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किसान संगठनों का बड़ा फैसला, हरियाणा में 20 सितंबर को रोड जाम, 15 से धरना हाेंगे शुरू

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किसान संगठनों का बड़ा फैसला, हरियाणा में 20 सितंबर को रोड जाम, 15 से धरना हाेंगे शुरू

 

 

भाकियू प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम चढूनी की अध्यक्षता में रविवार को जींद की जाट धर्मशाला में किसान संगठनों की मीङ्क्षटग हुई। मीटिंग में भाकियू, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, भारतीय किसान संघर्ष समिति, हरियाणा किसान मंच, आजाद किसान मिशन, संयुक्त जल संघर्ष समिति, हरियाणा किसान संघर्ष समिति, गन्ना संघर्ष समिति समेत 19 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया गया। तीन घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में चली मीङ्क्षटग में तीन अध्यादेशों को लेकर आंदोलन की आगामी रणनीति बनाई। 15 से 19 सितंबर तक धरने दिए जाएंगे। उसके बाद 20 सितंबर को तीन घंटे के लिए प्रदेश में रोड जाम किए जाएंगे।

बैठक में कहा गया कि पिपली में भी किसान और आढ़ती शांतिपूर्वक आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन साजिश के तहत सरकार ने उन पर लाठियां बरसवाई। सिविल ड्रेस में पुलिस वालों ने आंदोलनकारियों के सिर पर लाठियां मारी। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 सितंबर तक प्रदेश में यात्राएं करके और लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा और यात्रा के समापन पर बड़ा किसान सम्मेलन किया जाएगा। चढ़ूनी ने कहा कि सरकार जो तीन अध्यादेश लेकर आई है, उससे किसान, आढ़ती और व्यापारी बर्बाद हो जाएगा। कुछ पूंजीपति वल्र्ड मार्केट के हिसाब से कम रेट पर फसल खरीदेंगे और पूरा देश उनसे महंगे रेट पर खरीद कर खाएगा। ये कंपनी वर्सेज आम जनता की लड़ाई है।

किसान संगठनों का बड़ा फैसला, हरियाणा में 20 सितंबर को रोड जाम, 15 से धरना हाेंगे शुरू

गैर राजनीतिक आंदोलन, किसी को हाईजैक नहीं करने देंगे

इस आंदोलन को कांग्रेस का आंदोलन होने के आरोप पर गुरनाम चढूनी ने कहा कि ये गैर राजनीतिक आंदोलन है। कांग्रेस सरकार में जब गन्ने का आंदोलन था, तब बीजेपी वाले धरने पर आते थे और कांग्रेस आरोप लगाती थी। ओमप्रकाश धनखड़ स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू कराने के लिए कपड़े निकाल कर आंदोलन करते थे। चाहे कांगेेस हो या कोई ओर, किसी राजनीतिक पार्टी को ये आंदोलन हाईजैक नहीं करने दिया जाएगा। कांग्रेस की नीतियां भी वही रही हैं, जो आज बीजेपी सरकार की हैं।

तीन संसदीय सांसदों की कमेटी पर उठाए सवाल

गुरनाम चढूनी ने किसान संगठनों से बातचीत के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष द्वारा बनाई तीन सांसदों की कमेटी के वजूद पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीन अध्यादेश का मामला केंद्र सरकार का है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष द्वारा कमेटी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। केंद्र सरकार 16 सितंबर को संसद में ये बिल लेकर आ रही है। एमएसपी से कम मूल्य पर फसल खरीदना दंडनीय अपराध होना चाहिए और फसल के भुगतान की गारंटी सरकार की होगी। ये बिल सरकार लेकर आए।

दूसरे संगठन पर आंदोलन कमजोर करने का आरोप

वहीं रतन मान की अध्यक्षता वाले भाकियू द्वारा पांच अक्टूबर को बरवाला में महापंचायत बुलाने के निर्णय की जानकारी होने से इंकार करते हुए गुरनाम चंढूनी ने कहा कि कुछ लोग सरकार के इशारे पर आंदोलन को कमजोर करना चाहते हैं। अगर वे किसानों का भला चाहते हैं, तो अलग आंदोलन करने की बजाय एकजुट होकर लड़ाई में साथ दें। किसान जागरूक हो चुके हैं, वे किसी के बहकावे में नहीं आएंगे।