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हरियाणा के एक स्कूल में टीचर से लेकर छात्र तक सब कुछ फर्जी, जुर्माना लगा मात्र एक लाख, हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

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हरियाणा के एक स्कूल में टीचर से लेकर छात्र तक सब कुछ फर्जी, जुर्माना लगा मात्र एक लाख, हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

 

हिसार जिले के एक स्कूल में फर्जी छात्रों और फर्जी कक्षाएं चलाने का मामला हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन के लिए मुश्किल हो गया है। हाईकोर्ट ने बोर्ड चेयरमैन पर फर्जी छात्र और फर्जी क्लास रूम मामले में स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने पर सवाल उठाया और स्कूल पर सिर्फ 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन की कार्यप्रणाली के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि फर्जी छात्र और फर्जी क्लास रूम मामले की विस्तृत जांच उनकी निगरानी में कराई जाए। इस जांच में बोर्ड की भूमिका और बोर्ड के अध्यक्ष से लेकर निचले स्तर के अधिकारी तक की भी जांच कर हाईकोर्ट में रिपोर्ट दी जाए।

हरियाणा के एक स्कूल में टीचर से लेकर छात्र तक सब कुछ फर्जी, जुर्माना लगा मात्र एक लाख, हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने यह आदेश आशीष व अन्य की याचिका पर दिया। याचिका के अनुसार यह मामला हिसार जिले के डीएन पब्लिक स्कूल बरवाला का है। इन छात्रों ने बोर्ड के 10वीं कक्षा में रिजल्ट घोषित नहीं करने के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट के नोटिस पर बोर्ड ने रिजल्ट घोषित नहीं करने पर अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि जनवरी में बोर्ड कमेटी द्वारा स्कूल पर छापा मारा गया तो पता चला कि स्कूल में शिक्षक और छात्र उपलब्ध नहीं हैं।

जांच करने पर कमेटी को बताया गया कि छात्र खेलने गए हैं और जल्द ही आ रहे हैं। एक घंटे तक इंतजार करने के बाद कुछ छात्र सिविल ड्रेस में आए और कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्लास रूम में बैठाया गया। इन कमरों में छोटे बच्चों के बैठने के हिसाब से फर्नीचर था। शिक्षकों ने सख्ती से जांच करने पर माना कि वह दूसरे स्कूल का शिक्षक है। इन गंभीर अनियमितताओं को देखकर जून में बोर्ड ने स्कूल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था।

बाद में स्कूल द्वारा जुर्माना जमा न करने के आधार पर बोर्ड द्वारा छात्रों का रिजल्ट घोषित नहीं किया गया। इस पर वकील ने बच्चों की ओर से कहा कि यह स्कूल और बोर्ड का मामला है। बोर्ड द्वारा बच्चों को एडमिट कार्ड जारी किए गए। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच विवाद के कारण उन्हें सजा नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट यह देखकर हैरान रह गया कि कोई सख्त कदम उठाने के बजाय बोर्ड चेयरमैन ने स्कूल पर सिर्फ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। स्कूल फर्जी छात्रों के साथ फर्जी कक्षाएं चला रहा था जो वास्तव में कक्षाओं में शामिल नहीं थे, लेकिन नियमित छात्रों के रूप में परीक्षा लेने की अनुमति दी जा रही थी । हाईकोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिए कि वह याचिकाकर्ताओं का रिजल्ट एक सप्ताह के भीतर घोषित करे, जिसमें मुख्य सचिव को अध्यक्ष सहित सभी अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच करने का आदेश दिया जाए।