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पानीपत

ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में इंडस्ट्री होगी रेगुलर, रजिस्ट्री वालों को मिलेगा मालिकाना हक

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ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में इंडस्ट्री होगी रेगुलर, रजिस्ट्री वालों को मिलेगा मालिकाना हक

 

ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया की इंडस्ट्री अब नियमित होगी। सरकार ने हरियाणा इंटरप्राइजेज एंड एम्प्लायमेंट पॉलिसी 2020 में इसकी घोषणा की है। 28 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन से पहले हुई रजिस्ट्रियों पर यह नियम लागू होगा। यानी अभी इंडस्ट्री जिस रूप में चल रही है, उसी के अनुरूप नियमित कर दी जाएगी। रजिस्ट्री वालों को मालिकाना हक मिलेगा।

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सरकार ने जोनल प्लान (नक्शा संबंधी) को भी इस नियम से बाहर कर दिया है। 400 उद्यमियों की यह पुरानी मांगों में सबसे अहम थीं। क्योंकि रजिस्ट्री तो हो गई, लेकिन हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचएसआईआईडीसी) की ओर से मालिकाना हक नहीं मिला था। अब उद्यमियों को हक मिल जाएगा।

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9 साल से परेशान थे ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया के उद्यमी

साल 2012 में जिला उद्योग केंद्र से लेकर एचएसआईआईडीसी को ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया की जिम्मेदारी दे दी गई। इस दौरान प्लॉट के कई टुकड़े हो गए। किसी ने कुछ हिस्सा बेच दिया तो किसी ने ट्रांसफर कर दिया। विभाग से मालिकाना हक के लिए जोनल प्लान के तहत नक्शा पास कराना पड़ता। जो नियमों के तहत मुमकिन नहीं था। इसलिए उद्यमियों ने बगैर नक्शा पास कराए ही कंस्ट्रक्शन कर लिया। अब उसी कंस्ट्रक्शन के आधार पर सरकार इंडस्ट्री को नियमित करने जा रही है।

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कॉमर्शियल यूज की अनुमति मिली

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने पहली बार ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में इंडस्ट्रियल प्लाॅट को कॉमर्शियल में बदलने की छूट भी दी है। इसके तहत अब यहां पर कोई भी कॉमर्शियल गतिविधियां चल सकती हैं। मसलन- होटल खुल सकते हैं, शोरूम बन सकते हैं आदि। इसके लिए 2000 रुपए प्रति वर्ग गज के हिसाब से कन्वर्जन फीस लगेगी।

रेगुलराइज की फीस पर पेंच

सरकार ने नियमित करने की घोषणा तो कर दी है, फीस की बात नहीं लिखी है। अब एचएसआईआईडीसी को फीस पर फैसला लेना है। रेगुलराइज करने का नियम अभी भी है, लेकिन अगर कोई प्लॉट पहले 4 बार बिक चुका है और पांचवीं बार खरीदने वाला इसे अपने नाम रेगुलराइज कराना चाहता है तो उसे पांच बार की फीस देनी होगी, इस कारण से लोग रेगुलराइज नहीं करा रहे थे। अभी रेगुलराइज की फीस 600 रुपए वर्ग गज है। उद्यमियों की इसको लेकर पॉलिसी लाने की मांग थी। अब सरकार पॉलिसी लेकर आई है, लेकिन फीस की बात नहीं लिखी है।

एक बार की फीस लें : अग्रवाल

नोटिफिकेशन में लिखा है कि जिसके पास रजिस्ट्री है, उसे मालिकाना हक देंगे। इसलिए यहीं उम्मीद करते हैं कि एक बार की फीस ही लगेगी। सरकार को यही करना भी चाहिए।-राजीव अग्रवाल, पूर्व सचिव, ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया एसोसिशन

पहले प्रोसीजर बनेगा : ईओ

एचएसआईआईडीसी के बोर्ड में इसको लेकर राज्य मैनेजमेंट प्रोसीजर बनेगा। इसके बाद प्लॉट नियमित किए जाएंगे।-मंजीत बलहारा, कार्यकारी अधिकारी, एचएसआईआईडीसी

 

 

Source : Bhaskar

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