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पानीपत

हैरान कर देगी 600 करोड़ का फ्रॉड करने वाले सिंगला की कहानी, किरयाणा की दुकान से बना अंतरराष्‍ट्रीय कारोबारी

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हैरान कर देगी 600 करोड़ का फ्रॉड करने वाले सिंगला की कहानी, किरयाणा की दुकान से बना अंतरराष्‍ट्रीय कारोबारी

करीब 600 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपित एवं रामदेव कंपनी का संचालक नरेश सिंगला आज आढ़तियों से लेकर बैंकों व कईं राज्यों की पुलिस के अलावा सीबीआई के निशाने पर है। उसके हर कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। फिलहाल करनाल पुलिस के रिमांड पर चल रहे नरेश सिंगला से अभी कई राज उगलने की उम्मीद है, लेकिन उसकी यहां तक पहुंचने की कहानी काफी दिलचस्प है। वह फर्श से अर्श तक पहुंचा और अंतरराष्ट्रीय स्तर का कारोबारी भी बन गया, जिसका फायदा उठाते हुए वह सुनियोजित तरीके से  परिवार को दुबई में स्थापित कर वहां भी कारोबार करने लगा।

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हैरान कर देगी 600 करोड़ का फ्रॉड करने वाले सिंगला की कहानी, किरयाणा की दुकान से बना अंतरराष्‍ट्रीय कारोबारी

सगला परिवार के करीबी कारोबारियों की मानें तो करीब 40 साल पहले उनकी अपने गांव बल्ला में करियाणा की दुकान थी, जिसके बाद उसने अपने दो भाईयों के साथ मिलकर करनाल पुरानी अनाजमंडी में कमीशन एजेंट के तौर पर कारोबार शुरू किया और आढ़तियों के बीच अपना रसूख भी बनाया। इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने कुछ साल में ही राइस मिल भी खड़ा कर लिया। राइस मिल लगाने के बाद उसने अपना कारोबार दुबई व अन्य देशों तक शुरू किया। पैठ बनी तो करनाल अनाजमंडी के 111 आढ़तियों ने उस पर पूरा भरोसा किया। आज इन्हीं आढ़तियों की उन पर करीब पौने 11 करोड़ की देनदारी मानी जा रही है।

नई राइस मिल लगा जीता भरोसा

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सिंगला पर अपनी करोड़ों की देनदारी का दावा करते हुए पीडि़त आढ़ती कृष्ण पाढा व रघुवीर सिंह ने बताया कि राइस मिल लगाने के कुछ साल बाद ही सिंगला पर उनके साथ-साथ अन्य आढ़तियों का करीब 14 करोड़ का भुगतान खड़ा हो गया तो अनाजमंडी एसोसिएशन के नियम के मुताबिक आगे उसे धान देने से ही आढ़तियों ने इंकार कर दिया। लेकिन उसने उसी समय चैक के जरिए अधिकतर भुगतान कर दिया तो प्रदेश की सबसे बेहतर व अत्याधुनिक नई मिल भी खड़ी कर दी, जिसके चलते आढ़तियों का उस पर फिर भरोसा बन गया और वे धान देते रहे।

हो गई थी विदेश भागने की आशंका : रजनीश

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आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रजनीश चौधरी व पीडि़त आढ़तियों की मानें तो उन्हें वर्ष 2016 में उसके विदेश भागने की आशंका उस समय हो गई थी जब नई मिल की मशीनरी भी औने-पौने भाव में बेची जाने लगी। उन्होंने न केवल पुलिस में अपने साथ की गई धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई बल्कि तत्कालीन पुलिस प्रशासन को अगाह भी किया था। उसका पासपोर्ट जमा कराने की भी मांग की थी और करीब दो माह तक करनाल व गोहाना के आढ़ती सड़कों पर रोष जताते रहे।

 

 

 

Source : Jagran

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