रही रखवाली

कालका से चंडीगढ़ आ रहा रेल इंजन पटरी से करीब पचास फीट दूर गड्ढे में पड़ा है, जिसे उठाने में रेलवे की सारी मशीनरी फेल हो चुकी है। इंजन से पुर्जे चोरी न हो जाएं, इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों की चौबीस घंटे ड्यूटी लगा दी है। इंजन को उठाना एक चुनौती बन गया है, क्योंकि रेलवे के इतिहास में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि इंजन को उठाने के लिए रेलवे को लंबा समय लग गया हो। अब रेलवे प्राइवेट कंपनी की तलाश कर रहा है, जो इंजन को उठाकर लुधियान वर्कशाप तक पहुंचा दे। इसके लिए एक टेंडर लगाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पठानकोट से डिब्बे छोड़ने के लिए कालका 20 अक्टूबर 2021 को आया था। इंजन में ब्रेक की खराबी थी, जिसके बावजूद पटरी पर दौड़ता रहा। इसका नतीजा यह रहा कि डाउन में आते यह इंजन कंट्रोल से बाहर हो गया। इस मामले में करीब आठ लोगों को विभागीय जांच में जिम्मेदार ठहराया गया था।

गड्ढे पर गिरा रेल इंजन अभी तक नहीं निकाला गया।

120 टन के इंजन की कीमत है दस करोड़

करीब दस करोड़ का इंजन ब्रेक में खराबी होने के चलते आज बेपटरी हुआ पड़ा है। करीब 120 टन वजनी इंजन हाल ही में बनाया गया था। मौजूदा समय में इसे गड्ढे से उठाने के लिए लखनऊ, वाराणसी, लुधियाना की टीम भी आ चुकी है। पहले रेलवे की योजना थी कि इस इंजन को लखनऊ की वर्कशाप भेजा जाएगा। इंजन को पटरी पर चढ़ाकर लखनऊ भेजने में खर्च अधिक आ रहा था। इस लिए अब तय किया गया है कि इसे लुधियाना वर्कशाप भेजा जाएगा। प्राइवेट कंपनी को टेंडर दिया जाएगा तो सड़क मार्ग से इसे लेकर जाएगी।

खुद पटरी से उतारना पड़ गया इंजन

पहाड़ी रेल मार्ग पर स्लिप साइडिंग बनाई गई है। डाउन आते समय जब भी रेलगाड़ी अथवा सिर्फ इंजन आ रहा होता है, ताे स्टार्टर के पास गाड़ी को रुकना होता है। स्टार्टर पाइंट वह होता है, जहां पहाड़ी क्षेत्र से डाउन आने वाली गाड़ी को रोका जाता है। प्रत्येक ट्रेन को यहां पर रुकना पड़ता है। यदि गाड़ी रुक जाती है, तो उसे मुख्य लाइन पर भेजा जाता है। यदि यह स्टार्टर पाइंट पर नहीं रुकती, तो तकनीकी सिस्टम ऐसा है कि यह ट्रेन को स्लिप साइडिंग की ओर रवाना कर देता है। स्लिप साइडिंग पर बफर एंड बने होते हैं, जिससे टकराकर गाड़ी रुक जाती है या फिर पटरी से उतर जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इंजन या गाड़ी मेन लाइन पर न आ जाए और दूसरी दिशा (अप साइड) से आ रही गाड़ी से टकरा न जाए।

टेंडर किया जाएगा: डीआरएम

मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) जीएम सिंह ने कहा कि रेल इंजन को उठाने के लिए व्यवस्था बना रहे हैं। इसके लिए टेंडर लगाया जाएगा। जिसे भी टेंडर अलाट किया जाएगा वह इंजन को लुधियाना वर्कशाप तक पहुंचाएगा।

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