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मेयर के पिता की धरनागीरी फेल..11 महीने से सड़क को फंड का इंतजार

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मेयर के पिता की धरनागीरी फेल11 महीने से सड़क को फंड का इंतजार
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मेयर अवनीत कौर के पिता भूपेंद्र सिंह खुद शहर के पहले मेयर रह चुके हैं। धरनागीरी के लिए मशहूर भूपेंद्र सिंह ने सेक्टर 25 पार्ट-2 की रेजिडेंस सड़क के लिए धरना दिया। सड़क की बजरी उठाकर बुग्गी पर ले गए। नगर निगम के कमिश्नर को जमकर कोसा। इस वाकया को 11 महीने हो चुके हैं। धरने के दिन ही एस्टीमेट बनाने का दावा तो हुआ लेकिन अब तक फंड का इंतजार हो रहा है।

सड़क पर रहने वाले लोगों, पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह सहित निगम के अफसरों से बात की। आम लोगों में जहां गुस्सा है, पूर्व मेयर को अब भी भरोसा है तो निगम अधिकारियों को इंतजार है। इस सबके बीच, वो लोग पिस रहे हैं जो यहां रहते हैं और रोजाना यहां से गुजरते हैं।

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The Joke Of Development Is Blowing The Potholes Of The Roads In Samalkha -  समालखा में सड़कों के गड्ढे उड़ा रहे विकास का मजाक - Panipat News

मित्तल मेगा माल के नजदीक ही पाइट स्कूल से होते हुए हनुमान चौक तक जाती है सेक्टर 25 पार्ट-2 की सड़क। इसके साथ ही जिमखाना क्लब से होते हुए सड़क है। करीब तीन किलोमीटर के इस क्षेत्र में ढाई करोड़ से सड़क का निर्माण होना है। सड़क पर ही रघुनाथ धाम से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। कोठियां ऐसी हैं, जिनकी कीमत दो से पांच करोड़ है। इन कोठियों के ठीक सामने दस फीट तक लंबे गड्ढे हैं। पूर्व मेयर का जवाब, दो महीने और लगेंगे

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मेयर के पिता की धरनागीरी फेल..11 महीने से सड़क को फंड का इंतजार

पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने  बातचीत में कहा कि दो महीने का वक्त और लग सकता है। आपने धरना भी दिया था, तब भी सड़क नहीं, क्या आगे फिर धरना देंगे, इस सवाल पर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इसकी जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने पता लगाया है। इस सड़क के निर्माण के लिए निगम की ओर से प्रक्रिया की जा रही है। फंड का ही इंतजार है। बाकी सब काम पूरा हो चुका है। जेई का जवाब, चीफ इंजीनियर को जाएगा पत्र

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जेई अजय ने बातचीत में कहा कि पचास लाख से अधिक के काम के लिए चीफ इंजीनियर से मंजूरी लेनी होती है। पानीपत में चीफ इंजीनियर नहीं है। पंचकूला में पत्र जाएगा। वहां से मंजूरी मिलते ही फंड मिल जाएगा। बाकी सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उम्मीद है कि नवंबर और दिसंबर तक सड़क बन जाए। आखिर कब तक धरना दिया जाए

माइक्रो इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान प्रमोद शर्मा का कहना है कि आखिर कब तक धरना दिया जाए। नगर निगम में कोई सुनने को तैयार ही नहीं है। केवल आश्वासन ही दिए जाते हैं। इस सड़क के लिए बोर्ड लगाए। पूर्व मेयर ने भी प्रदर्शन किया। इसके बावजूद सड़क नहीं बनी।

Despite the annual expenditure of Rs 3.20 crore on maintenance, potholes in  the roads emerged in the rain, bypassing the solution | मेंटेनेंस पर सालाना  3.20 करोड़ रुपए खर्च के बावजूद बारिश

विश्लेषण : निगम की सियासत में शहर का विकास ठप

नगर निगम की सियासत के कारण शहर का विकास ठप हो चुका है। पानीपत नगर निगम में चीफ इंजीनियर का पद स्वीकृत हुआ था। महीपाल सिंह यहां पर आए भी। मेयर अवनीत कौर, निगम के पार्षदों और विधायक प्रमोद विज के बीच सियासी खींचतान का असर ये हुआ कि महीपाल सिंह ने यहां से तबादला ही करवा लिया। अगर चीफ इंजीनियर यहां होते तो पचास लाख से अधिक के विकास कार्यों के लिए पत्रों का आदान-प्रदान करने की जरूरत ही नहीं होती। यहीं के यहीं ही स्वीकृति मिल जाती।

नगर निगम की सियासत मेयर अवनीत कौर, सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट, डिप्टी मेयर रविद्र फुले, शहर के विधायक प्रमोद विज, ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा और सांसद संजय भाटिया के बीच चलती है। महीपाल ढांडा ने मनोनीत पार्षद मदन सिंह का विरोध कर दिया था। तब पवन राणा को पार्षद बनाया गया। लोकश नांगरू डिप्टी मेयर बनते-बनते रह गए। प्रमोद विज ने एक अधिकारी के आने का विरोध किया, लेकिन महीपाल ढांडा की बदौलत अधिकारी न केवल ज्वाइन कर गया, बल्कि उसे स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित भी किया गया। 29 के 29 पार्षद भाजपाई हैं, इसके बावजूद गड्ढों का ही विकास हो रहा है। पार्षदों का कहना है कि उनकी सुनवाई नहीं होती।

Source Jagran

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