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विधायक प्रमोद विज की ईमानदारी पड़ी शहर को भारी, बने शहर के मनमौन सिंह?

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कमीशनखोरी शहर पर भारी पड़ रही है। गंभीर बात यह है कि नगर निगम के अफसर काबू में नहीं आ रहे। शायद यही वजह है कि 8 माह पहले 1.94 करोड़ रुपए में खरीदी गई 9850 स्ट्रीट लाइटें अब तक नहीं लग पाई हैं। सीधा मुंबई से कंपनी से निगम ने लाइटें खरीदी थीं। इसमें अफसरों की भागीदारी नहीं थी। 5 माह तक लाइटें पड़ी रहीं तो दबाव के बाद मार्च-2021 में लाइटें लगाने की प्लानिंग बनाई गई। अफसरों ने उसे भी गलत बना दिया, ताकि लाइटें न जल सकें। स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए सिंगल तार लगाने का टेंडर दे दिया।

ठेकेदार ने सिंगल तार पर ही 900 के करीब लाइटें लगा दी। सिंगल तार के कारण 6 लाख रुपए की 300 लाइटें लगाते ही खराब हो गई। निगम अफसरों के इस कारनामे से सभी हैरान हैं। स्ट्रीट लाइट कमेटी में शामिल सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्‌ट और पार्षद रविंद्र भाटिया ने कहा कि अफसरों को कमीशन नहीं मिला, इसलिए जान-बूझकर लाइटें नहीं जलने दी जा रही हैं। विधायक प्रमोद विज ने भी गंभीर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि निगम का भगवान मालिक है। मैं पैसे लाकर दे सकता हूं, मॉनिटरिंग निगम वाले करेंगे। इतना नीचे मैं नहीं गिर सकता।

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Mla Permode Vij Interview

नगर निगम में कमीशन का बड़ा गेम, लाइट माफिया शहर में नहीं लगने दे रहा लाइटें

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लाइट लगाने के टेंडर को दोगुना करने की प्लानिंग

निगम ने 1.66 करोड़ रुपए का टेंडर यमुना नगर की कंपनी को दिया। कंपनी को सिंगल तार पर लाइटें टांगनी थीं। सिंगल तार के कारण 300 लाइटें फ्यूज हो गई। अब मामला उजागर हुआ तो निगम वाले डबल तार का उपयोग करने के लिए कंपनी को कह रहे हैं। कंपनी ने इसके लिए टेंडर राशि बढ़ाने की बात कही, जो 1.50 करोड़ के करीब होगी।

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मेयर से पार्षद बोले- लाइटें लगवाओ

मेयर ने बुधवार को सेक्टर-13/17 स्थित कार्यालय में पार्षदाें व निगम अफसरों के साथ बैठक की। इसमें कंपनी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। मेयर ने कहा कि 300 लाइटें खराब हो गई हैं। पार्षदों ने कहा कि वार्डों में जल्द से जल्द लाइटें लगाई जाएं।

बड़ा सवाल, आखिर क्याें नहीं लग रहीं स्ट्रीट लाइटें?

आखिर ऐसा क्यों है कि कंपनी से सीधी खरीदी गई लाइटें 8 माह से निगम के स्टोर में पड़ी हैं? जबकि इसी निगम के अफसरों ने 2014 से 2019 तक स्ट्रीट लगाने में 11 करोड़ रुपए खर्च दिए थे। इसे जानने के लिए आपको थोड़ा पीछे जाना होगा। 1 अप्रैल 2018 से 10 अगस्त 2019 के बीच निगम अफसरों ने टेंडर के अलावा डिपार्टमेंटल वर्क के बहाने 3 करोड़ की लाइटें लगवा दीं थी। शहर में लाइटें लगी तो बवाल मच गया। फिर निगम ने दुष्यंत भट्‌ट की अगुवाई में जांच कमेटी बनाई।

BEST plans to replace 1500 corroded street lamp poles across Mumbai

जांच में समाने आया कि निगम अफसरों से मिलकर ठेकेदारों ने कबाड़ी से पानी की पाइप लाइन खरीदकर स्ट्रीट लाइट के खंभे बना दिए। दिल्ली और पानीपत में लाइटों को असेंबल कर कंपनी का बता दिया। इसमें 3 करोड़ का फर्जीवाड़ा मिला था। मंत्री अनिल विज ने जांच बिठा दी, लेकिन न रिपोर्ट आई न कार्रवाई हुई। चूंकि, इस बार कंपनी से सीधी लाइटें खरीदी गई। इसमें अफसरों को कमीशन नहीं मिला। इसलिए प्लानिंग को ठप करने में लगे हैं, ताकि आगे से सीधी लाइटें न खरीदी जाएं।

सीनियर डिप्टी मेयर की 2 बातें

1. निगम में कमीशन का जबरदस्त गेम चल रहा

निगम में कमीशन का जबरदस्त गेम चल रहा है। किसका नाम लूं, सब शामिल हैं। यह शहर जानता है। घूसखोरी कम करने को विधायक प्रमोद विज के माध्यम से लाइट सीधी खरीदी गई। चूंकि, अफसरों को इसमें कमीशन नहीं मिला। इसलिए पूरा गेम चल रहा है।

2. जेई व एक्सईएन के खिलाफ कार्रवाई करें

इसमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक विंग के जेई गौरव कुमार और एक्सईएन नवीन अहलावत की मुख्य भूमिका है। दोनों की गलत प्लानिंग से ही शहर अंधेरे में है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को लेटर लिख रहा हूं कि दोनों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

मैं इतना नीचे नहीं जा सकता : विधायक विज

मैंने लाइटें खरीदवा दीं। 8 माह बीत गए, लेकिन लाइटें नहीं लग रही हैं। बहुत ही गंभीर मामला है। मेयर व पार्षदों को देखना है कि निगम में काम कैसे होगा। मैं इतना नीचे नहीं जा सकता जितना निगम के अफसर हैं, लेकिन चुप नहीं रहूंगा, प्रयास करता रहूंगा।

-प्रमोद विज, विधायक, पानीपत

अब इनकी सुनें- जेई और एक्सईएन की सफाई

1. फील्ड में प्लानिंग बदली इसलिए खराब हुई लाइटें : जेई

​​​​​​​प्लान बना था कि एक ही लाइन में लाइटें लगेगी। इसके लिए सिंगल तार से काम चल जाता, लेकिन जब टेंडर दे दिया और कंपनी लाइटें लगाने पहुंची तो पार्षद एक-दो लाइटें गलियों में लगाने लगे। इसलिए, लाइटें खराब हुई हैं। इसमें किसी की गलती नहीं है।
-गौरव कुमार, जेई

​​​​​​​2. उसी टेंडर में कराएंगे नए सिरे से काम : एक्सईएन

पहले सिंगल तार का टेंडर दिया गया, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। इसलिए कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाया गया। अब उसी टेंडर में डबल तार लगाकर लाइटें लगाई जाएगी।
-नवीन अहलावत, एक्सईएन

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