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दिल्ली:यहां 400 साल से लग रहा है भूतों का मेला, बाल खींचकर और झाड़ू मारकर दूर की जाती है बला

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दिल्ली:यहां 400 साल से लग रहा है भूतों का मेला, बाल खींचकर और झाड़ू मारकर दूर की जाती है बला

 

आज के जमाने में सांइस ने भले ही काफी तरक्की कर ली है लेकिन आज भी लोग अंधविश्वास से जुड़े हुए है। और अपनी दिक्कतों को दूर करने का प्रयास इधर उधर भटकर झाड़ फूंक से कर रहे है। ऐसा ही कुछ नजारा म.प्र. में देखने को मिलता है जहां पर लगता है भूतों का मेला। इस जगह पर आकर लोग अपनी तकलीफों को दूर करते है। 400 साल से चली आ रही इस प्रथा को लोग इतना मानते है कि दूर देश के लोग भी अपने दर्द से छुटकारा पाने के लिए इस मेले में सम्मलित हो जाते है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि भूतों के मेले के बारे में यह मेला कहां पर लगता है और इसकी शुरूआत कब और कैसे हुई।

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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के चिचोली गांव में गुरु बाबा साहब की समाधि है। जहां पौष माह की पूर्णिमा से इस मेले की शुरूआत होती है और बड़ी मात्रा में लोग इस जगह पर आकर अपनी समस्याओं को दूर करते है।

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दूर होते है भूत प्रेत, निसन्तान, सर्पदंश, मानसिक रोग

बताया जाता है कि इस जगह पर ऐसे लोग आते है कि जो भूत प्रेत, निसन्तान, सर्पदंश, से पीड़ित होते है ऐसे लोगों का इलाज इस जगह पर होता है। 400 साल से ज्यादा समय से लग रहे इस मेले में आने वाले लोगों से समाधि की परिक्रमा कराई जाती है। और ऐसा करते ही पीड़ित का शरीर हलचल करने लग जाता है। इस जगह पर बैठा पुजारी भूत प्रेत से पीड़ित महिला मरीज़ों के बाल पकड़ कर उससे कई प्रश्न पूछते हैं जवाब ना मिलने पर मरज को जोर से झाड़ू मारी जाती है। फिर गुरु साहब का जयकारा लगता है।

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कौन थे बाबा गुरु साहब, जानें उनके बारें में

कहा जाता है कि गुरु साहब बंजारा समाज के हैं और बचपन से खेती और मवेशी चराते थे। यहां पर एक तरह की अलौकिक शक्ति है, जिससे लोगों की बधाएं असानी के साथ दूर हो जाती है। लेकिन विज्ञान इस बात को नही मानता। क्योंकि मानसिक बीमारी अलग-अलग तरह की होती है। इसका चिकित्सा विज्ञान में अलग ट्रीटमेंट होता है। बाल खींच कर, झाड़ू मार कर इलाज करना अंधविश्वास है।

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