Connect with us

विशेष

मेरी मौत हो जाए, तो लाश पुलिस को सौंप दें… अपनों ने छोड़ा तो बुजुर्ग ने लगाया पोस्टर, पुलिसवाले बनकर आए देवदूत

Published

on

Advertisement

मेरी मौत हो जाए, तो लाश पुलिस को सौंप दें… अपनों ने छोड़ा तो बुजुर्ग ने लगाया पोस्टर, पुलिसवाले बनकर आए देवदूत

 

कोरोना के खौफ के चलते एक बुजुर्ग को जब उनके ही परिजनों ने भगवान भरोसे छोड़ दिया, तो दिल्ली पुलिस उनकी मदद के लिए आगे आई। एक कॉन्स्टेबल ने बुजुर्ग की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें किसी तरह घर से निकाल कर अस्पताल में भर्ती कराया।

Advertisement

जानकारी के मुताबिक, रविवार की सुबह करीब 11 बजे ओल्ड राजेंद्र नगर में रहने वाले एक बुजुर्ग शख्स की बेटी ने पीसीआर पर कॉल करके बताया कि उसके पिता को पिछले कुछ दिनों से बुखार है। मरीज को कुछ अन्य गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स होने की जानकारी भी उनकी बेटी ने दी, लेकिन साथ में यह भी कह दिया कि उसे डर है कि शायद उसके पिता को कोरोना हो गया है और इसी वजह से वह उनके पास नहीं जाना चाहती है। सूचना मिलते ही राजेंद्र नगर थाने में तैनात कॉन्स्टेबल राजू राम (32) जब बताए गए पते पर पहुंचे, तो घर के बाहर लगा एक पोस्टर देखकर हैरान रह गए। उस पोस्टर पर वहां रह रहे मुरलीधर (80) ने लिख रखा था कि अगर उनकी मौत हो जाए, तो उनकी लाश पुलिस के सुपुर्द कर दी जाए।

corona-elderly

Advertisement

जांच में पता चला कि इस घर के थर्ड फ्लोर पर रहने वाले मुरलीधर सीआईडी ऑफिसर रह चुके हैं। उनकी तीन बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी हैं। उनमें से दो बेटियां दिल्ली में और एक बाहर रहती हैं। कालकाजी में रहने वाली उनकी बेटी ने पुलिस को कॉल करके उनके बारे में सूचना दी थी। मौके पर पहुंचे कॉन्स्टेबल राजू राम ने बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के लिए कैट्स एंबुलेंस बुलाई। पहले तो बुजुर्ग ने अस्पताल जाने से ही मना कर दिया, जिसके बाद एंबुलेंस वापस भेजनी पड़ी। फिर राजू ने अपने साथी कॉन्स्टेबल प्रदीप को फोन करके बुलाया और दोनों पुलिसवाले पीपीई किट पहनकर ऊपर गए। काफी समझाने के बाद मुरलीधर अस्पताल जाने के लिए राजी हुए, जिसके बाद कॉन्स्टेबल राजू ने दोबारा से एंबुलेंस बुलाई और उन्हें आरएमएल हॉस्पिटल ले गए।

इस दौरान पुलिसवालों के सामने खुद को भी संक्रमण के खतरे से बचाने की चुनौती थी। ऐसे में पूरी एहतियात के साथ और तय प्रक्रिया का पालन करके मरीज को घर से अस्पताल शिफ्ट करने में ही तीन घंटे लग गए। आरएमएल हॉस्पिटल ले जाने के बाद कॉन्स्टेबल ने मुरलीधर को खाना और दूध या जूस पिलाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने कुछ भी खाने-पीने से मना कर दिया और केवल पानी मांगा, जिसके बाद पुलिसवाले उनके लिए पानी लेकर आए। इस बीच डॉक्टरों ने उनके चेस्ट का एक्स-रे किया, जिसमें काफी इन्फेक्शन पाया गया। उनका ऑक्सीजन लेवल भी कम पाया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने मुरलीधर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कर लिया। बाद में पुलिसवालों ने उनकी बेटी को फोन करके सूचित किया कि उनके पिता का अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। इस पर उनकी बेटी ने भी पुलिसवालों का शुक्रिया अदा किया। मूल रूप से राजस्थान के सीकर के रहने वाले कॉन्स्टेबल राजू राजेंद्र नगर थाने में बनी बैरक में ही रहते हैं। उनकी पत्नी और बच्चे गांव में ही रहते हैं।

Advertisement

 

 

Source : NavBharat

Advertisement