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जानिए ताज़ा हालात, यहीं से पूरे किसान आंदोलन की तय की गई रणनीति

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जानिए ताज़ा हालात, यहीं से पूरे किसान आंदोलन की तय की गई रणनीति

कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के साथ ही पानीपत के किसानों का 359 दिनों का संघर्ष आखिर सफल रहा। इस दौरान पानीपत के किसानों ने तीन दिल्ली कूच, दो-दो रेल रोको, चक्का जाम एवं भारत बंद और एक-एक संसद कूच एवं महापंचायत में अहम भूमिका निभाई। हर रणनीति की घोषणा पर आगे बढ़कर उसे अंजाम तक पहुंचाया। पानीपत कुछ चुनिंदा जिलों में रहा, जहां के किसानों ने महापंचायत का आयोजन कराया, जहां हजारों की संख्या में किसान जुटे। बीते 359 दिनों का संघर्ष आसान नहीं था, लेकिन पानीपत के 195 गांवों का किसान डटा रहा, जुटा रहा।
26 नवंबर की शाम 6:30 बजे 50 हजार किसान पहुंचे, स्थानीय किसान नेता किए गए थे नजरबंद
पानीपत में किसान आंदोलन 26 नवंबर की शाम 6:30 बजे से शुरू हुआ, जब पंजाब से चलकर अंबाला, शाहबाद और करनाल होते हुए 50 हजार से अधिक किसान पानीपत पहुंच गए। रात भर पानीपत टोल पर ही डेरा डाला और सुबह दिल्ली के लिए रवाना हुए। पानीपत टोल पर भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों में जोश भरा और इस दिल्ली कूच में पानीपत के भी हजारों किसान शामिल हो गए। पानीपत टोल पर पहुंचने से पहले ही पुलिस ने पानीपत के स्थानीय किसान तत्कालीन उपप्रधान बिंटू मलिक, जय करण कादियान और भाकियू के तत्कालीन प्रधान कुलदीप बलाना को पुलिस ने 16 घंटे के लिए नजर बंद तक कर दिया था।

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पुलिस ने खोद दिया था नेशनल हाईवे, युवा किसानों ने गड्ढे भरकर बना दिया था रास्ता
पानीपत में किसानों के पहुंचने के बाद पुलिस ने हल्दाना बॉर्डर पर नेशनल हाईवे को 10 फीट तक खोद दिया था। जिससे पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली कूच नहीं कर सकें, लेकिन पानीपत में पहुंचने के बाद युवा किसानों ने रातों रात जेसीबी और अन्य उपकरण से हाईवे के गड्ढों को भर दिया था। इसके साथ ही ट्रैक्टरों को दिल्ली के लिए रवाना किया गया।
पांच घंटे तक पुलिस से एक्सपायरी डेट के आंसू गैस के गोल दागे थे और वाटर कैनन से फेंका था पानी
27 नवंबर 2020 को दिल्ली कूच करने के दौरान जिले के किसानों को लगा कि वह आसानी से पानीपत पार कर लेंगे, लेकिन पानीपत पुलिस लाइन के सामने आते ही पुलिस ने किसानों पर वाटर कैनन से बौछार शुरू कर दी थी। आंसू गैस के गोले दागे गए थे, ये गोले एक्सपायरी डेट थे। जिसके बाद भी किसान डिगे नहीं। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपने बनाए रास्ते से दिल्ली की ओर कूच करना जारी रखा और सिंघु बार्डर पहुंचे।
पानीपत टोल पर हार्ट अटैक से एक किसान की हुई मौत, विरोध में गेहूं की खड़ी फसलों पर चला दिए ट्रैक्टर
आंदोलन के दौरान पानीपत टोल पर गांव सिवाह के एक किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। सभी किसानों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की थी और कहा था कि आंदोलन जारी रहेगा। इतना ही नहीं इसराना, बापौली, सनौली, मतलौडा और समालखा के किसानों ने अपनी गेहूं की खड़ी फसल को ट्रैक्टर चलाकर उजाड़ दिया था। उनका कहना था कि जब फसल का सही दाम ही नहीं मिलना तो इसका क्या करेंगे।

27 नवंबर को दिल्ली कूच करने के दौरान किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले का प्रयोग करते हुए पुल?

किसान आंदोलन की मुख्य बातें:
– दिसंबर में एक दिन टोल शुरू होने के बाद से पिछले 11 महीने से बंद
– जिले के किसानों ने 26 जनवरी को लाल किला दिल्ली कूच में लिया था भाग
– मुजफ्फरनगर समेत विभिन्न जिलों की 10 किसान महापंचायत में लिया भाग
– पानीपत में 50 हजार से ज्यादा किसानों के साथ की गई महापंचायत

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