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43 दिन में कुंडली बॉर्डर पर 2 से बढ़कर 11 किलोमीटर तक फैले किसान, टिकरी बॉर्डर पर घटे न बढ़े, रेवाड़ी में रोज पहुंच रहे नए जत्थे

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43 दिन में कुंडली बॉर्डर पर 2 से बढ़कर 11 किलोमीटर तक फैले किसान, टिकरी बॉर्डर पर घटे न बढ़े, रेवाड़ी में रोज पहुंच रहे नए जत्थे

 

24 नवंबर को दिल्ली कूच के लिए चले किसान 27 को कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे और यही आंदोलन शुरू कर दिया। इस दौरान प्याऊ मनियारी तक दो किलोमीटर के दायरे में किसानों के ट्रैक्टर-ट्राॅलियां थी। इसमें 15 हजार के करीब किसान थे, जोकि ज्यादातर पंजाब के निवासी थे। 5 दिसंबर तक किसानों का काफिला लगातार बढ़ा और दायरा बढ़कर 7 किलोमीटर तक एनएच-44 पर पार कर मॉल तक हो गया।

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पहले किसान एनएच पर दिल्ली वाली लेन पर ही थे, लेकिन अब दोनों तरफ सात किलोमीटर तक किसानों का डेरा हो गया। 10 दिसंबर के बाद हरियाणा के किसानों की संख्या भी बढ़ने लगी। हरियाणा के गांवों से महिलाएं और पुरुष किसान पहुंच रहे हैं। पंजाब व हरियाणा के गुरुद्वारा, वकील, विभिन्न श्रमिक व किसान संगठन व परिवार इससे जुड़े हैं। अब 75 हजार से अधिक किसान यहां हैं। 11 किलोमीटर में बहालगढ़ तक किसानों के काफिले हैं।

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टिकरी : धरने पर कम पहुंच रहे, टेंट में ही दिनभर डाल रहे पड़ाव

बहादुरगढ़ में पिछले 43 दिन से टिकरी बाॅर्डर पर पड़ाव डाले किसानों की हाजिरी खराब मौसम में कम नहीं हुई है। तीन दिन की बारिश के बावजूद यहां से किसानों का कोई पलायन नहीं हुआ है। यहां शुरू से अब तक करीब 5 किलोमीटर में किसान फैले हुए हैं। हालांकि टिकरी बाॅर्डर पर मेट्रो लाइन के नीचे बनाए मंच के पास काफी कम संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। मंच से आगे टेंट में ही किसान पड़ाव डाले हुए हैं। गुरुवार को बारिश में उखड़े टेंटों को संभालना और ट्रैक्टर मार्च की तैयारियों में जुटे रहे। टिकरी बॉर्डर पर पुलिस खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार करीब 18 हजार किसान डटे हैं।

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खेड़ा बॉर्डर: दिन में 3 हजार और रात में आधी रह जाती हैं संख्या

हरियाणा-राजस्थान के खेड़ा-शाहजहांपुर बॉर्डर पर 25 दिन से किसान संगठनों का धरना चल रहा है। एक जत्था पुलिस के बेरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गया था, जो बॉर्डर से 30 किलोमीटर दिल्ली की तरफ हाईवे पर डटा है। प्रदर्शनकारियों में 85 से 90% राजस्थान और पंजाब के लोग हैं। जबकि 10 से 15% ही हरियाणा के प्रदर्शनकारी हैं। कुछ लोग कम होते हैं समर्थन के लिए हर रोज और लोग आ जाते हैं। खेड़ा बॉर्डर पर दिन में 2-3 हजार प्रदर्शनकारी होते हैं। रात को संख्या आधी रह जाती है।

सिरसा पहुंचे चढ़ूनी बोले- अब हम दो कदम आगे बढ़ सकते हैं, पीछे नहीं हट सकते

भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी बुधवार को सिरसा पहुंचे। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को लेकर सरकार से कई दौर की वार्ता हो चुकी है। भाजपा सरकार जिद पर अड़ी है, क्योंकि उन्हें ये भ्रम है कि आज तक ये होता आया है कि प्रधानमंत्री ने जो कानून लागू किए हैं, वो वापस नहीं हुए हैं, लेकिन जिस देश की जनता सड़कों पर है और राजा को नींद आए तो समझ लेना चाहिए कि मामला गड़बड़ है। पत्रकारों से चढूनी ने कहा कि सरकार किसानों की ताकत की परीक्षा ले रही है।

सरकार को लगता है कि किसान कुछ दिन यहां बैठकर थक हारकर अपने आप वापस चले जाएंगे, लेकिन वो बताना चाहते हैं कि ये आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। ये आंदोलन प्राकृतिक संदेश है और हर वर्ग इसमें अपनी हवन रूपी आहूति डाल रहा है। उन्होंने कहा कि ऊपर वाले का साथ भी किसानों के साथ है और अभी तक मौसम का कहर भी किसानों का हौसला नहीं डगमगा पाया है। देश में पैदा हुए हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री को अपनी जिद छोड़कर अन्नदाता की बात मानते हुए तीनों कानूनों को विशेष सत्र बुलाकर निरस्त करना चाहिए। किसान यहां से तब तक नहीं जाएंगे, जब तक आंदोलन की जंग जीत नहीं जाते। सरकार आंदोलन को दबाने के लिए जो भी हथकंडे अपना ले, हम दो कदम आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन पीछे नहीं जाएंगे। किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।

 

 

 

Source : Bhaskar

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