Connect with us

City

मानसून‍ रिटर्न, हरियाणा के कई जिलों में भारी बारिश, सितंबर में टूटेगा रिकार्ड

Published

on

Advertisement

मानसून‍ रिटर्न, हरियाणा के कई जिलों में भारी बारिश, सितंबर में टूटेगा रिकार्ड

सितंबर में मानसून रिकार्ड तोड़ सकता है। इस महीने की शुरुआत से ही रुक-रुककर बारिश हो रही है। वहीं कई क्षेत्रों में तेज बारिश हुई। शुक्रवार सुबह भी हरियाणा के कई जिलों में बारिश शुरू हो गई। मौसम विज्ञानियों ने संभावना जताई कि इस बार सितंबर में मानसून का रिकार्ड टूट सकता है। अगस्‍त में बारिश के खराब प्रदर्शन पिछले कई सालों बाद देखने को मिला था।

सितंबर में जोरदार बारिश की संभावना है।

Advertisement

1951 के बाद अगस्‍त में सबसे कम बारिश

मानसून का मुख्य महीना अगस्त, 1951 के बाद से दूसरा सबसे खराब मानसून महीना बन गया है। महीना लांग पीरियड एवरेज (एलपीए) के 24 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त हो गया है। इस दौरान 258.2 मिलीमीटर के मासिक सामान्य के मुकाबले महज 196.2 मिमी बरसात ही दर्ज की गई है। यह महीना 25 दिनों में सामान्य से कम दैनिक बरसात दर्ज करने के लिए भी रिकार्ड में जाता है। तीसरे सप्ताह के दौरान यह कमी लगभग 40 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो गई।

Advertisement

jagran

70 सालों में बरसात के आंकड़े में सबसे बड़ी कमी

Advertisement

जुलाई और अगस्त एक अच्छे मानसून के मौसम के लिए, सामान्य से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मुख्य मानसून महीने हैं। मानसून 2021 जुलाई में सामान्य से कम बरसात के साथ एलपीए के 93 प्रतिशत पर समाप्त हुआ है। हालांकि अगस्त ने पिछले 70 सालों में बरसात के आंकड़ों की सबसे बड़ी कमी होने से बचा लिया।

 

सितंबर में अच्‍छी बारिश की उम्‍मीद

2009 एक अल नीनो वर्ष था, जिसमें 22 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त होने वाला मानसून का मौसम था। 2009 के दौरान सितंबर का महीना भी विफल रहा, क्योंकि इसमें 19 प्रतिशित की कमी दर्ज की गई थी। संयोग से वर्ष 2021 की स्थितयां थोड़ी अलग लग रही हैं। सितंबर महीने में मानसून के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। इसके सामान्य या सामान्य से अधिक बरसात होने की उम्मीद है।

 

सितंबर में बारिश की ये वजह

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, सितंबर के महीने में बंगाल की खाड़ी में 3-4 मानसूनी मौसमी सिस्टम बनने की उम्मीद है। जिससे अधिकांश हिस्सों में मानसून की बरसात देखने को मिल सकती है। पिछले मौसमी सिस्टम के अवशेष गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक पहुंच चुके हैं। 5-6 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और मानसून निम्न दबाव बनने की संभावना है। यह मौसम सिस्टम भारत के पूर्वी, मध्य और उत्तरी भागों में अपने पूर्ववर्ती और अच्छी बरसात की शुरूआती करेगी। सितंबर का महीना मानसून की बरसात की रिकवरी लाने और मौसम को सूखे के प्रभाव से बचाने के लिए है।

 

कैथल में भी शुक्रवार सुबह से ही मौसम परिवर्तनशील, बूंदाबांदी

शुक्रवार सुबह से ही मौसम परिवर्तनशील हो रहा है। सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई है। इसके बाद आसमान में बादल छाए हुए है। इस बूंदाबांदी से धान व कपास की फसल को फायदा मिलेगा। मौसम समन्वयक रमेश चंद्र का कहना है कि अगले दो दिनों में बारिश हो सकती है। वहीं लोगों को गर्मी से भी राहत मिलेगी। तापमान में भी गिरावट आएगी। बता दें कि बारिश होने से जहां फसलों में आने वाली बीमारियों की संभावना कम रहेगी। इस समय कपास में सफेद मक्खी का सबसे ज्यादा खतरा आने का रहता है। धान में पत्ता लपेट व ब्लास्ट बीमारी की संभावना रहती है। बारिश से राहत मिलेगी।

 

समालखा में सबसे ज्यादा गरजे

सितंबर का महीना शुरू होते ही बारिश भी झमाझम होने लगी। अगस्त महीने में जहां कम बारिश हुई थी, वहीं सितंबर के पहले तीन दिन तो मानों बारिश के ही रहे। मौसम विभाग के अनुसार, आगे भी एक सप्ताह तक ऐसा ही मौसम रहने वाला है। फिलहाल तो संकेत रोजाना बारिश के हैं। हालांकि बीच-बीच में धूप भी निकलती रहेगी। जिस तरह शुक्रवार को हुआ। सुबह बारिश हुई। थोड़ी देर बाद धूप निकल आई। इससे उमस बन गई।

शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, पानीपत में 32 एमएम, समालखा में 54 एमएम, इसराना में 35 एमएम, बापौली में चार और मतलौडा में छह एमएम बारिश दर्ज की गई।

Advertisement