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पानीपत

मंत्री अनिल विज ने कहा पानीपत निगम कमिश्नर कोई काम नहीं करते

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मंत्री अनिल विज ने कहा पानीपत निगम कमिश्नर कोई काम नहीं करते

प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी में फेल साबित होने पर नगर निगम के कमिश्नर सुशील कुमार को निलंबित करने की सिफारिश गृहमंत्री अनिल विज ने की है। निगम का शहरवासियों पर 259.18 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। 2020-21 में निगम को 139 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी करनी थी, लेकिन सितंबर तक सिर्फ 9.74 करोड़ रुपए ही आए। मंत्री अनिल विज ने इस बारे में कहा कि पानीपत निगम के कमिश्नर कोई काम ही नहीं करते।

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यही वजह है कि 6 माह में 10 करोड़ से भी कम आए हैं। विज ने कहा कि रेंट भी ठीक से नहीं लिए जा रहे, तो कहां से पैसा आएगा। कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए निगम के पास पैसे नहीं है। इसलिए, कार्रवाई जरूरी थी। 2003 बैच के एचसीएस सुशील कुमार को 9 जून को पानीपत नगर निगम का कमिश्नर बनाया गया था। उससे पहले वह शाहाबाद शुगर मिल के एमडी थे। गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि एचसीएस को सस्पेंड नहीं कर सकते। इसलिए मुख्य सचिव को लेटर भेजकर कमिश्नर को निलंबित करने की सिफारिश कर दी है।

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5 लाख से अधिक टैक्स वाले कुल 195 बकाएदार

शहर में 1.50 लाख से ज्यादा हाउस हैं। इसके अलावा संस्थान भी हैं। प्रॉपर्टी टैक्स की स्थिति कितनी खराब है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 195 ऐसे बकाएदार हैं जिस पर 5 लाख रुपए से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। ऐसे लोगों के पास 194 करोड़ रुपए प्रॉपटी टैक्स बकाया है। निगम का शहर वासियों पर 259 करोड़ बकाया है। मतलब कि सिर्फ 195 लोगों पर कुल प्रॉपर्टी टैक्स का 75 फीसदी बकाया है।

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  • बड़े देनदारों पर ही कार्रवाई नहीं होती: जो जितना बड़ा, उस पर उतना बकाया। बड़े देनदारों पर कभी कार्रवाई ही नहीं होती। यही कारण है कि रहेजा मॉल पर 19.16 करोड़, मित्तल मेगा मॉल पर 15.61 करोड़, एनएफएल 11.20 करोड़ आदि बकाया है। 5 लाख से वाले 195 बकाएदार हैं, जिन पर 194 करोड़ बकाया है।
  • रिहायशी काे कॉमर्शियल, खाली प्लॉट को मकान का टैक्स भेज देते हैं: ऑनलाइन सिस्टम पूरी तरह से फेल है। मनमाने ढंग से बिल बनाया जाता है। रिहायशी को कॉमर्शियल, तो खाली प्लॉट को मकान का बिल बनाकर भेज देते हैं।
  • नोटिस तो देते हैं, पर बिल लेने वाले कर्मचारी ही खा जाते हैं टैक्स: नोटिस तो देते हैं। उस नोटिस पर जब लोग बिल जमा कराने जाता है तो कच्चा कर्मचारी ही बिल खा जाता है। संयुक्त कमिश्नर ने 535 प्रॉपर्टी की जांच की थी। जिस पर 5.87 करोड़ का टैक्स बनता था। डीसी रेट के स्टाफ ने 2.48 करोड़ लेकर शेष 3.50 करोड़ को शून्य बना दिया।

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  • बड़े देनदारों पर सबसे पहले कार्रवाई: बड़े देनदारों पर ही सबसे पहले बड़ी कार्रवाई होती है। सेंट्रल फीनिक्स क्लब पर सिर्फ 28 लाख बकाया था, फिर भी निगम ने सील कर दिया। डीसी, कमिश्नर, एसडीएम सहित बड़े-बड़े रसूखदार इस क्लब के सदस्य हैं। सील करने के 23 मिनट में ही क्लब ने टैक्स जमा करा दिया।
  • बिल में गड़बड़ी नहीं, इसलिए जमा कर देते हैं लोग: बिल बनाने में गड़बड़ी नहीं होती। लोगों का निगम में विश्वास है, इसलिए बहुत से लोग ऑनलाइन ही जमा कर देते हैं। अगर गड़बड़ी हो तो वह भी जल्दी और सुगम तरीके से ठीक हो जाता है।
  • जल्दी-जल्दी देते हैं नोटिस, इसलिए रिकवरी तेज: बिल की रिकवरी तेज होने का एक और कारण है। निगम के कर्मचारी जल्दी-जल्दी रिकवरी का नोटिस जारी करते रहते हैं। इस दौरान बैंक्वेट हॉल, होटल सहित अन्य संस्थान सील हुए हैं। जिससे लोगों में डर बना रहता है कि कहीं सील न हो जाए।

Source : Bhaskar

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