करनाल के लघु सचिवालय में चल रहा किसानों का पड़ाव पांचवें दिन समाप्‍त हो गया। किसान नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच वार्ता सफल रही। दोनों पक्षों ने सामने आकर सहमति जताई। वहीं किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि बैठक से पहले संयुक्‍त किसान मोर्चा के वरिष्‍ठ नेताओं से बातचीत हो चुकी थी। मांग मान ली गई है। अब किसान नेता जाट धर्मशाला के लिए रवाना हो गए हैं। वहां पर आंदोलनकारी मौजूद हैं।

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किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों के बीच आकर धरना समाप्ति का एलान किया। इससे पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई वार्ता में तीन मांगों को लेकर द्विपक्षीय सहमति बनी। तय हुआ कि बसताड़ा प्रकरण के समय करनाल के एसडीएम रहे आयुष सिन्हा से जुड़े लाठीचार्ज मामले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज करेंगे। एक महीने की अवधि में होने वाली जांच के दौरान आइएएस सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे। वहीं, दिवंगत किसान सुशील काजल के परिवार के दो लोगों को डीसी रेट पर एक सप्ताह में नौकरी दी जाएगी।

लघु सचिवालय के बाहर किसानों को सहमति की जानकारी देते गुरनाम सिंह चढ़ूनी।

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पहले किसान नेताओं ने आपस में की चर्चा

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शनिवार सुबह से ही जिला सचिवालय स्थित कान्फ्रेंस हाल में गहमागहमी बढ़ गई। वहीं, किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी और अन्य नेताओं ने जाट भवन पहुंचकर प्रशासन के साथ अपनी मांगों पर बनी सहमति के बिंदुओं को लेकर किसानों से विचार-विमर्श किया। इसके बाद सुबह करीब 11 बजे किसान नेता जिला सचिवालय पहुंचे। यहां अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चढ़ूनी कान्फ्रेंस हाल में मीडिया के सामने आए। प्रशासनिक स्तर पर एसीएस देवेंद्र सिंह ने बात शुरू की। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वार्ताएं हुई हैं लेकिन शुक्रवार रात तक करीब सवा चार घंटे तक सौहार्दपूर्ण व सकारात्मक माहौल में चली द्विपक्षीय वार्ता में तकरीबन सभी मांगों पर सहमति बनी।

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दोनों पक्षों में सहमति

एसीएस ने बताया कि हरियाणा सरकार 28 अगस्त को बसताड़ा टोल पर हुए प्रकरण की न्यायिक जांच कराएगी। यह जांच हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे और जांच यथासंभव एक माह में पूर्ण कराई जाएगी।इस दौरान पूर्व एसडीएम आयुष सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे। हरियाणा सरकार मृतक किसान सुशील काजल के परिवार के दो लोगों को करनाल में ही डीसी रेट पर नौकरी देगी। यह मोटे तौर पर समझौता हुआ है, जिस पर दोनों पक्षों की सहमति है।

वहीं, किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी ने कहा कि दिवंगत किसान सुशील काजल के परिवार के कष्ट की भरपाई संभव नहीं है क्योंकि असली नुकसान उसी का हुआ है। इसलिए हमने सरकार से मांग की थी कि परिवार के दो लोगों को नौकरी पर रखा जाए। यह सेंक्शन पोस्ट होगी और एक सप्ताह में नौकरी दे दी जाएगी। इसी तरह करनाल के एसडीएम रहे आयुष सिन्हा पर एफआइआर की मांग भी हमने की थी, जिस पर विधिक राय ली गई। इस आधार पर सहमति बनी कि यदि प्रशासन यह एफआइआर करता है तो उसे आगे चलकर रद करने के आसार बने रहते हैं। लेकिन हाइकोर्ट के जज जांच करते हैं तो उससे जांच प्रभावित होने की आशंका नहीं रहती। यह मांग भी सरकार ने मांग ली है। हालांकि मुआवजे की मांग को लेकर इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।

वहीं, फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों व उनकी बातचीत के कई दौर के बाद सरकार ने किसानों की मांगें मान ली हैं इस बारे में सभी किसान संगठनों के नेताओं से बातचीत की गई। सभी ने सहमति जताई। इसी आधार पर जिला सचिवालय के सामने चल रहा धरना समाप्त कर दिया गया है।

उतार-चढ़ाव के बाद सकारात्मक परिणीति

बीती 28 अगस्त को हुए बसताड़ा प्रकरण में लाठीचार्ज के बाद आए तमाम उतार-चढ़ाव के बाद किसान नेताओं ने सात सितंबर को करनाल की नई अनाज मंडी में महापंचायत की थी। इसमें भाकियू नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी और योगेंद्र यादव सहित अन्य किसान नेताओं की मौजूदगी में लिए निर्णय के साथ ही बड़ी संख्या में किसानों ने लघु सचिवालय कूच किया था। राह में पुलिस प्रशासन की ओर से लगाए गए तमाम नाकों को ध्वस्त करते हुए किसान लघु सचिवालय के मेन गेट तक पहुंचने में सफल रहे थे। इसी के साथ उन्होंने सात सितंबर की शाम से मेन गेट के ठीक सामने धरना भी शुरू कर दिया था। दिन-रात यहां संबोधन का दौर जारी रहा और टिकैत, चढ़ूनी व योगेंद्र यादव सहित सभी प्रमुख नेता किसानों में जोश भरते रहे। इस बीच प्रशासन के साथ किसान नेताओं की वार्ता के अलग अलग दौर भी चले लेकिन सुलह का फार्मूला सिरे नहीं चढ़ सका। इसे देखते हुए करनाल में किसानों का पड़ाव लंबा खिंचने की चर्चा जोरों पर थी लेकिन इसी बीच शुक्रवार शाम अचानक घटनाक्रम में अहम बदलाव देखने को मिला, जिसकी सकारात्मक परिणीति अंतत: शनिवार सुबह आधिकारिक रूप से दोनों पक्षों की ओर से सार्वजनिक किए गए समझौते के फार्मूले की शक्ल में सामने आई।

 

जानिए वार्ता के प्रमुख अंश

एसीएस देवेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्‍य रूप से दो मांगों पर सहमति बनी है। दिवंगत किसान सुशील काजल के परिवार के दो लोगों को डीसी रेट पर नौकरी दी जाएगी। नौकरी एक हफ्ते में मिल जाएगी। इस पर सहमति हुई है।

इसके अलावा एसडीएम आयुष सिन्‍हा मामले में हाईकोर्ट के रिटायर जज के द्वारा न्‍यायिक जांच करवाई जाएगी।

इन दोनों मांगों की अवधि एक महीने रहेगी। इस एक महीने की अवधि में एसडीएम आयुष सिन्‍हा छुट्टी पर रहेंगे।

 

चढ़ूनी ने कहा, करनाल लघु सचिवालय में पड़ाव अब खत्‍म हो चुका है। लेकिन आंदोलन अभी खत्‍म नहीं हुआ है। बसताड़ा टोल प्‍लाजा पर आंदोलन जारी रहेगा। भाजपा जजपा के नेताओं का विरोध करते रहेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि कार्यकर्ता भी मांग और सह‍मति से संतुष्‍ट हैं। अब धरना समाप्‍त है। सरकार ने सभी मांग मान ली।

एक नजर में जानिए अब तक आंदोलन में क्‍या-क्‍या हुआ

  • 28 अगस्‍त को भाजपा की बैठक के विरोध में करनाल बसताड़ा टोल पर किसान एकजुट हुए।
  • बसताड़ा टोल प्‍लाजा पर रोड जाम करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज की।
  • लाठीचार्ज के विरोध में चढ़ूनी के वीडियो जारी करने के बाद हरियाणा में रोड जाम कर दिया गया।
  • सात सिंतबर को करनाल महापंचायत और लघु सचिवायल घेराव की घोषणा की गई।
  • सात सितंबर को सुबह 11 बजे महापंचायत शुरू हुई।
  • चढ़ूनी, टिकैत और योगेंद्र यादव भी शामिल हुए।
  • प्रशासन ने वार्ता के लिए संदेश भेजा।
  • दिन में तीन बार वार्ता हुई। तीनों बार मांग नहीं मानी गई।
  • किसान नेताओं की तरफ से एसडीएम आयुष सिन्‍हा को सस्‍पेंड करने की मांग की गई।
  • किसान नेता अनाज मंडी महापंचायत के लिए वापस रवाना हुए।
  • करीब पांच बजे लघु सचिवालय घेराव का एलान किया गया।
  • प्रशासन ने पहले कुछ जगहों पर किसानों को हिरासत में लिया। हालांकि बाद में छोड़ दिया।
  • किसानों ने लघु सचिवालय का घेराव कर लिया। लंगर और टेंट लगने शुरू हो गए।
  • आठ सितंबर को दोपहर दो बजे फिर से प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत शुरू हुई।
  • तीन घंटे तक चली बातचीत असफल रही।
  • टिकैत ने कहा, एसडीएम को सस्‍पेंड नहीं किया जा रहा है। आंदोलन दिल्‍ली की तर्ज पर चलेगा।
  • डीसी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि बिना जांच के किसी पर भी कार्रवाई नहीं की जा सकती, चाहे वो अधिकारी, कर्मचारी या आम आदमी क्‍यों न हो। ​
  • 10 सिंतबर को भीड़ जुटना शुरू हुई। पंजाब और उत्‍तर प्रदेश से भी किसान नेता आने लगे।
  • देर शाम तक  सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) देवेंद्र सिंह करनाल पहुंचे। उन्‍होंने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया।
  • करीब तीन दौर की बातचीत के बाद दो मांगों पर सहमति बन गई।
  • एसडीएम पर कार्रवाई के मामले में सुबह फिर वार्ता की बात सामने आई।
  • 11 सितंबर यानी आंदोलन के पांचवें दिन सुबह किसान नेताओं ने जाट भवन में बैठक की। इसके बाद मीटिंग में पहुंचे।
  • प्रशासन से बातचीत में सभी मांगें मान ली गईं।
  • सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) देवेंद्र सिंह और किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संयुक्‍त रूप से मीडिया के सामने सहमति जताई।

10 सितंबर की शाम को बैठक के प्रमुख अंश

मांग: दिवंगत किसान सुशील के परिवार केा 25 लाख रुपये मुआवजा व स्‍वजन को सरकारी नौकरी।

जवाब: सरकार मांग पूरी करने पर सहमत।

मांग: लाठीचार्ज में घायल किसानों को दो-दो लाख का मुआवजा दिया जाए।

जवाब: सरकार पूरी करने पर सहमत।

मांग: वायरल वीडियो को लेकर विवादों में घिरे आइएएस आयुष सिन्‍हा पर कार्रवाई और जांच।

जवाब: इस पर बातचीत चल रही है।

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एसडीएम पर कार्रवाई की मांग पर हो रही बातचीत

आइएएस आयुष सिन्हा पर कार्रवाई और जांच को लेकर शनिवार सुबह नौ बजे फिर दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हो गई थी। वहीं देर शाम वार्ता समाप्त होने के बाद किसान नेताओं के चेहरे पर सुकून साफ नजर आ रहा था। उन्होंने कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई।

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वार्ता के बाद किसान नेताओं ने पड़ाव के तंबू में एलान कर दिया कि शनिवार का दिन ऐतिहासिक होगा।

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सकारात्मक रही बातचीत

उपायुक्त निशांत यादव ने बताया कि किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत सकारात्मक रही। कई बिंदुओं पर प्रशासन व किसानों के बीच सहमति बनी है।

 

ये रहे किसानों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल

भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, सुरेश कौथ, रतन मान, सेवा सिंह आर्य, राजेंद्र आर्य दादूपुर, रामपाल चहल, जगदीप सिंह औलख, गुरुमुख सिंह, राकेश बैंस, जसबीर भट्टी, मंजीत सिंह चौगांव, एडवोकेट मुनीष लाठर व अजय सिंह राणा शामिल थे।

प्रशासन की ओर से इन्होंने दिया भरोसा

सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) देवेंद्र सिंह, डीसी निशांत यादव, एसपी गंगाराम पूनिया।