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Good News: Lockdown से घटा प्रदूषण का स्तर तो जालंधर से दिखने लगे 200 Km दूर हिमाचल के पहाड़

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जिले में कर्प्यू और देश भर में लॉकडाउन के बीच शहर के लोगों को एक शानदार नजारा देखने को मिला। पिछले कई दिन से चल रहे कर्फ्यू के कारण जहां लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं प्रकृति और पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचा। वायु प्रदूषण न फैलने से शहर का वातावरण बिल्कुल साफ हो गया है। ऐसे में शहर के बाहरी इलाकों से हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पहाड़ दिखने लगे हैं।

शुक्रवार सुबह गदईपुर के बाहरी हिस्से से ये सभी पहाड़ साफ दिखे। क्षेत्र के लोग घरों की छत पर चढ़ कर इन्हें देखने जुटने लगे। विशेषज्ञों के मुताबिक 30 वर्ष बाद हवा इतनी साफ हुई है कि 200 किमी. दूर ये पहाड़ जालंधर के लोगों को दिखाई दिए हैं।

जालंधर में छतों पर हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों का नजारा मोबाइल कैमरे में कैद करते हुए लोग।

जालंधरः पहाड़ों का नजारा किशनपुरा से भी स्पष्ट दिखा। यहां भी बड़ी संख्या में लोगों ने छतों पर आकर इन्हें देखा।

जालंधर शुक्रवार को मौसम साफ होने पर हिमाचल प्रदेश के पहाड़ दिखने लगे। बड़ी संख्या में छतो पर एकत्र होकर लोग इन्हें निहारते रहे।

धौलाधार पहाड़ हैं ये

दोआबा कॉलेज में भूगोलशास्त्र के विभाग प्रमुख प्रो. दलजीत सिंह ने बताया कि जालंधर से देखते वक्त जो पहाड़ दिख रहे हैं वे धौलाधार शृंखला के हैं। डलहौजी के ऊपर वाले बर्फीले पर्वत। बचपन में यह नजारा देखा हो तो पता नहीं लेकिन सुना बेशक है।

जालंधर में दूरबीन लेकर बर्फ से लदे पहाड़ों का नजारा देखती हुई एक बच्ची।

जालंधरः शहर के केंद्र में स्थित पुडा कांप्लेक्स से भी पहाड़ों का खूबसूरत नजारा शहर के लोगों को दिखाई दिया।

लोगों ने मोबाइल में कैद किया नजारा, दूरबीन लेकर भी पहुंचे

शहर के बाकी हिस्से में भी लोग छतों पर आकर इस नजारे को देख रहे हैं। कोई दूरबीन लेकर नजारे को निहार रहा था तो कोई इसे अपने कैमरे में कैद करने में जुटा था। बच्चे हों या बड़े हर किसी का उत्साह देखते ही बन रहा है। शहरवासी प्रकृति की खूबसूरती निहार कर हैरान है। प्रदूषण के कारण लोगों को कभी पता नहीं चला कि शहर से हिमाचल के पहाड़ देखे जा सकते हैं।

 

इस नजारे की चर्चा ट्विटर तक जा पहुंची है। भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुशांत नंदा ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा कि प्रकृति कैसी है और हमने इसके साथ क्या कर दिया है। उन्होंने लिखा कि जालंधर में धौलाधार पहाड़ 30 वर्ष बाद नजर आए हैं।

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