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क्या आपका फोन सुन रहा है आपकी सभी निजी बातें? क्या आप पर है किसी की नजर? जानने के लिए पढ़ें यह खबर

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Is your phone listening to all your private talk Is anyone watching you Read this news to know
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क्या कभी अपने दोस्त के साथ फोन पर बात करते समय किसी प्रोडक्ट को खरीदने की बात की है? और क्या इसके बाद आपको उसी प्रोडक्ट से संबंधित विज्ञापन ऑनलाइन दिखाई दिए हैं? अगर हां, तो क्या आपने कभी ये सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। क्या आपका फोन आपकी बातें सुन रहा है? या फिर कोई और है आप पर नजर बनाए रखे है? अगर आप इस बारे में जानना चाहते हैं तो पढ़ें यह खबर।

play store Applications use Alphonso software to record data through  microphone

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क्या आपका फोन सुनता है आपकी हर बात?

हम में से ज्यादातर लोग रेग्यूलर ही अपनी जानकारी को अलग-अलग वेबसाइट्स और ऐप्स के साथ शेयर करते हैं। हम ऐसा तब करते हैं जब हम उन्हें कुछ परमीशन्स देते हैं या फिर कुकीज को हमारी ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक करने की अनुमति देते हैं। ये फर्स्ट-पार्टी कुकीज होती हैं जो वेबसाइट्स को हमारी कुछ चीजें याद रखने की अनुमति देती हैं। उदाहरण के तौर पर: लॉगइन कुकीज आपकी लॉगइन डिटेल्स को सेव करने की अनुमति देती हैं जिससे आपको हर बार उन्हें री-एंटर न करना पड़े।

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क्या आपका स्मार्टफोन आपकी बातचीत सुन रहा है? सावधानी है जरूरी - ZEE5 News

क्या आप जानते हैं कि वेब कुकी क्या होती है? अगर नहीं, तो इसका जवाब भी हम आपको दे देते हैं। यह एक तरह का डाटा पैकेट होता है जो किसी भी वेबसाइट पर आपकी एक्टिविटीज को इक्ट्ठा करता है। ऐसे में जब भी आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं तो वो वेबसाइट आपके कंप्यूटर को कुकीज भेजती है और आपका कंप्यूटर इसे आपके वेब ब्राउजर के अंदर मौजूद फाइल में इक्ट्ठा कर देता है। हालांकि, थर्ड-पार्टी कुकीज इसका हिस्सा नहीं होती हैं।

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इसके बाद मार्केटर्स को आपके डाटा को उपलब्ध कराया जाता है जिससे विज्ञापनदाता आपकी दिनचर्या, आपकी जरूरतों आदि के हिसाब से आपको विज्ञापन उपलब्ध कराते हैं।

कंप्यूटर्स का है बड़ा रोल:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में कई मशीन-लर्निंग तकनीकें हैं जो सिस्टम को आपके डाटा को फिल्टर और एनालिसिस करने में मदद करती हैं। इसमें रिन्फोर्समेंट लर्निंग (RL) भी शामिल होती है। इसे RL एजेंट भी कहा जाता है। एक RL एजेंट वो होता है जो किसी भी व्यक्ति की सोशल मीडिया एक्टिविटीज को समझकर खुद को ट्रेन करता है। यह इस बात को समझता है कि आप किस तरह की पोस्ट की तरफ ज्यादा आकर्षित हैं या फिर आपको किसी तरह के प्रोडक्ट में रूचि रखते हैं। वहीं, दूसरी तरफ RL एजेंट को यूजर इंटरेस्ट से संबंधित एक मैसेज भी भेजा जा सकता है।

आपको दिखाए जाने वाला विज्ञापन दूसरे डाटा पर भी होता है निर्भर:

  • अन्य प्लेटफॉर्म्स पर क्लिक किए गए विज्ञापन
  • उम्र, ईमेल, लिंग, लोकेशन जैसी जानकारियां प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा करना
  • विज्ञापनदाताओं या मार्केटिंग पार्टनर्स द्वारा प्लेटफॉर्म के साथ डाटा शेयर करना जिसके यूजर आप पहले से ही हैं
  • प्लेटफॉर्म पर किसी पेज या ग्रुप को ज्वाइन करना या लाइक करना

वास्तव में देखा जाए तो, एआई एल्गोरिदम मार्केटर्स को डाटा का एक विशाल जंक उपलब्ध कराता है। फिर इसी डाटा का इस्तेमाल कर यूजर को उसकी रूचि के मुताबिक विज्ञापन दिखाया जाता है। उदाहरण के तौर पर: Facebook शायद आपको उस चीज का रिकमडेशन भी दिखाता है जो आपके दोस्त ने हाल ही में खरीदा हो।

प्राइवेसी है यूजर की च्वाइस:

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ऐप कंपनियों को यूजर्स के डाटा को इक्ट्ठा करने, स्टोर और इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में स्पष्ट नियम और शर्तें प्रदान करनी होती हैं। लेकिन आजकल यूजर्स को भी यह ध्यान रखने की जरूरत है कि वो किस ऐप या साइट को क्या अनुमति दे रहे हैं। जरूरत हो तो ही ऐप या साइट को परमीशन दें।

डाना रेजाजादेगन, लेक्चरर (स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालॉजी) द्वारा की गई इस रिसर्च में बताया गया है कि ज्यादा प्रैक्टिकल लोग एआई से ज्यादा ह्यूमन्स की सिफारिशों को पसंद करते हैं। यह संभव है कि एआई सिफारिशें लोगों की पसंद को बाधित कर सकती हैं और भविष्य में किसी भी प्रोडक्ट की गंभीरता को कम कर सकती हैं।

इस तरह अपने डाटा को रख सकते हैं सुरक्षित:

  • अपने फोन में मौजूद ऐप्स को दी गई परमीशन्स को दोबारा जांचें।
  • जब भी कोई ऐप या साइट आपसे कोई परमीशन मांगती है तो उसे परमीश देने से पहले दो बार जरूर सोचें।
  • सोशल मीडिया अकाउंट्स को किसी भी साइट या सर्विसेज से कनेक्ट करने से पहले सोचें या फिर नजरअंदाज करें।
  • अगर आप अपनी प्राइवेसी को लेकर ज्यादा संवेदनशील हैं तो आप अपनी डिवाइस में VPN को इंस्टॉल कर लें। यह आपके आईपी एड्रेस को मास्क करती है और ऑनलाइन एक्टिविटीज को एनक्रिप्ट कती है।
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