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कोरोना को ठीक करने में कितना कारगर है रेमडेसिविर इंजेक्शन? AIIMS और WHO के एक्सपर्ट्स ने बताया सच

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कोरोना को ठीक करने में कितना कारगर है रेमडेसिविर इंजेक्शन? AIIMS और WHO के एक्सपर्ट्स ने बताया सच

 

कोरोना वयारस के बढ़ते प्रकोप के बीच जब देश के तमाम बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन, बैड्स और दवाओं की भारी कमी पड़ने लगी तो लोग अपना इलाज दूसरी चीजों के जरिए कर रहे हैं। इन दिनों एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर की काफी मांग बढ़ रही है। लेकिन क्या इससे व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो सकता है?

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aiims said that remdesivir is no magic bullet for covid-19 and know how effective is this antiviral drug according to experts

COVID-19: कोरोना को ठीक करने में कितना कारगर है रेमडेसिविर इंजेक्शन? AIIMS और WHO के एक्सपर्ट्स ने बताया सच
कोरोनोवायरस (Coronavirus) के तेज रफ्तार से बढ़ते मामलों ने सरकार और आम जनता को गहरी चिंता में डाल दिया है। भारत में हर रोज लाखों की संख्या में लोग कोविड से संक्रमित हो रहे हैं। देश के तमाम बड़े हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन, बैड्स और दवाओं की कमी के कारण कोविड मरीजों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। ऐसे में एंटीवॉयरल ड्रग रेमडेसिविर (Remdesivir) की मांग काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां कहा जाता है कि ये COVID पीड़ितों के इलाज और उन्हें राहत देने में मदद करता है। वहीं दूसरी ओर इंडियन अथॉरिटीज का कहना है कि ये कोई जान बचाने वाला ड्रग नहीं है और इसका बिना वजह इस्तेमाल गलत है। (फोटो साभार: istock by getty images)

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क्या है रेमडेसिविर

रेमडेसिविर (Remdesivir) एक एंटीवायरल ड्रग है जिसकी कोविड-19 की दूसरी लहर (Covid-19 Scond wave) के बीच सबसे अधिक मांग हो रही है। आज से करीब एक दशक पहले इस दवा को हेपेटाइटिस सी और सांस संबंधी वायरस (RSV) का इलाज करने के लिए एक अमेरिकी दवा कंपनी मैसर्स गिलियड साइंसेज ने बनाया था।

हाल के दिनों में ज्यादा डिमांड को देखते हुए तमाम जगहों पर इसकी कालाबाजारी भी हो रही है। अब ये दवा बाजार में अनुचित मूल्य पर सेल की जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, रेमडेसिविर की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।

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​रेमडेसिविर का कोविड मरीजों पर इस्तेमाल

कोरोना की दूसरी लहर से उपजे हालातों में ऑक्सिजन वेंटिलेटर्स, प्लाजमा और रेमडेसिविर जैसे एंटीवायरल ड्रग्स की डिमांड बढ़ गई है। वायरस के खिलाफ इसके शुरुआती असर को देखते हुए US FDA ने COVID-19 के इलाज में इसके उपयोग की अनुमति दी थी। वहीं भारत में भी भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने COVID-19 प्रबंधन प्रोटोकॉल दस्तावेज़ में एक जांच चिकित्सा के रूप में इसके उपयोग का सुझाव दिया था। हालांकि, उसमें भी यह स्पष्ट किया गया है कि यह जीवन रक्षक दवा नहीं है।

​कोविड की दूसरी लहर से बुरी तरह जूझ रहा भारत

कोरोना महामारी के आए हुए एक साल से अधिक समय हो गया है। दूसरी लहर में डबल म्यूटेंट ने जबरदस्त कहर ढा रखा है। संकट की घड़ी ने कई देशों के हेल्थकेयर सिस्टम को हिलाकर रख दिया है।

COVID-19 की दूसरी लहर में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव के अनुसार, ‘कोविड की नई लहर में बुजुर्गों की अपेक्षा यंग लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। इसका एक कारण ये भी है कि यंग जनरेशन को कोविड वैक्सीन नहीं मिल रही थी, जिससे युवा मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई।’ हालांकि अच्छी खबर ये भी है कि 1 मई से अब 18 साल व उससे ऊपर के सभी लोगों को टीके लगाए जाएंगे।

​कोई जादू की गोली नहीं है Remdesivir

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इन दिनों भारत न सिर्फ इस घातक वायरस से जूझ रहा है बल्कि यहां हेल्थ इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारी गिरावट आई है। महामारी (Pandemic) के बीच लाखों लोग अब जीवित रहने के लिए नए-नए तरीके खोज रहे हैं। इन हालातों के बीच ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (AIIMS) दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने एक बयान में कहा, ‘रेमडेसिविर (Remdesivir) कोई जादू की गोली नहीं है और न ही ये किसी प्रकार की दवा है जिससे मृत्यु दर में कमी आ जाती है।’

गुलेरिया ने यह भी कहा कि ‘अब तक ऐसे कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं कि रेमडेसिविर के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की मृत्युदर कम होती है। उन्होंने कहा कि कोरोना के लिए कोई सटीक एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण इसका उपयोग किया जा रहा है।’

 

​इन मरीजों के लिए उपयोगी है रेमडेसिविर

डक्टर गुलेरिया ने आगे कहा, ‘रेमडेसिविर का इस्तेमाल अस्पतालों में उन कोविड मरीजों के लिए उपयोगी साबित हुआ जो अस्पताल में भर्ती थे और जिन्हें ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ रहा था, लेकिन इसे रेगुलर एंटीबायोटिक की तरह नहीं लिया जा सकता है।’ एम्स निदेशक के अनुसार, यह दवा अस्पताल में भर्ती लोगों को दी जानिए चाहिए जिनके ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल में गिरावट आ रही हो और जिनके चेस्ट एक्सरे में फेफड़े में इंफेक्शन होने की पुष्टि हो गई हो।

WHO ने नहीं की रेमडेसिविर द्वारा कोविड डेथ रेट कम होने की पुष्टि

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COVID-19 रोगियों पर रेमडेसिविर के इफेक्ट को लेकर खूब बहस हो रही हैं। हालांकि, कुछ अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि दवा का घातक वायरस के खिलाफ कोई प्रभाव नहीं है। वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस इंजेक्शन के बाद कोविड मरीजों को कुछ अवधि के लिए राहत मिल सकती है न कि ये बीमारी को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है।

इस एंटीवायरल को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने स्पष्ट किया कि हमारे द्वारा किए गए पांच क्लीनिकल ट्रायल में हमने यह पाया कि रेमडेसिविर ने अस्पतालों में भर्ती मरीजों की मृत्यु दर को कम करने या उनकी यांत्रिक आवश्यकता को कम करने में कोई मदद नहीं की

Source: Navbharat

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