भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का फोसटेक(फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन) प्रोग्राम एक सितंबर से शुरू हो चुका है। होटल-रेस्टोरेंट के मालिकों, डेयरी उत्पादकों, अचार-पापड़, चाट-पकौड़ी की दुकान-ठेली लगाने वालों, हलवाइयों सहित किसी प्रकार की खाद्य सामग्री बनाने और बेचने वालों के लिए यह ट्रेनिंग जरूरी है।

आनलाइन दी जाएगी ट्रेनिंग

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जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्यामलाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने एश्योर क्वालिटी मैनेजमेंट सर्टिफिकेशन सर्विसेज से अनुबंध किया है। इस कंपनी की ओर से ही खाद्य सामग्री बनाने और बेचने वालों को आनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें कार्यस्थल पर साफ-सफाई रखने, पौष्टिक व गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री परोसने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ट्रेनिंग पूरी करने वालों को एक प्रमाण-पत्र भी जारी किया जाएगा, इसका मान्यता दो साल होगी। इससे प्रमाणित होगा कि कारीगर हाइजीन और फूड सेफ्टी के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक यह प्रशिक्षण सभी एफबीओ (फूड बिजनेस आपरेटर) यानि रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस धारकों व अन्य के लिए अनिवार्य है।

छह सौ रुपये फीस

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फाेस्टेक ट्रेनिंग एक प्राइवेट कंपनी के ट्रेनर देंगे। 25 कारीगरों पर किसी एक को प्रशिक्षित किया जाएगा। ट्रेनिंग की एवज में 600 रुपए का शुल्क सरकार के खाते में जमा होगा। रेहड़ी-ठेला पर खाद्य सामग्री बेचने वालों को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट फ्री में दिए जाएंगे। ऐसे में हरियाणा में खाद्य सामग्री बनाने-बेचने वालों के लिए फोसटेक ट्रेनिंग लेनी अनिवार्य होगी।

ट्रेनिंग में सिखाई जाएगी ये बातें

ट्रेनिंग में ट्रेनर कारीगरों को कई बातें सिखायेगा, जिसमें ये मुख्य बातें होंगी।

-कारीगर सिर पर कैप, मुंह पर मास्क, हाथों में दस्ताने पहनें।

-प्रतिष्ठान परिसर में साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी है।

-बीमार कारीगर से काम नहीं लिया जाना चाहिए।

-हर कारीगर को फोस्टेक ट्रेनिंग पूरी करनी है।

-आनलाइन ट्रेनिंग के लिए गैजेट्स का इंतजाम प्रतिष्ठान का स्वामी करेगा।

-किसी कारीगर को खांसी-बुखार है तो कोरोना जांच जरूरी है।

-ग्राहक को शुद्ध पेयजल ही परोसा जाए।

-एफएसएसएआइ की गाइडलाइन का पालन करना होगा।