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चार दिन में पशु पकड़कर थके कर्मचारी

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चार दिन में 7+8+8+8 = 31 पशु पकड़कर थके कर्मचारी, संडे को छुट्‌टी मनाई

निगम के मुताबिक, कुल 2469 पशु पकड़ने हैं, इसी गति से पकड़ते रहे तो 350 दिन से ज्यादा लगेंगे

सनाैली राेड शिव चाैक पर बैठे पशु, फोटो- नवीन मिश्रा - Dainik Bhaskar

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बेसहारा पशुओं से शहर परेशान है। हर चौक-चौराहों पर इन्ही का राज है, लेकिन न तो पब्लिक के रिकॉर्ड वोट से जीते जनप्रतिनिधियों को यह दिखाई दे रहा है और न ही पब्लिक को सुरक्षित रोड देने के लिए जिम्मेदार नगर निगम के अफसरों को। यही वजह है कि 1 सितंबर से बेमन से शुरू हुआ पशुओं को पकड़ने का अभियान रविवार 5 सितंबर को बंद रहा। क्योंकि, निगम के कर्मचारी थक हारकर संडे की छुट्‌टी मना रहे थे।

4 दिनों के अभियान में निगम ने शहर से 31 पशु पकड़े। निगम खुद यह मानता है कि शहर में 2500 के करीब बेसहारा पशु घूम रहे हैं। निगम को ही सही मानें तो अभी 2469 पशु अभी और पकड़ने हैं। इसी गति से पशु पकड़े गए तो अभी 350 दिन से ज्यादा लगेंगे।

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नहीं दिख रही सुधार की मंशा, इसलिए बेमन से हो रहे कामन तो जनप्रतिनिधियों और न ही अफसरों की सुधार की कोई मंशा है। शायद यही कारण है कि सभी काम बेमन से हो रहे हैं। पहले कहा- नैन गो अभयारण्य की स्थिति सुधारेंगे। पहले वहां पर टाइल बिछाकर पशुओं के लिए स्थिति ठीक करेंगे। आज तक कुछ नहीं हुआ। फिर, पशु भी बेमन से पकड़ रहे हैं।

अभियान को लेकर कब क्या आदेश हुए

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  • 20 अगस्त : मेयर अवनीत कौर, निगम कमिश्नर आरके सिंह, सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्‌ट और डिप्टी मेयर रविंद्र ने भरोसा दिया कि जल्दी ही पशु पकड़ने का अभियान शुरू होगा।
  • 23 अगस्त : मेयर अवनीत कौर और निगम कमिश्नर आरके सिंह नैन स्थित गो अभयारण्य पहुंचे। दावा किया कि अभयारण्य की स्थिति सुधारने के लिए वक्त चाहिए। एक सप्ताह का समय दिया। तय किया कि 1 सितंबर से पशु उठाएंगे।
  • 25 अगस्त : नैन गो अभयारण्य समिति के प्रधान सांसद से भी मिले। तब तय हुआ कि निगम आगे से 3 की जगह हर माह 4 लाख रुपए देगा।
  • 1 सितंबर : बेमन से रात 8 बजे एक गाड़ी लेकर पशु पकड़ने निगम की टीम निकली। 7 पशुओं को पहली बार पकड़ा।

जनप्रतिनिधियों से बड़ा सवाल- अफसर तो आ-जा रहे, आपको क्यों नहीं दिख रहा पशुओं से परेशान शहर
बड़ा सवाल यह है कि निगम के अफसर तो आ-जा रहे हैं। वे तर्क दे सकते हैं कि पहले वाले का पता नहीं, हमने तो काम शुरू करा दिया, लेकिन जनप्रतिनिधि तो शहर में ही हैं। क्या उनको शहर में घूम रहे पशु नहीं दिखते?

नैन अभयारण्य ठीक नहीं किया, अब तर्क दे रहीं मेयर
मेयर अवनीत कौर कह रही हैं कि नैन अभयारण्य में जमीन गीली है। जिस कारण एकसाथ पशुओं को नहीं भेज सकते। मेयर ने कहा कि अभयारण्य में फर्श बनाने के लिए सोमवार को एडीसी से मीटिंग करेंगे।

सच क्या है: नैन गो अभयारण्य का दौरा किए 14 दिन बीत गए, लेकिन इस दौरान वहां की स्थिति सुधारने के कोई मीटिंग नहीं हुई न ही कोई प्रयास। सिर्फ बयानबाजी चल रही है।

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