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देवी स्वरूप कुशाग्रा, हिती की झोली में हैं कई उपलब्धियां

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देवी स्वरूप कुशाग्रा, हिती की झोली में हैं कई उपलब्धियां

पानीपत। भारतीय संस्कृति में बच्चियों को ही माता रानी का रूप माना जाता है। अष्टमी पूजन में इन कन्याओं को ही भोजन करवाकर इनकी पूजा अर्चना की जाती है। दुुर्गा मां के कुछ ऐसे ही बचपन रूप जिले में हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभाओं के हुनर की बदौलत देश भर में ख्याति प्राप्त की है। इनमें एक नाम है कुशाग्रा और दूसरी हैं हिती।

पानीपत। हिती।

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दयाल सिंह पब्लिक स्कूल की चौथी कक्षा की आठ वर्षीय छात्रा कुशाग्रा हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा वार्षिक रूप से आयोजित बाल महोत्सव कार्यक्रम की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। वह राज्य स्तर पर लोक गायन व कहानी प्रतियोगिता में लगभग 2500 प्रतिभागियों में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त कई विधाओं में राज्य स्तर पर सात और जिला स्तर पर 12 पुरस्कार प्राप्त किए हैं।

कुशाग्रा ने अपनी प्रथम प्रस्तुति के रूप में मात्र दो वर्ष की आयु में मंच पर ‘बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ’ विषय पर कविता प्रस्तुत की थी। इसके अतिरिक्त वह अन्य सामाजिक सरोकार के विषयों जैसे रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण, नारी सशक्तीकरण इत्यादि पर विभिन्न सम्मानित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। वह मंच संचालन करती है और सदैव कक्षा में हमेशा अव्वल रहती हैं। कुशाग्रा बोलीं, वह बड़ी होकर जज बनना चाहती हैं और समाज से कुरीति और बुराई को दूर करना चाहती हैं।
दूसरी दुर्गा मां का रूप है हिती। हिती ने तीन साल की उम्र से ही नृत्य कला में मेहनत शुरू कर दी। खास बात ये है कि उन्हें नृत्य किसी ने सिखाया नहीं बल्कि खुद के हुनर और चाह की दम पर तीन साल पहले संडे-फंडे तक में डांस कर चुकी हैं। हिती अपनी नृत्य कौशल की विधा से दो बार राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हुए एक आयोजन में हिती को स्वयं मुख्यमंत्री 31 हजार रुपये से सम्मानित कर चुके हैं।

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पानीपत। कुशाग्रा ट्राफी व स्मृती चिन्ह के साथ।

 

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