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इसी रास्ते लाल किले से लाए जाते थे कैद क्रांतिकारी

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इसी रास्ते लाल किले से लाए जाते थे कैद क्रांतिकारी, जानिए दिल्ली विधानसभा में मिली सुरंग का पूरा इतिहास

नई दिल्ली
दिल्ली विधानसभा में लाल किले की ओर जाने वाली एक सुरंग का पता चला है। जहां इस समय विधानसभा का सदन चलता है, उसी जगह पर यह सुरंग है। बताया जाता है कि लाल किले में बंद क्रांतिकारियों को इसी सुरंग से लाया जाता था। उस समय विधानसभा में अंग्रेजों की कोर्ट चलती थी और क्रांतिकारियों को सुरंग से ही सुनवाई के लिए लाया जाता था। इस सुरंग का पता 2016 में चला था और उसके बाद से सुरंग के मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। करीब चार मीटर तक ही खुदाई हुई है और सुरंग में अब और खुदाई नहीं की जा सकती। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल का कहना है कि अब हमें सुरंग का छोर मिल गया है, लेकिन हम इसे आगे नहीं खोद रहे हैं। मेट्रो प्रॉजेक्ट के कारण मेट्रो पिलर भी आ गए है साथ ही सीवर लाइनें भी डाली जा चुकी है। ऐसे में सुरंग के सभी रास्ते अब बंद हो गए हैं। गोयल ने कहा कि अब विधानसभा को पूरे साल जीवंत बनाया जाएगा। जिस तरह से लोग लाल किला, कुतुब मीनार देखने जाते हैं, उसी तरह विधानसभा को भी टूरिस्ट प्लेस बनाया जाएगा।

Delhi-Assembly-Tunnel

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इसी रास्ते लाल किले में बंद क्रांतिकारियों को सुनवाई के लिए लाया जाता था
राम निवास गोयल का कहना है कि इस सुरंग का निर्माण कब हुआ, इसके इतिहास को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं है। माना जाता है कि सुरंग के जरिए लाल किले में बंद क्रांतिकारियों को सुनवाई के लिए लाया जाता था। इस सुरंग का छोर ढूंढ लिया गया है, लेकिन इसे आगे खोदा नहीं गया है। मेट्रो और कई दूसरे निर्माण हो चुके हैं। अब इस सुरंग को देखने का मौका आम लोगों को भी मिलेगा। सुरंग विधानसभा को लाल किले से जोड़ती है। इसके तीन छोर हैं। छोर लाल किले की ओर जाता है, दूसरा छोर विधानसभा में पीछे की ओर है। तीसरा छोर सदन में विधानसभा अध्यक्ष के आसन की ओर है।

तीन महीने पहले तोड़ा फांसी घर का ताला
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि क्रांतिकारियों को सुरंग के जरिए यहां लाया जाता था। विधानसभा के दूसरी तरफ लाल किले के अपोजिट फांसी घर मिला है। यह आजादी के बाद से बंद पड़ा था। तीन महीने पहले फांसी घर का ताला तोड़ा गया। इसे क्रांतिकारियों के मंदिर के रूप में विकसित किया जा रहा है। 2016 में मिली सुरंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जैसी सुरंग का पता चला था, वैसे ही स्वरूप में यह आज भी है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हम सभी यहां पर फांसी के कमरे की मौजूदगी के बारे में जानते थे। आजादी के 75वें साल में मैंने उस कमरे का निरीक्षण करने का फैसला किया था। हम उसे स्वतंत्रता सेनानियों के मंदिर के रूप में बदलना चाहते हैं।

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कैसे चला था पता सुरंग के बारे में
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि वे 1993 में विधायक बने थे। उस समय स्टाफ से पता चला था कि यहां पर सुरंग है। उसके बाद हरियाणा में पूर्व विधायक किरण चौधरी ने भी इस बारे में बताया। विधानसभा के सबसे पुराने कर्मचारियों से बात की और उन्होंने जो लोकेशन बताई, उसी जगह पर सुरंग मिली। सुरंग को संरक्षित कराया जाएगा। सुरंग और फांसी घर को आम जनता के लिए खोला जाएगा। सुरंग की चौड़ाई और ऊंचाई इतनी है कि यहां पर कई लोग एक साथ खड़े हो सकते हैं।

क्या है विधानसभा और सुरंग का इतिहास
बताया जाता है कि 1912 में अंग्रेजों ने राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद केंद्रीय विधानसभा के रूप में दिल्ली विधानसभा का इस्तेमाल किया गया था। 14 साल तक यह इमारत अंग्रेजों की संसद रही। 1926 के बाद वर्तमान लोकसभा में केंद्रीय विधानसभा को शिफ्ट किया गया। 1926 में इसे एक कोर्ट में बदल दिया गया और अंग्रेजों द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को लाने-ले जाने के लिए इस सुरंग का इस्तेमाल किया जाता था। 1926 से 1947 तक यह अंग्रेजों की कोर्ट रही। यहीं पर फांसी घर भी बनाया गया था।

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क्या है तैयारी
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सत्र करीब चालीस दिन चलता है और साल के बाकी दिनों में विधानसभा को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित किए जाने की योजना पर काम चल रहा है। ‘स्वतंत्रता संग्राम को लेकर इस जगह का इतिहास बेहद समृद्ध है और इसे टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित किया जाएगा। 1912 से अब तक के इतिहास को डिजिटल रूप में दिखाया जाएगा। विधानसभा में एक हॉल भी बना रहे हैं, जहां क्रांतिकारियों की याद में उनकी तस्वीरें व जानकारी दी जाएगी।

 

 

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