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पानीपत की राजनीति पटरी से उतरी, भारतीय जनता पार्टी का अजब खेल

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पानीपत की राजनीति पटरी से उतरी, भारतीय जनता पार्टी का अजब खेल

 

 सीनियर और डिप्टी मेयर के चुनाव में भाजपा ने सबको चौंका दिया। सभी संभावनाएं और पसंद दरकिनार कर दो बार मेयर चुनाव हार चुके पार्षद दुष्यंत भट्‌ट सीनियर और वार्ड-6 से पहली बार पार्षद बने रविंद्र डिप्टी मेयर बनाए गए। न पार्षदों की चली न मेयर अवनीत कौर की। सिर्फ सांसद संजय भाटिया और विधायक महीपाल ढांडा की चली।

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सांसद ने मेयर टिकट न मिलने से नाराज चल रहे दुष्यंत भट्‌ट को सीनियर डिप्टी मेयर बनाया। इससे मेयर अवनीत कौर और उनके पिता पूर्व मेयर सरदार भूपेंद्र सिंह पर अंकुश लगेगा। भट्‌ट को सीनियर डिप्टी मेयर बनाकर सांसद ने शहर में उभरने से पार्षद लोकेश नांगरू को रोककर ग्रामीण में विधायक महीपाल ढांडा के सामने भी विकल्प खड़ा कर दिया।

दुष्यंत भट्‌ट और रविंद्र को विधायक विज व अन्य ने फूल भेंट कर शुभकामनाएं दी। - Dainik Bhaskar

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इस बीच सीनियर डिप्टी मेयर की रेस में सबसे आगे रहे पार्षद लोकेश नांगरू ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय हुआ है। सांसद और विधायक के जनरल होने से ही सब कुछ पूरा नहीं हो जाता। वहीं चुनाव से पहले सांसद संजय भाटिया ने साफ कर दिया कि यह संगठन का फैसला है। कौन सीनियर और कौन डिप्टी मेयर बनने वाले हैं, यह सिर्फ संगठन नेताओं को पता था।

लोकेश नांगरू के बयान पर शहरी विधायक प्रमोद विज ने कहा कि पार्षदों से राय लेने के बाद संगठन ने निर्णय लिया है। बहरहाल, लघु सचिवालय की दूसरी मंजिल पर प्लानिंग के तहत शहरी विधायक प्रमोद विज ने लिफाफा खोलकर सीनियर डिप्टी मेयर के नाम की घोषणा की। वहीं, ग्रामीण से विधायक महीपाल ढांडा ने लिफाफा खोलकर डिप्टी मेयर रविंद्र का नाम बताया।

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दो मेयर चुनाव हारे भट्‌ट को शादी की सालगिरह पर मिला ताेहफा

3 पाॅइंट से जानिए, क्यों-कैसे बदली रणनीति

नाराज चल रहे थे भट्‌ट, इसलिए बनाया: आपको याद होगा- मेयर का टिकट नहीं मिलने पर भट्‌ट ने पार्टी विरोध में मेयर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली थी। तब पार्टी ने मनाया। फिर, जिला अध्यक्ष की बारी आई। भरोसा मिलने के बाद भी पद नहीं मिला। इसके बाद भट्‌ट खुद को पार्टी की राजनीति और सांसद से दूर करने लगे। नाराजगी दूर करने के लिए संजय भाटिया ने भट्‌ट को सीनियर डिप्टी मेयर बनाया है।

मेयर पर अंकुश लगेगा, नांगरू को भी रोकने में कामयाब रहे: भट्‌ट के बनने से मेयर अवनीत कौर और उनके पिता पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह पर भी अंकुश लगेगा। भट्‌ट और भूपेंद्र दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। इस बहाने लोकेश नांगरू को भी रोकने में कामयाबी मिल गई। ग्रामीण टिकट की दावेदारी करने वाले भट्‌ट को विधायक महीपाल ढांडा के सामने भी खड़ा कर दिया। इस तरह से एक ही निशाने से तीन को साधने में सांसद सफल रहे।

अफसरों को भी काबू में रख सकेंगे भट्‌ट: बेदाग छवि, निगम की जानकारी, हरियाणा स्वास्थ्य मिशन का सदस्य होना और सबसे बड़ी बात सीएम तक सीधी पहचान के कारण दुष्यंत भट्‌ट को सीनियर डिप्टी मेयर बनाने में संगठन को कोई दुविधा नहीं हुई। निगम का जानकार होने के कारण भट्‌ट नगर निगम अफसरों को काबू रखने में भी कामयाब हो सकते हैं। यह भी उनके खाते में गया।

क्यों पिछड़ गए नांगरू व कटारिया?

पार्षदों की पहली पसंद होने के बाद भी वार्ड-20 से पार्षद लोकेश नांगरू और वार्ड-7 से अशोक कटारिया पिछड़ गए। पंजाबियत, मॉडल टाउन के होने और विधायक प्रमोद विज का साथ न मिलने से नांगरू पीछे रह गए। सांसद और विधायक दोनों पंजाबी के साथ मॉडल टाउन से हैं। यह नांगरू के खिलाफ गया। रही-सही कसर शहरी विधायक प्रमोद विज का समर्थन न करना और मेयर अवनीत कौर की नहीं चलने से पूरी हो गई।

वहीं, सीनियर अशोक कटारिया पूर्व परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार के बहनोई और एससी समाज से होने के बाद भी पिछड़ गए, क्योंकि पंवार ने पैरवी नहीं की। अगर की तो उनकी चली नहीं। दुष्यंत भट्‌ट को शहरी कोटे से माना गया, इसलिए ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा ने डिप्टी मेयर पद मांग लिया और वार्ड-6 से पार्षद रविंद्र को डिप्टी मेयर बनवाने में सफल रहे। रविंद्र के बनने से एससी जाति का कोटा भी पूरा हो गया।

विधायक ने भावुकता में लिया फैसला : लोकेश

जनरल वर्ग के साथ न्याय नहीं हुआ। विधायक (प्रमोद विज) ने भावुकता में आकर निर्णय लिया। सांसद और विधायक के जनरल होने से ही जनरल का सब कुछ पूरा नहीं हो जाता। इसके लिए सांसद और विधायक को शहर दोषी मानेगा। -लोकेश नांगरू, पार्षद

मन नहीं मानता कि लोकेश ने ऐसा बोला : भाटिया

विश्वास नहीं हो रहा है। मन नहीं मानता है कि लोकेश ने ऐसी बात कही होगी। वह समर्पित कार्यकर्ता हैं। बाकी यह उनका अपना विचार है।
-संजय भाटिया, सांसद, करनाल लोकसभा

दावेदार थे, प्रस्तावक और समर्थक बनकर रह गए

जो बड़े दावेदार थे, वे प्रस्तावक और समर्थक बनकर रह गए। दोनों लिफाफे पर प्रस्तावक और समर्थन करने वाले के नाम लिखे थे। उसी के मुताबिक सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए पार्षद रविंद्र भाटिया ने दुष्यंत भट्‌ट के नाम का प्रस्ताव रखा और अशोक कटारिया ने समर्थन किया। इसी तरह से डिप्टी मेयर पद संजीव दहिया ने प्रस्ताव रखा और लोकेश नांगरू ने समर्थन किया।

जो पहले आवाज उठा रहे थे, वे भी मौके पर चुप्पी साध कर रह गए

दुष्यंत भट्‌ट और रविंद्र का नाम सामने आने पर पार्षद सिर्फ तालियां बजाते रह गए। किसी ने विरोध में एक शब्द भी नहीं कहा। आज भी वार्ड-23 से अश्वनी ढींगड़ा पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के बाहर बयान दे रहे थे, लेकिन लघु सचिवालय में सभी चुप्पी साध गए। क्योंकि, भाजपा ने इसके लिए पूरा होमवर्क किया था। लघु सचिवालय में सांसद संजय भाटिया के साथ ही दोनों विधायक भी मीटिंग में शामिल थे, इसलिए चाहकर भी कोई पार्षद कुछ बोल नहीं सके। अधिकांश मुंह लटकाए बाहर निकल गए।

रेस्ट हाउस में ही परिवहन मंत्री शर्मा ने पढ़ा दिया संगठन का पाठ

इससे पहले दोपहर 1 बजे पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में परिवहन मंत्री व चुनाव के पर्यवेक्षक मूलचंद शर्मा, सांसद संजय भाटिया, दोनों विधायक प्रमोद विज व महीपाल ढांडा, जिला अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, मेयर अवनीत कौर और सभी 26 पार्षद जुटे। चिरपरिचित अंदाज में सांसद संजय भाटिया ने भारत माता के जयकारे लगाए। फिर, कहा कि किसी को नहीं पता कि कौन सीनियर और कौन डिप्टी मेयर बनने जा रहे हैं। फिर, मूलचंद शर्मा ने संगठन का पाठ पढ़ाया। बोले- संगठन से ही सब कुछ है। संगठन से ही पीएम भी हैं और अन्य पद भी। उन्होंने कहा कि संगठन ने दो लिफाफे दिए हैं। सीनियर का लिफाफा प्रमोद विज और डिप्टी का महीपाल ढांडा लघु सचिवालय में खोलेंगे।

कभी आरएसएस की शाखा लगाते थे भट्‌ट

41 साल के ग्रेजुएट दुष्यंत भट्ट 17 साल की उम्र में (1996) अपनी सैनी काॅलोनी में बतौर मुख्य शिक्षक आरएसएस की शाखा लगाते थे। वहां से एबीवीपी, मंडल अध्यक्ष, श्रमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता से लेकर जिला में उपाध्यक्ष तक बने। फिलहाल, जिला उपाध्यक्ष के साथ ही राज्य स्वास्थ्य मिशन के सदस्य भी हैं।

मेयर चुनाव- 3 जुलाई, 2013: सरदार भूपेंद्र सिंह को 24 में से 16 और दुष्यंत भट्‌ट को 8 मत मिले थे। फिर, 22 जून, 2015 में 23 में से 14 मत लेकर सुरेश वर्मा मेयर बने थे। दुष्यंत को 9 मत मिला था। 2019 में जीतने की पूरी संभावना थी तो पार्टी ने टिकट ही नहीं दिया। अब शादी की सालगिरह के दिन भट्‌ट को सीनियर डिप्टी मेयर का तोहफा मिला है। 19 जनवरी 2001 को भट्‌ट की शादी हुई थी।

रविंद्र के विरोधियों की जमानत जब्त हो गई थी: 27 साल के रविंद्र ने जब एससी बहुल वार्ड-6 से पार्षद का चुनाव लड़ा तो सभी सातों विराधियों की जमानत जब्त हो गई थी। इनके पिता पृथ्वी सिंह 1987 से भाजपा से जुड़े हैं। तत्कालीन विधायक फतेहचंद विज के समय वह युवा जिला अध्यक्ष हुआ करते थे। अब ग्रेजुएट बेटा डिप्टी मेयर बना है।

 

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