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यमुना को स्वच्छ बनाने की कवायद, अब नदी में नहीं जाएगा फैक्ट्रियों का दूषित पानी

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यमुना को स्वच्छ बनाने की कवायद, अब नदी में नहीं जाएगा फैक्ट्रियों का दूषित पानी

यमुना नदी व पश्चिमी यमुना नहर को स्वच्छ बनाने की कवायद तेज हो गई है। प्रशासन ने इसके लिए दिसंबर 2022 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए हाल ही में चीफ सेक्रेटरी हरियाणा ने स्थानीय प्रशासन व संबंधित विभाग के अधिकारियों की मीटिंग भी ली है। जिसके बाद यमुनानगर प्रशासन पूरा रोडमैप तैयार करने में जुट गया है। शहर व फैक्टरियों से निकलने वाला दूषित पानी पश्चिमी यमुना नहर में न जाए, इसलिए एक और एसटीपी लगाने का भी निर्णय लिया गया है। यमुनानगर में 97 किलोमीटर सीवरेज लाइन डालने का काम भी अंतिम चरण में है।

यमुना नदी को स्‍वच्‍छ रखने की कवायद शुरू हो गई।

सूत्रों के मुताबिक चीफ सेके्रटरी ने जिला उपायुक्त पार्थ गुप्ता, नगर निगम कमीश्नर अजय तोमर व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मीटिंग ली। जिसमें यमुना नदी व पश्चिमी यमुना नहर को स्वच्छ बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में मुद्दा उठा कि यमुनानगर में फैक्टरियों व घरों से निकलने वाला दूषित पानी ट्रीट किए बिना नहर में छोड़ा जा रहा है। सीवरेज के पानी को ट्रीट करने के लिए लगाए गए प्लांट भी नाकाफी है।

फिलहाल यह है स्थिति

यमुनानगर में फिलहाल घरों व फैक्टरियों से निकलने वाले गंदें पानी में से 90 एमएलडी ही ट्रीट हो रहा है। जिसके लिए परवालो में 24 एमएलडी, बाड़ी माजरा में 10-10 एमएलडी व रेस्ट हाउस के पास 20 व 25 एमएलडी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए हैं। यमुनानगर में दो तरह का गंदा पानी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से यमुना में बहाया जा रहा है। जिसमें घरों व फैक्टरियों से निकलने वाला गंदा पानी शामिल है। नियमानुसार फैक्टरियों में ट्रीट करने के बाद ही पानी को बाहर बहाया जाता सकता है। जबकि घरों से निकलने वाले गंदें पानी को जलापूर्ति एवं जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट करने के का प्रावधान है। इसके बाद ही उसे यमुना में बहाया जाता है।

यमुनानगर में 150 एमएलडी डिस्चार्ज, हो रहा सिर्फ 90

सूत्रों के मुताबिक यमुनानगर जिले में रोजाना 150 एमएलडी गंदा पानी डिस्चार्ज हो रहा है। जिसमें से महज 90 एमएलडी पानी ही ट्रीट किया जा रहा है। बाकि पानी को बिना ट्रीट किए बाईपास कर यमुना में बहा दिया जाता है। यही वजह है कि यमुना की धारा यमुनानगर से ही मैली होनी शुरू हो जाती है। करनाल, पानीपत, सोनीपत से दिल्ली पहुुंचने से स्थिति बदतर हो जाती है। रही सही कसर दिल्ली में पूरी हो रही है। पिछले दिनों एनजीटी की टीम ने यमुनानगर का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। जिसके बाद स्थानीय प्रशासन को स्थिति दरूस्त करने के निर्देश दिए। ताकि यमुना की धारा को मैली होने से बचाया जा सकें।

पब्लिक हेल्थ लगाएगा 66 एमएलडी का प्लांट

दूषित पानी को ट्रीट करने के लिए पब्लिक हेल्थ की ओर से रादौर रोड पर 66 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। 10 जनवरी 2022 तक इस पर होने वाले खर्च का ब्यौरा जमा करवाना होगा।

इन विभागों को सौंपी स्वच्छता की जिम्मेदारी

यमुना व पश्चिमी यमुना नहर को स्वच्छ बनाने के लिए पब्लिक हेल्थ, नगर निगम, हुडा, पंचायत विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिसंबर 2022 तक सभी विभागों को अपने काम पूरे करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद भी यमुना व पश्चिमी यमुना नहर मैली होगी, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की जवाबदेही होगी।

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