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पानीपत

6 जिलों के अस्पतालों का दावा- टुकड़ों में मिल रही डिमांड से कम ऑक्सीजन, सरकार ने तय किया कोटा

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6 जिलों के अस्पतालों का दावा- टुकड़ों में मिल रही डिमांड से कम ऑक्सीजन, सरकार ने तय किया कोटा

 

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच ऑक्सीजन की किल्लत से सांसों की डोर टूट रही है। गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल, पानीपत, अम्बाला में ऑक्सीजन की डिमांड कई गुना बढ़ गई है। 5 दिनों से हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

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वहीं, 6 जिलों के अस्पतालों का दावा है कि टुकड़ों में ऑक्सीजन मिलने से सांसें अटकी रहती हैं। सरकार ने अब जिलों का कोटा तय कर दिया है। निजी अस्पताल संचालक बेड व वेंटिलेटर न होने की कहकर गंभीर मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी कर रहे हैं। पढ़िए… जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट

अम्बाला सिटी के सिविल अस्पताल में वार्ड से बाहर रखे खाली ऑक्सीजन सिलेंडर। - Dainik Bhaskar

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कोरोना के दूसरे चरण में मरीजों की सांसें चलाने में आक्सीजन की अधिक जरूरत पड़ रही है। बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां में कोविड मरीजों के लिए 300 बेड आरक्षित किए गए हैं। कॉलेज में 137 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 70 मरीज ऑक्सीजन व 40 वेंटिलेटर पर हैं, जबकि कॉलेज में 40 ही वेंटीलेटर हैं, जो फुल रहते हैं। ऑक्सीजन की खपत भी अधिक है। आक्सीजन बेड की संख्या कम-ज्यादा होती रहती है।

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कॉलेज में ऑक्सीजन के करीब 450 सिलेंडरों का स्टॉक है। खाली सिलेंडर भरने के लिए गाड़ी प्रतिदिन 3 से 4 बार आती है। जिसमें 200 सिलेंडर होते हैं। जितने भी खाली होते हैं, सभी रिफिल कर देती है। लेकिन यहां मरीज ऑक्सीजन का प्रेशर कम होने की शिकायत कर रहे हैं, जिसे अस्पताल प्रबंधन भी मान रहा है। इससे बड़ा खतरा हो सकता है। यहां ऑक्सीजन की सप्लाई सिलेंडर से होती है।

प्लांट से वार्ड में बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइपों की फीटिंग कराई है। सामान्य दिनों में जिस बेड पर ऑक्सीजन की जरूरत होती थी, उसी पर सप्लाई शुरू करते थे, लेकिन वार्ड में भर्ती होने वाले अधिकांश मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। अब सभी बेड पर ऑक्सीजन चालू कर दी जाती है। इसलिए प्लांट से बेड तक पहुंचते-पहुंचते प्रेशर कम हो जाता है।

आशंका जताई जा रही है कि ऑक्सीजन के अधिक मरीज बढ़ने और प्रेशर अधिक कम होने पर हादसा भी हो सकता है। कॉलेज के अधिकारी के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई 15 से 20 लीटर प्रति मिनट होनी चाहिए। प्लांट से सप्लाई पूरी होती है, लेकिन अधिक बेड पर बंटने प्रेशर कम हो रहा है।

कॉलेज को पिछले वर्ष कोविड अस्पताल बनाया था। कॉलेज ने लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का प्रपोजल भेजा था। अब यह फिर फाइल खुल गई है। इधर, मेडिकल कॉलेज के डाॅयरेक्टर डॉ. एपीएस बत्रा ने कहा कि अधिक बेछ पर ऑक्सीजन देने पर प्रेशर कम हो जाता है, लेकिन इसे मैनेज कर रहे हैं।

मरीज बोले- प्रेशर कम होने से सांस लेने में दिक्कत

कॉलेज में भर्ती मरीज ऑक्सीजन का दबाव कम होने की शिकायतें करते हैं। उनका कहना है कि दबाव कम होने से उन्हें सांस लेने में दिक्कत आती है। इसलिए स्टॉफ को ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने का आग्रह करते हैं। भर्ती मरीज के परिजन बताया कि उनकी ऑक्सीजन की मात्रा 70 तक पहुंच गई थी। वह उसे बढ़ाने के लिए बार-बार कहते रहे, लेकिन स्टाफ भी कुछ नहीं कर पा रहा।

  • ग्राउंड रिपोर्ट अंबाला

अम्बाला में पांच गुना तक बढ़ी ऑक्सीजन की खपत

अम्बाला, कोरोना के बढ़ते केसाें के साथ-साथ ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर भी जिले में हाहाकार मच गई है। ऑक्सीजन की खपत जिले में पहले के मुकाबले 5 गुना ज्यादा बढ़ गई है। ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए लोग जिले के एकमात्र मेडिकल ऑक्सीजन डिस्ट्रीब्यूटर के यहां दौड़ लगा रहे हैं।

पहले जिले में औसतन 1500 किलो लीटर ऑक्सीजन की एक दिन में खपत थी। अब कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से एक दिन में 9 हजार किलो लीटर तक खपत पहुंच गई है। सरकारी अस्पताल से लेकर घरों में कोरोना एवं अन्य बीमारियों के मरीजों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई हो रही है।

कैंट मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई के लिए यूनाईटेड ट्रेडर्स पर दिल्ली के अलावा आसपास के शहरों से लोग ऑक्सीजन मांग को लेकर फाेन कर रहे हैं। फर्म संचालक संदीप अग्रवाल पाटिल बताते हैं कि दिल्ली तक से ऑक्सीजन सप्लाई के लिए उनके पास फोन कॉल्स आ रही हैं। अम्बाला में रिश्तेदारों के माध्यम से ऑक्सीजन उपलब्धता की जानकारी मांगी जा रही है।

इधर, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि सभी डीसी से असेसमेंट करा ली गई है, उसके अनुसार ऑक्सीजन उपलब्ध कराएंगे। अब ऑक्सीजन टैंकर के साथ अब पुलिस कर्मचारी भी चलेगा। टैंकर में ही पुलिस कर्मी होगा। अब हर दिन शाम को सब कमेटी समीक्षा करेगी। अब हरियाणा विद्युत निगम में मास्क न लगाने पर एक दिन की सैलरी काटने का आदेश आया है।

  • ग्राउंड रिपोर्ट पानीपत

डाॅक्टर मरीज के परिजनों से ही सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कर रहे, ताे काेई कर रहा डिस्चार्ज

निजी अस्पतालों में संकट बढ़ा: प्रशासन के काॅल बैक तक नहीं आ रहे

दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे डरवाने हालात अब पानीपत में भी बनते जा रहे हैं। सबसे बड़ा संकट प्राइवेट अस्पतालाें का है, क्याेंकि पहले ये खुद ऑक्सीजन का प्रबंध करते थे, लेकिन जब से सरकार ने काेटा तय किया है, तब से समस्या बढ़ गई है।

डाॅक्टराें के ग्रुप में अस्पतालाें के संचालक ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। काेई कह रहा मेरे पास 20 मरीज हैं, एक घंटे की ऑक्सीजन बची है ताे काेई कह रहा- मेरे पास 40 मरीज हैं, अभी सिलेंडर चाहिए, लेकिन जिला प्रशासन उनकी डिमांड 50 प्रतिशत भी पूरी नहीं कर पा रहा। पार्क अस्पताल राेजाना 10 से 15 मरीजाें की छुट्टी ये कहकर कर रहा है कि उनके पास ऑक्सीजन नहीं है।

ग्लैक्सी अस्पताल के मरीजाें के परिजन ही सिलेंडर लाने के लिए इधर-उधर जुगाड़ कर रहे हैं। प्रेम अस्पताल रिफाइनरी से टाइअप कर ऑक्सीजन पूरी कर रहा है। मैक्स अस्पताल नए मरीज लेना बंद कर रहा है, क्याेंकि मरीज ज्यादा है और ऑक्सीजन की सप्लाई डिमांड अनुसार नहीं मिल रही। वहीं, प्रशासन दावे कर रहा है कि ऑक्सीजन की काेई कमी नहीं है।

  • ग्राउंड रिपोर्ट रोहतक

रोहतक में आसपास के राज्यों के मरीजों का दबाव, ऑक्सीजन डिस्ट्रीब्यूटर के साथ 10 पुलिसकर्मी तैनात

ऑक्सीजन के लिए 4-4 घंटे तक इंतजार कर रहे मरीजों के परिजन

रोहतक में राेजाना 7 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की डिमांड बन चुकी है, लेकिन पानीपत प्लांट से कभी 6 ताे कभी 10 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन मिल रही है। हिसार प्लांट से एक मीट्रिक टन राेजाना की सप्लाई देने का वादा किया था। दिल्ली, फरीदाबाद, उत्तरप्रदेश और पंजाब तक के मरीज अब रोहतक आ रहे हैं। इससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है और ऑक्सीजन की मांग भी।

ऑक्सीजन के डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर लोगों की भीड़ लग गई। कई स्थानों पर पिछले दो दिन से गैस नहीं है। शहर में आईडीसी सेंटर पर पुलिस पहरे में ऑक्सीजन सिलेंडर भरे जा रहे है। व्यवस्था को संभालने के लिए करीब 10 पुलिस कर्मियों की एक गार्द तैनात की गई है। यहां लोगों को करीब 4- 5 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

इधर, शीला बाईपास से दिल्ली रोड पर स्थित डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के कर्मचारियों के अनुसार दो दिन से ऑक्सीजन नहीं है। लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। गोहाना अड्डा के विकास ने बताया कि घर में कोविड मरीज है। अब ऑक्सीजन की जरूरत है। उनका पांच घंटे बाद नंबर आया।

 

 

 

Source : Bhaskar

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