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प्रदूषण पर खोखली सील, अब बिजली कनेक्शन कटेंगे

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प्रदूषण पर खोखली सील, अब बिजली कनेक्शन कटेंगे

प्रदूषण फैलाने के आरोप में दस फैक्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सील तो कर दिया, लेकिन बिजली वितरण निगम ने बीस दिन बीतने के बाद कनेक्शन नहीं काटे। कनेक्शन नहीं काटने के कारण फैक्ट्रियां सील होने के बावजूद चल रही हैं। प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आ रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में बबैल चौक के आसपास दस फैक्ट्रियों को सील किया था। इन उद्योगों को किया सील

प्रदूषण पर खोखली सील, अब बिजली कनेक्शन कटेंगे

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1.लोटस लूमटैक्स प्लाट नंबर 218 सेक्टर 29 पार्ट दो

2. पंजाब थर्मों पैक छोटू राम चौक, बबैल रोड नजदीक काबुल मस्जिद

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3. हिमांशु एंटरप्राइजिज बापौली रोड

4. हर्ष हैंडलूम, खुशी गार्डन चांदनी बाग के पीछे

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5. गुरुनानक फर्निशिग छोटू राम चौक बबैल रोड

6. रमन फर्निशिग चांदनी बाग पानीपत

7. रोशनी फर्निशिग चांदनी बाग

8. गंगौत्री बबैल रोड नजदीक ड्रेन

9. बबीता एंटरप्राइजिज गांव कारद

10. अंकुर टेक्सटाइल मिल्ज, शिव नगर कृष्णपुरा ब्वायलर में जल रहा था अवैध ईंधन

ये उद्योग बिना बोर्ड की कंसेंट के चलते मिले थे। उद्योगों में लगे ब्वायलर में अवैध ईंधन वेस्ट जलता मिला था। इस पर कार्रवाई करते हुए बोर्ड ने उद्योगों को क्लोजर नोटिस जारी किए थे। नोटिस के बाद भी कंसेंट न लेने पर इन उद्योगों का सील किया गया था। वाटर एक्ट 1974 और एयर एक्ट 1981 के तहत दे सकता है नोटिस

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के लिए वाटर एक्ट 1974 व एयर एक्ट 1981 के तहत संबंधित विभागों के आदेश जारी कर सकता है। इन्हीं एक्ट के तहत दस उद्योगों के बिजली पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जारी किए गए। पानीपत में ज्यादातर उद्योगों में भूजल का प्रयोग होता है। बडे-बडे ट्यूबवेल उद्योगों में लगे हैं, जिनसे पानी लिया जाता है। बिजली के कनेक्शन ही काटने का रास्ता बचता है। बिजली पानी के कनेक्शन काटने के बाद ही प्रदूषण पर रोक लगती है। प्रदूषण अधिकारी बोले- उच्च अधिकारियों को लिखा

उद्योगों को सील करने के बाद भी पावर के कनेक्शन नहीं काटने के बारे में क्या कार्रवाई की जाएगी, इसके बारे में प्रदूषण नियंत्रण को रीजनल अधिकारी कमलजीत सिंह से पूछा तो उन्होंने बताया कि दस सितंबर को आदेश जारी किए गए थे। बिजली निगम को रिमाइंडर भी दिया गया है। कनेक्शन काटने की रिपोर्ट नहीं मिली है। यदि कनेक्शन नहीं कटे तो उच्च अधिकारियों के जानकारी में मामला लाया जाएगा। बिजली निगम को होता है नुकसान

बिजली वितरण निगम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के बाद भी कनेक्शन काटने में ढिलाई बरतते हैं क्योंकि कनेक्शन काटने से बिजली निगम को राजस्व का नुकसान होता है। इस संदर्भ में अधीक्षण अभियंता एसएस ढुल का कहना है कि उनके संज्ञान में नहीं है। यदि बोर्ड ने आदेश जारी किए हैं तो कनेक्शन कटवाए जाएंगे। पहले भी हम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के कनेक्शन काटते रहे हैं।

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