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सितंबर में कहा गया था रोज़ 3 लाख केस के हिसाब से तैयारी कर लो; मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया

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सितंबर में कहा गया था रोज़ 3 लाख केस के हिसाब से तैयारी कर लो; मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया

 

कोरोना (corona) की दूसरी लहर में केस कहां पर जाकर रुकेंगे? ये सवाल सबके मन में है और ज़िम्मेदार जवाब देने की स्थिति में नहीं दिख रहे. 10 दिन पहले नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल के नेतृत्व वाले एम्पावर्ड ग्रुप ने ऑक्सीजन को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय को एक रिपोर्ट दी थी. इस रिपोर्ट में एम्पावर्ड ग्रुप ने ऑक्सीजन का तत्काल प्रबंध करने की बात लिखी थी. कमेटी ने आशंका जताई थी कि हो सकता है 20 अप्रैल तक रोज तीन लाख और अप्रैल के आखिरी तक कोरोना के रोज 5 लाख केस देखने को मिलें.

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सितंबर में कहा गया था रोज़ 3 लाख केस के हिसाब से तैयारी कर लो; मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया

‘प्लान बी’ की जरूरत

द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की खबर के मुताबिक, डॉक्टर वीके पॉल की के नेतृत्व वाली पॉल कमेटी ने कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए सरकार को चेताया था. पॉल कमेटी ने प्लान बी तैयार रखने के लिए भी कहा था. बता दें कि डॉक्टर पॉल महामारी से निपटने के लिए तैयार की गई सरकारी कोर टीम के सदस्य भी हैं. वो अक्सर सरकार की तरफ से कोरोना के मामलों पर जानकारी देने वाले आला अधिकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आते हैं. द इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने लिखा है कि डॉक्टर पॉल की कमेटी ने ‘प्लान-बी’ के अंर्तगत यह भी सिफ़ारिश की है कि ऑक्सीजन की सप्लाई को बढ़ाने के लिए असाधारण उपाय किये जाने की जरूरत है ताकि एक दिन में जब 6 लाख मामले आएं तो स्थिति को संभाला जा सके.

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इस कमेटी की एक बैठक के दौरान कहा गया,

कोविड के कारण बदतर स्थिति और उसके कारण पैदा हुई ऑक्सीजन की मांग की जानकारी एक अन्य उच्चाधिकार प्राप्त समूह (Empowered Group-2) (ग्रुप-2) को दी जाए.

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ऑक्सीजन और चिकित्सकीय उपकरणों की व्यवस्था का जिम्मा इसी समूह के पास है.इस ग्रुप की जिम्मेदारी है कि प्रभावित राज्यों को मेडिकल सुविधाओं और ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित की जाए.

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार कमेटी कोरना वायरस संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए प्लान बी के बारे में सोचने की बात भी कही है.
फोटो-एएनआई)

एक प्रेस स्टेटमेंट में हेल्थ मीनिस्ट्री ने कहा है कि राज्य सरकारों को कोविड के कठोर प्रबंधन के लिए कहा गया था. राज्य सरकारों को हालात को काबू में लाने के लिए सख्त उपाय करने की ताकीद की और चेताया था कि मौजूदा ढांचा कोविड की इस बड़ी लहर से निपटने में नाकाफी हो सकता है.

पिछले साल ही लगने लगा था मुश्किलों का अनुमान

सरकार को पिछले साल सितंबर में ही अंदाजा हो गया था कि कितने संसाधनों की जरूरत पड़ने वाली है. पॉल कमेटी ने सितंबर में बताया था कि अगर हर दिन तीन लाख केस आते हैं तो देश को 1.6 लाख आईसीयू बेड, 3.6 लाख नॉन आईसीयू बेड की जरूरत होगी. कमेटी ने यह भी बताया था कि 75 फीसदी ऐसे नॉन आईसीयू बेड की जरूरत होगी जिनमें ऑक्सीजन देने की सुविधा हो.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अगर भारत में 2 लाख केसेज प्रतिदिन के हिसाब से कोरोना संक्रमण बढ़े तो उसे संभाला नहीं जा सकेगा.

बता दें कि भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3 लाख 52 हज़ार 991 नए मामले आए हैं. 2,812 लोगों की मौत हुई है. इस वक्त देश में कोरोना वायरस के कुल 28 लाख 13 हज़ार 658 एक्टिव मामले हैं.

 

Source : Lallantop

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