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फुटपाथ पर रात में सर्द हवा के थपेड़ों का सामना कर रहे किसान, खुले आसमान के नीचे कट रहीं रातें

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फुटपाथ पर रात में सर्द हवा के थपेड़ों का सामना कर रहे किसान, खुले आसमान के नीचे कट रहीं रातें

रात का वक्त और खुला आसमान। 10 डिग्री से कम तापमान के साथ ही ठिठुरा देने वाली सर्द हवाएं। टिकरी बॉर्डर की ये चुनौतियां भी आंदोलन से कम नहीं हैं। अधिकतर बुजुर्ग किसान ट्राॅलियों में लेटे हैं। जरा सी भी आहट होने पर आवाज देकर पूछते हैं कि कौन हो भाई। युवा किसान फुटपाथ पर ही पराली और गद्दे बिछाकर वक्त काट रहे हैं। इनकी भी आंखों में सुबह का इंतजार है। इन्हें खुद की नहीं खेती और अपनों की चिंता है। सभी का एक जैसा ही कहना है- बस अब तो अपनी मांगें मनवाकर घर जाकर ही चैन की नींद सोएंगे। रात में कई दस्ते पहरेदारी में भी लगे हैं। वे चौकस हैं, ताकि कोई शरारती तत्व ऐसी हरकत न कर दे, जिससे आंदोलन बदनाम हो।

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एक दस्ता रात में चाय बनाकर सेवा कर रहा है, ताकि दिन में सरकार और रात में सर्द रातों से लड़ा जा सके। बाहर बैठे किसानों के लिए अलाव बड़ा सहारा है। खुले में जो किसान सो रहे हैं, सुबह तक उनके बिस्तरों पर ओस की बूंदें जम चुकी होती हैं। फिर आंदोलन का इरादा डिगा नहीं है। इन सब का जोश देखने लायक है और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है, जबकि अब तक टिकरी बॉर्डर पर आंदोलकारी चार किसान साथियों को खो चुके हैं। ऐसे में परिजनों को चिंता सता रही है। पत्नी-बच्चे फोन पर रोज पूछते हैं कि घर कब आओगे।

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पहरेदारी के लिए बारी बांधी
फुटपाथ पर बठिंडा के जत्थे में बैठे किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें पहरेदारी के लिए पूरी रात जागना पड़ता है। किसान इकबाल सिंह ने बताया कि रात के समय सड़क पर नींद नहीं आती। ठंड लगती है। जसविंदर ने बताया कि पहरेदारी के लिए बारी लगाई हुई है।

महिलाओं की सुरक्षा में एक दस्ता
दिल्ली की सीमा पर सर्द रात में बुजुर्ग किसान ट्राॅलियों में आराम कर रहे हैं तो युवा सड़कों पर गद्दे डालकर लेटे हैं। ट्राॅलियां ऊपर से ढकी हुई हैं तो बुजुर्ग किसान ठंड से थोड़ा बहुत बच पा रहे हैं। सेक्टर-9 बाइपास पर रात 11 बजे बैठे जत्थे में शामिल किसान गुरमीत ने बताया कि बुजुर्गों को ट्राॅलियों में सुलाया जा रहा है तो महिलाओं के जत्थे की सुरक्षा के लिए भी उन्हें जागना पड़ता है। किसानों ने कहा कि वाहे गुरु जी उनके साथ हैं तो जीत उन्हीं की होगी।

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पोता पूछता है- दादा कब आओंगे
बाईपास पर रात को ट्राॅली में बैठकर बच्चों से वीडियो कॉल कर रहे सरदार सुच्चा सिंह ने बताया कि उनका पूरा परिवार मानसा में है। उनका एक पोता है रोज पूछता है कि दादा जी आप कहां हो और कब आओगे। इसका मेरे पास कोई जवाब नहीं होता। किसान जसविंदर सिंह ने बताया कि टेक्नोलॉजी है तो बच्चे भी सुबह शाम उनका हालचाल पूछ लेते हैं। तसल्ली तो है कि सब कुछ सही है, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा कुछ नहीं पता।

 

 

Source : Bhaskar

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